क्यों आसान नहीं है हेमंत सोरेन के लिए मंत्री चुनना?

 क्यों आसान नहीं है हेमंत सोरेन के लिए मंत्री चुनना?
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पीबी ब्यूरो ,   Jan 01, 2020

बहमुत के लिए पूर्ण और मजबूत आंकड़ा रहने के बाद भी झारखंड में हेमंत सोरेन कैबिनेट का विस्तार बाकी है. 29 दिसंबर को हेमंत सोरेन ने सत्ता की बागडोर संभाली है. अंदरखाने जो कुछ चल रहा है, उसके संकेत साफ है कि विधानसभा में विस्वासमत हासिल करने के बाद ही कैबिनेट का विस्तार होगा.

जेएमएम से मंत्री कौन होगा, यह फैसला शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन को लेना है. लेकिन हेमंत के लिए मंत्री चुनना चुनाव लड़ने-लड़ाने से ज्यादा कठिन हो सकता है. इसलिए विश्वासमत से पहले वे पत्ते खोलना नहीं चाहते. 

जेएमएम में दर्जन भर दिग्गज चुनाव जीते हैं. साथ ही 30 सीटों पर चुनाव जीत कर जेएमएम सबसे बड़ा दल के रूप में उभरा है. हेमंत सोरेन दो सीटों पर चुनाव जीते हैं. बाकी 28 विधायक उनके दल से हैं. संकेत साफ हैं कि मंत्रिमंडल में बड़ा हिस्सा जेएमएम का ही होगा. इस बीच स्टीफन मरांडी प्रोटेम स्पीकर बने हैं. 

अंदरखाने जो कुछ चल रहा है, उस मुताबिक स्टीफन मरांडी को स्पीकर के पद पर भी बैठाया जा सकता है. छह से आठ जनवरी तक विधानसभा आहूत है. सात जनवरी को अध्यक्ष की नियुक्ति है. 

इससे पहले तमाम अटकलों और कयासों के बाद भी मंत्रिमंडल में फिलहाल जेएमएम से किसी को शामिल नहीं किया गया है. जबकि कांग्रेस कोटा से दो विधायक-रामेश्वर उरांव और आलमगीर आलम को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. इसके साथ ही राजद के एक मात्र विधायक सत्यानंद भोक्ता को भी मंत्री बनाया गया है. 

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11 मंत्री हो सकते हैं

मंत्रिमंडल में अधिकतम 11 मंत्री शामिल हो सकते हैं. राजद ने एक सीट पर ही चुनाव जीता है. उसे सरकार में हिस्सेदारी मिल गई है.

अब 10 में ही जेएमएम और कांग्रेस के बीच हिस्सेदारी होगी. जेएमएम से स्पीकर हुआ, तो उसके हिस्से पांच या छह मंत्री आ सकते हैं. जबकि कांग्रेस की नजर भी पांच मंत्री बनाने पर है. कांग्रेस पांच से कम पर भी आए, तो उसके कोटा से चार मंत्री बनना तय है. 

जाहिर है जेएमएम को 28 विधायकों के बीच से ही पांच का नाम तय करना है. और यह काम कठिन भी है. इसलिए कि सिर्फ मंत्री चुनने की चुनौती नहीं है. समीकरण साधने और दिग्गजों को संतुष्ट करने और इंटैक्ट रखने की भी चुनौती है. इधर विधायकों में भी बेचैनी कम नहीं है. और सभी वक्त का इंतजार कर रहे हैं. 

अंदरखाने जो कुछ चल रहा है, उसमें जेएमएम के कई विधायकों को बोर्ड-निगम में जगह दी जाएगी, ताकि असंतोष नहीं उपजे. 

दर्जन भर दिग्गज 

कील और कांटे को देखते हुए ही अभी हेमंत सोरेन कोई पत्ते नहीं खोल रहे. लेकिन तारीख और समकीरण साफ बताते हैं कि विधानसभा मे विश्वासमत प्राप्त कर लेने के बाद ही हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहेंगे. जेएमएम में दर्जन भर दिग्गज चुनाव जीते हैं. और सबकी नजर मंत्री पद है. कुछ नए चेहरे भी उम्मीदें लगाए बैठे हैं. हेमंत भी चाहते हैं कि युवाओं को काम करने के मौके दिए जाएं. कई विधायक गुरुजी का आशीर्वाद पाने में लगे हैं. उन्हें पता है कि फैसले में गुरुजी की भी बात सुनी जाएगी. 

