भूख से मौत पर रघुवर दास ने क्यों कहा, 'सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं'

भूख से मौत पर रघुवर दास ने क्यों कहा, 'सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं'
Publicbol (File Photo)
पीबी ब्यूरो ,   Mar 07, 2020

झारखंड विधानसभा में हेमंत सोरेन की सरकार ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि पिछले पांच साल में राज्य में भूख और कुपोषण से किसी की मौत नहीं हुई है. सरकार के इसी जवाब पर राज्य के पूर्व रघुवर दास ने कहा है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. 

दरअसल रघुवर दास के कार्यकाल में भूख से होने वाली मौतों को लेकर जेएमएम- कांग्रेस ने सरकार के नाक में दम करके रख दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स और जन संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक पांच साल में झारखंड में कम से कम डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हुई है. 

अलबत्ता सिमडेगा में एक 11 साल की बच्ची संतोषी की मौत का मामला देश भर में सुर्खियों में आया था. तब संतोषी भात-भात कहते मर गई थी. इन मौतों को लेकर भोजन के अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर भी झारखंड में सरकार की किरकिरी होती रही. 

हालांकि तब भी राज्य से लेकर केंद्र तक की सरकार ने झारखंड में भूख से किसी की मौत को मानने से इंकार किया था. 

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इधर पिछले साल नवंबर- दिसंबर में हुए चुनाव के बाद हेमंत सोरेन ने सत्ता की बागडोर संभाली है. जेएमएम- कांग्रेस- राजद गठबंधन को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ और बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई. 

इस बीच झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 28 फरवरी से शुरू हुआ है. यह 28 मार्च तक चलेगा. 

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बगोदर से भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ने विधानसभा में 5 मार्च को सवाल पूछा था कि क्या पांच साल में झारखंड में भूख और कुपोषण से एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. अगर हां, तो सरकार राशन वितरण में सुधार के साथ मरने वाले के आश्रितों को मुआवजा देगी. 

सरकार ने इसी सवाल के जवाब में स्पष्ट कहा है कि भूख से किसी की मौत नहीं हुई है और खाद्य सुरक्षा कानून का लाभ झारखंड में 2 करोड़ 63 लाख 39 हजार लोगों को जोड़ा गया है.   

हालांकि सरकार के इस जवाब के ठीक दूसरे दिन बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के शंकरडीह भूखल घासी की मौत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. भूखल घासी बीमार चल रहे थे और घर के अकेले कमाऊ थे. बीमार होने की वजह से काम नहीं कर पा रहे थे. आर्थिक तंगी में उनकी मौत हो गई. जबकि उनकी पत्नी रेखा देवी ने बताया है कि घर में अनाज का एक दाना तक नहीं था और चूल्हे तक नहीं जले थे. 

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इधर विधानसभा में माले विधायक के सवाल पर सरकार के जवाब के बाद बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है, जब हेमंत सोरेन विपक्ष में थे, तब हेमंत सोरेन पूरी दुनिया को झूठ बोलकर बताते रहे कि झारखंड मे भूख से लगातार मौतें हो रही है. आज वही सत्ता में आते बता रहे हैं कि किसी की मौत नहीं हुई है. 

इधर माले विधायक विनोद सिंह कहते हैं कि चुनावी वादे, घोषणा, शोर का सच सामने आने लगा है. विनोद सिंह कहते हैं कि स्थानीय नीति बदलने पर सबसे ज्यादा जोर जेएमएम का रहा है, लेकिन विधानसभा में सरकार का जवाब आया कि इसमें संशोधन की कोई मंशा नहीं है. 

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भूख से मौत पर भी सरकार ने यू टर्न ले लिया. इसी तरह आरक्षण के मसले पर सरकार ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है. उन्होंने कहा कि सरकार की इस मंशा पर वे सवाल खड़े करते रहेंगे. 

विनोद सिंह कहते हैं कि पिछली सरकार के जिन काम को गलत बताकर वर्तमान सरकार में शामिल दल जनता के बीच जाती रही, अब वही पहले के काम को जायज बता रहे हैं. 

भूख से मौतों पर और कुपोषण पर वर्तमान त्तारूढ़ दलों ने पिछले पांच साल के दौरान सरकार को कढघरे में खड़े रहते रहे और अब नौकरशाही जो कह रही है उसे सही मान रहे हैं. 


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