योग करती हूं कोई चोरी नहीं, फिर प्रताड़ना और असुरक्षा क्यों- राफिया नाज

योग करती हूं कोई चोरी नहीं, फिर प्रताड़ना और असुरक्षा क्यों- राफिया नाज
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पीबी ब्यूरो ,   Aug 03, 2020

योग करती हूं. कोई चोरी नहीं. योग करना गुनाह है क्या. फिर ये धमकी, प्रताड़ना और असुरक्षा क्यों. योग भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसे किसी धर्म, मजहब से नहीं जोड़ा जा सकता. जबकि पहले ही हमने न जाने कितने सितम सहे. हमले हुए. घर पर पथराव हुआ. इसके बाद भी मेरी सुरक्षा हटा ली गई. 

यह कहते हुए राफिया नाज क्षण भर के लिए खामोश हो जाती हैं. फिर सुरक्षा और मौजूदा मुश्किलों पर कई सवाल खड़ा करती हैं. 

दरअसल रांची की जानी-मानी योग शिक्षक राफिया नाज इन दिनों बेहद परेशान हैं.

उनकी परेशानी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने आज ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेस कर सरकार से राफिया को सुरक्षा देने की मांग की. 

इस बाबत बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राज्य के मुख्य सचिव को भी हालात से अवगत कराएंगे. 

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मेल भेज कर व्यथा बताई

राफिया ने हाल ही में बाबूलाल मरांडी को एक मेल भेजकर अपनी व्यथा बताई थी. इसके बाद बाबूलाल ने उन्हें बुलाकर प्रेस कांफ्रेस किया और राफिया की परेशानी को लेकर स्थिति स्पष्ट की. 

बाबूलाल मरांडी के बाद राफिया भी पत्रकारों से रूबरू हुईं और हालात पर सवाल खड़े किए. बातचीत के दौरान उन्होंने दो टूक कहाः प्रताड़ना, धमकी तमाम मिलती रही. जान चली जाए. पर वे योग करती हैं और करती रहेंगी. राफिया ने कहा मेरा धर्म और कुरआन भी इजाजत देता है कि आप नेक काम कर रहे हैं, तो डरना नहीं. जाहिर है योग मरते दम तक करूंगी.  

इस दौरान राफिया ने एक ऑडियो भी प्रेस को सुनाया. उनका कहना था, ''जब उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक को फोन कर अपनी स्थिति बतानी चाही, तो उधर से जवाब मिलाः दिमाग मत खराब करो''. 

आखिर क्यों छोड़ दूं

एक सवाल के जवाब में राफिया ने कहा- देश के हर कोने से उन्हें धमकी मिलती रही है. कोई कहता है करियर चौपट कर देंगे. कोई कहता है चुटकी में बर्बाद हो जाओगी. जाहिर है डर के बीच वे लगातार मेल कर पुलिस को अपनी स्थिति के बारे में बताती रही हूं. सीएम को भी मैंने मेल किया.  

राफिया ने यह भी कहा कि सुरक्षा हटाए जाने के बाद जब वे सरकार को अपनी स्थिति बताने के लिए सचिवालय गई थीं, तो अंदर तक जाने नहीं दिया गया. जबकि पूर्व में उन्हें लिखित तौर पर कहा गया था कि जब भी बाहर जाएं, तो पुलिस को जानकारी जरूर दें. 

23 साल की राफिया ने कहा, कई मौके पर उनसे कहा गया, ''योग ही छोड़ दो. मोहल्ला और घर बदल लो. फोन मत रखो. फेसबुक इस्तेमाल मत करो. आखिर क्यों. किसी को बता नहीं सकती हूं कि ये मेरी दोस्त और भाई हैं. राफिया उन हजारों महिलाओं की बात कर रही है, जिन्हें इस तरह से प्रताड़ित किया जाता है. क्या यही है काम करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता.लगता है, मुझे स्वीट प्वाइजन की तरह मारा जा रहा, पर क्या योग करना गुनाह है. सरकार किसी दल की हो, क्या सुरक्षा के मायने बदल जाते हैं.'' 

राफिया जब यह सब कह रही थीं, तो बाबूलाल के माथे पर बल पड़े थे. उन्होंने कहा भी कि यह आहत करने वाली स्थिति है. 

मार्च में हटाई गई सुरक्षा

बाबूलाल मरांडी ने कहा, हमनें राफिया की बातें सुनी. तमाम दरख्वास्त पढ़े. योग में उसकी सफलता के बारे में जाना. उन्होंने अब तक कम से कम 52 गोल्ड मेडल जीते हैं. योग गुरु रामदेव स्वामी के साथ भी मंच साझा किया है. आखिर योग में बुराई क्या है. 

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राफिया और उनके परिवार की व्यथा जानकर यही लगा कि सरकार और सिस्टम के लोग इनके साथ बेरुखी से पेश आ रहे हैं. राफिया को साल 2017 में सुरक्षा दी गई थी, जिसे मार्च में हटा लिया गया.  

बाबूलाल ने कहा, ''हैरत होती है कि झारखंड पुलिस ट्वीट कर कहती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए वह प्रतिबद्ध है. जबकि दूसरी तरफ राफिया के किसी भी आवेदन पर त्वरित और मुकम्मल कार्रवाई नहीं होती. अलबत्ता थाना में बुलाकर उलटे माफी मंगवाते हैं. कहते कि योग करना छो़ड़ दो. राफिया ने डीजीपी से बात की, तो वे भी बेरुखी से पेश आए. जब पुलिस का सबसे बड़ा अफसर सुनने से इनकार करें, तो लोग कहां जाएंगे.पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि राफिया ने हमें चार दिन पहले मेल किया. फिर भाई के साथ आकर परेशानी बताई कि जब से सुरक्षा हटी है रोज धमकी दी जा रही है. घर के लोग भी परेशान दिखे. 

मरांडी ने सरकार और पुलिस से कहा, आज सुरक्षा प्रदान नहीं करेंगे, तो कल कुछ हो जाए तो आश्चर्य नहीं. पुलिस गुंडों, अपराधी पर कार्रवाई नहीं कर उलटे इनसे माफी मंगवाती है. इसलिए सरकार से मांग करता हूं कि राफिया को सुरक्षा मिले और इनके घर वाले भी सम्मान से जी सकें. 


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