कहां है मुश्किलें 

जेएमएम ने इल बार कोल्हान की 14 में से 11 सीटों पर चुनाव जीता है. दो सीटों पर कांग्रेस और जमशेदपुर पूर्वी में निर्दलीय के तौर पर सरयू राय की जीत हुई है. कोल्हान से ही चंपई सोरेन, दीपक बिरूआ, जोबा माझी, दशरथ गागराई, निरल पूर्ति मंत्री बनने की आस में हैं. 

चंपई सोरेन सरायकेला से पांच बार चुनाव जीते हैं. हेमंत सोरेन की सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं. जोबा मांझी भी  पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं. एकीकृत बिहार में और झारखंड की सरकार में मंत्री रही हैं. उनकी नजर भी मंत्री पद पर है. 

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दीपक बिरूआ तीन बार चाईबासा से लगातार चुनाव जीते हैं. चाईबासा में बीजेपी की दीवार को हिलाने में उनकी दमदारी उभरी है. जानकार बताते हैं कि इस बार मंत्रिमंडल में दीपक की दावेदारी मजबूत हो सकती है.

इसी तरह मझगांव और खरसावां से फिर चुनाव जीते निरल पूर्ति और दशरथ गगराई की भी नजर मंत्रिमंडल पर है 

दशरथ गागराई ने 2014 में अर्जुन मुंडा को हराया था और इस बार भी बीजेपी को शिकस्त देमें सफल रहे हैं. उधर विशुनपुर से चमरा लिंडा भी तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. तमाड़ से विकास मुंडा दूसरी बार चुनाव जीत कर आए हैं. विकास ने आजसू में दरक लगाई है. युवा भी हैं. आगे फैसला हेमंत सोरेन को लेना है. 

संताल और कोयलांचल की दमदारी

उधर संताल परगना में स्टीफन मरांडी, नलिन सोरेन, हाजी हुसैन अंसारी और लोबिन हेंब्रम सरीखे दिग्गज चुनाव जीते हैं. इससे पहले ये चारों मंत्री भी रह चुके हैं. स्टीफन अगर स्पीकर बनाए गए, तो संताल से अधिकतम और दो लोग मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसलिए कि हेमंत को इस बार क्षेत्रवार तथा जातीय समीकरणों का ख्याल रखने की चुनौती है. 

नलिन सोरेन सात बार शिकारीपाड़ा से लगातार चुनाव जीतने वालों में शामिल हो गए हैं. स्टीफन मरांडी का राजनीतिक अनुभव और प्रोफाइल बड़ा है. वे पहले वित्त मंत्री रहे हैं. विधायी कार्यों के जानकार है. दुमका और महेशपुर से अब तक सात बार वे भी जीत चुके हैं. 

हाजी हुसैन अंसारी अब तक पांच चुनाव जीत चुके हैं. पहले मंत्री थे. जेएमएम में मुस्लिम नेता का बड़ा चेहरा हैं. 

इधर मुस्लिम वर्ग से एक और बड़े नेता सरफराज अहमद जेएमएम में शामिल हैं. कांग्रेस में लंबी राजनीति करने और पहले भी सांसद, विधायक का चुनाव जीतने वाले सरफराज अहमद इस बार जेएमएम से गांडेय सीट पर चुनाव जीते हैं. 

उधर जामा में सीता सोरेन तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं और वो भी दुर्गा सोरेन की राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं. महिला कोटा से वे भी मंत्री बनने की प्रबल दावेदार हो सकती हैं.

गुंजाइश इसकी भी कि परिवारवाद की बात नहीं उठे इससे बचने के लिए हेमंत, सीता सोरेन को किसी और जगह एडजस्ट करें. 

इधर कोयलांचल में जगरनाथ महतो डुमरी से लगातार चार बार चुनाव जीते हैं. टुंडी में मथुरा महतो ने बीजेपी और आजसू को पछाड़ कर चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. 

इससे पहले मथुरा महतो मंत्री रह चुके हैं और वे शिबू सोरेन के विश्वासी माने जाते हैं. जबकि नए चेहरे में इचागढ़ से सविता महतो चुनाव जीती हैं. कुर्मी से किसी एक को मंत्री बनाया जाएगा, इसकी संभावना प्रबल है. तब तीन में से एक को चुनना भी बेहद कठिन होगा. 


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