क्यों रांची का रेड जोन से बाहर निकलना फिलहाल आसान नहीं?

 क्यों रांची का रेड जोन से बाहर निकलना फिलहाल आसान नहीं?
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पीबी ब्यूरो ,   May 04, 2020

कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर राजधानी रांची पर पूरे राज्य की नजरें टिकी है. देश के 130 रेड जोन जिलों में रांची शामिल है. यहां अब भी 68 कोरोना के मरीजों का इलाज जारी है. 

जबकि झारखंड के 24 जिलों में कोरोना को लेकर रांची की तस्वीर अब भी डरावनी है. इससे पहले बोकारो भी रेड जोन में शामिल था, जो बाहर निकलकर ऑरेंज जोन में शामिल हो गया है. 

पूछा जा सकता है कि संक्रमण से बाहर निकलने की तमाम जद्दोजहद और कोशिशों के बीच रांची रेड जोन से कब तक बाहर निकल सकता है. इस सवाल का जवाब फिलहाल मुश्किल है. 

वैसे स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पहले ही कह चुके हैं कि रांची को संक्रमण के दायरे से बचाने और बाहर निकालने की तमाम कोशिशें जारी है. 

रांची में अभी 68 मामले 

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रांची में अभी 68 कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज रिम्स और गांधीनगर स्थित कोविड वार्ड में चल रहा है. 13 लोग स्वस्थ होकर अस्पताल से निकल चुके हैं.

यानी रांची में कोरोना के कुल 83 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें कम से कम 55 से ज्यादा हॉट स्पॉट हिंदपीढ़ी से हैं.

पखवाड़े भर से हिंदपीढ़ी को सील रखा गया है. हिंदपीढ़ी की वजह से ही चार नर्सें और एक पुलिस अधिकारी, एक एबुलेंस ड्राइवर कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. हिंदपीढ़ी में लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं हो, इसके लिए सीआरपीएफ की तैनाती की गई है. 

दो दिनों पहले स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने मुख्यमंत्री को बताया है कि कोरोना संक्रमण को लेकर राज्य में हिंदपीढ़ी समेत 34 कंटेनमेंट जोन चिन्हित किए गए हैं.

इसके अलावा रांची अभी रेड जोन, 10 जिले ऑरेंज जोन और बाकी 13 जिले ग्रीन जोन में हैं. फिलहाल 800 से 900 सैंपलों के टेस्ट हर दिन किए जा रहे हैं. 

इधर रांची स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स के माईक्रो बॉयोलॉजी विभाग को 4 दिन के लिए दो मई से बंद कर दिया गया है. माईक्रो बॉयोलॉजी विभाग में एक लैब टेक्नेशियन के संक्रमित मिलने के बाद आईसीएमआर के निर्देश के तहत यह कदम उठाया गया है.

रांची से ही शुरुआत हुई

झारखंड में रांची ही पहली जगह है, जहां कोरोना संक्रमण का मामला सामने आया था. हिंदपीढ़ी में ठौर लिए तबलीगी जमात का हिस्सा रही मलेशियाई महिला में कोराना का संक्रमण पाया गया था. हिंदपीढ़ी से इस महिला के साथ 17 विदेशियों को बाहर निकाला गया था. 

अब यह विदेशी महिला कोरोना से स्वस्थ हो गई है. खेलगांव स्थित क्वारंटाइन सेंटर में उसे रखा गया है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कह चुके हैं कि हिंदपीढ़ी के लोगों ने राज्य के दूसरे जगहों में भी संक्रमण फैलाया. लिहाजा हिंदपीढ़ी में सख्ती बढ़ाई गई है. 

जबकि प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी के आला नेता बाबूलाल मरांडी, सीपी सिंह, दीपक प्रकाश हिंदपीढ़ी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते रहे हैं. बीजेपी का आरोप है कि हिंदपीढ़ी के चलते सरकार ने रांची समेत पूरे राज्य को मुश्किलों में डाला. 

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आधे से अधिक रांची में 

3 मई, रविवार को कोरोना को लेकर जारी झारखंड सरकार की बुलेटिन में बताया गया है कि पूरे राज्य में अब तक कोरोना संक्रमण के 115 मामले सामने आए हैं.

जबकि जांच के लिए 14 हजार 132 सैंपल लिए गए हैं. तीन लोगों की मौत हुई है. जांच की रफ्तार पर गौर करें, तो पूरे राज्य की आबादी का यह आधा प्रतिशत से भी कम है. 

इस बीच थोड़ी राहत की खबर यह रही कि 21 अप्रैल के बाद से 3 मई पहला दिन था जब संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया.

जबकि पूरे राज्य में 27 लोग अस्पतालों से ठीक होकर घरों को लौट चुके हैं. 

उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में 130 जिलों को रेड जोन, 284 को ऑरेंज जोन और 319 को ग्रीन जोन घोषित किया है. ग्रीन और ऑरेंज जोन में कई महत्वपूर्ण छूट दी गई है. 

हालांकि झारखंड सरकार ने लॉकडाउन-3 (4 से 17 मई) के बीच केंद्र सरकार द्वारा दी गई छूट को लागू करने से मना कर दिया है. 

कैसे जा सकता है ग्रीन जोन में 

ग्रीन जोन में उन जिलों को शामिल किया जाता है जहां कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है. जबकि ऑरेंज जोन मे वे जिले शामिल हैं, जहां कोरोना के मामले एक्टिव हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीज ठीक हो गए. इसके बाद 21दिन कोई केस नहीं मिला तो जिला ग्रीन जोन में जाएगा.

जाहिर है रांची को ऑरेंज और ग्रीन जोन में जाने के लिए अभी वक्त लग सकता है क्योंकि यहां 68 मरीजों का इलाज अभी जारी है. 

ग्रीन और आरेंज जिलों की श्रेणी में शामिल होने के लिए शर्ते और प्रक्रियाओं पर गौर करें, तो वक्त लंबा लग सकता है. 

हिंदपीढ़ी में स्क्रीनिंग जारी

इन सबके बीच अभी यह गारंटी लेने की स्थिति में सरकारी महकमा नहीं है कि हिंदपीढ़ी या रांची के किसी दूसरे इलाके से कोरोना के मामले सामने नहीं आएंगे. 2 मई को भी हिंदपीढ़ी से दो मामले सामने आ चुके हैं. 

इधर जिला प्रशासन ने अब हिंदपीढ़ी में डोर टू डोर स्क्रीनिंग शुरू कराई है. यह काम 35 टीमें संभाल रही हैं. 

लगातार तीन दिनों से कंटेनमेंट जोन हिंदपीढी में मेडिकल स्क्रीनिंग का काम जारी है. उपायुक्त महिमापत रे का कहना है कि हिंदपीढ़ी के ग्वालटोली, नूर नगर, मुजाहिद नगर, तीसरी गली, बांस पुल और निजाम नगर में स्क्रीनिंग का काम चल रहा है.

मेडिकल टीम में डॉक्टर, एएनएम एवं सहिया हैं जो घर-घर जा कर लोगों से कोरोना के लक्षणों के बारे में पूछ ताछ कर रही हैं. साथ ही इंफ्रारेड थर्मल स्कैनर से बॉडी टेम्प्रेचर भी मापा जा रहा है. 

इसके अलावा एक टीम को खेल गांव में मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए रवाना किया गया है जो क्वारंटाइन सेंटर में मेडिकल स्क्रीनिंग का काम कर रही है.

मेडिकल स्क्रीनिंग के कार्य का नेतृत्व रांची के उप विकास आयुक्त अनन्य मित्तल कर रहे हैं.


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