लॉकडाउन में किसानों की क्या मदद की गई और कर्जमाफी से क्यों मुंह मोड़ रही सरकारः सुदेश

लॉकडाउन में किसानों की क्या मदद की गई और कर्जमाफी से क्यों मुंह मोड़ रही सरकारः सुदेश
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पीबी ब्यूरो ,   May 24, 2020

आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और विधायक दल के नेता सुदेश कुमार महतो ने लॉकडाउन संकट में किसानों की दयनीय हालत पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार की योजनाएं और तैयारियों पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने कहा है कि श्वेत पत्र जारी कर सरकार राज्य को बताए कि लॉकडाउन के 50 दिन गुजर गए और उसने किसानों की किस मोर्चे पर कितनी मदद की है. 

इसके साथ ही आजसू अध्यक्ष ने कहा है कि किसानों की कर्जमाफी से सरकार मुंह क्यों मोड़ रही है.

जबकि बजट में दो हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है. हालांकि यह प्रावधान कर्ज की तुलना में बेहद कम है. इसके बाद भी दो हजार करोड़ रुपए माफ कर देते, तो किसान दबाव से थोड़ी बहुत बच पाते. 

सुदेश कुमार महतो ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र में 5 मार्च के अलपसूचित प्रश्न के जरिए मैंने किसानों की कर्जमाफी को लेकर सरकार की मंशा के बारे में पूछा था. मेरे सवाल के जवाब में सरकार ने माना था कि राज्य के किसानों पर 7 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. 

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इसके बाद भी बजट में कर्जमाफी को लेकर महज 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. 

उन्होंने कहा कि नई सरकार गठन के पांच महीने होने को हैं और बजट सत्र के ढाई महीने बीत रहे हैं, किसानों की कर्जमाफी को लेकर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए. 

जबकि मार्च महीने में ही किसानों समेत पूरे राज्य को लॉकडाउन का सामना करना पड़ा है. 

आजसू अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के वक्त सत्तरूढ़ दलों ने खुद को किसानों और मजदूरों का सबसे बड़ा हिमायती बताया था. 

लॉकडाउन में राज्य के कई इलाकों में किसानों की खेतों में सब्जियां और फल की पैदावार अच्छी हुई, लेकिन खरीदार नहीं मिलने की वजह से वे आंसू पीकर रहने को विवश हैं. हाट- बाजार बंद हैं. 

सरकार की वेजफेड योजना टांय-टांय पिस्स है. किसानों ने बड़े पैमाने पर धान बेचे हैं, तो लैंपस और सहकारी समितियों से समय पर पैसे के भुगतान नहीं किए जा रहे हैं.

खेती को आगे बढ़ाने और घर- परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए किसानों के खाते में तत्काल पैसे भेजे की जरूरत थी. पूर्व सरकार की वह योजना भी बंद कर दी गई. 

सच यह है कि लॉकडाउन के संकट से निपटने के लिए सरकार के पास न कोई तात्कालिक और न ही कोई दूरगामी ब्लूप्रिंट है.


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