सिदो-कान्हू के वंशजों में गम और गुस्से का सबब क्या है और क्यों हूल दिवस मनाना नहीं चाहते

सिदो-कान्हू के वंशजों में गम और गुस्से का सबब क्या है और क्यों हूल दिवस मनाना नहीं चाहते
Publicbol (भोगनाडीह में मूर्ति के सामने धरना पर बैठे सिदो- कान्हू के वशंज)
पीबी ब्यूरो ,   Jun 26, 2020

झारखंड में हूल विद्रोह के महानायक सिदो-कान्हू के वंशज गम और गुस्से में हैं. उन्होंने इस बार भोगनाडीह में हूल दिवस नहीं मनाने का एलान किया है. साथ ही राजनीति दलों तथा संगठनों से कहा है कि वे सिदो-कान्हू की मूर्ति पर माल्यार्पण करने नहीं आएं. 

गुरुवार को छठी पीढ़ी के वशंजों ने मंडल मुर्मू की अगुवाई में सिदो-कान्हू की प्रतिमा के पास धरना दिया. इससे पहले बुधवार को अपने समाज के लोगों के साथ गांव में अपात बैठक की गई थी. 

मंडल मुर्मू कहते है, ''पिछले 12 जून को हमारे एक परिजन रमेशर मुर्मू की हत्या को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से हमलोग संतुष्ट नहीं है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में पुलिस ने बताया है कि ज्यादा अल्कोहल सेवन से रमेशर मुर्मू की मौत हुई. यह रिपोर्ट राजनीतिक साजिश का हिस्सा है. जबकि रमेशर मुर्मू की हत्या की गई है. परिजनों का जोर है कि इस मामले में सीबीआई जांच हो और पीड़ित परिवार को न्याय के साथ मुआवजा मिले''. 

रमेशर मुर्मू की पत्नी कापरो किस्कू कहती हैं, ''परिवार और समाज के लोगों ने तय किया है कि इस बार हूल दिवस नहीं मनाएंगे. मेरे पति को क्यों मारा गया, पहले इसका इंसाफ चाहिए''. 

मंडल मुर्मू ने वंशजों को सुरक्षा नहीं देने तथा इस हत्याकांड की सक्रियतापूर्वक जांच नहीं करने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पुलिस इसे बेवजह संदिग्ध मौत बता रही है जबकि हमारे परजिन की हत्या की गई है. 

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वहीं, इस मामले में थाना प्रभारी एचके पाठक का कहना है कि पुलिस मामले की निष्पक्षता से जांच में जुटी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से परिजनों को अवगत कराया गया है. 

गौरतलब है कि हूल दिवस 30 जून को मनाया जाता है. झारखंड में यह दिन गर्व का होता है. पूरे राज्य में सिदो- कान्हू को शिद्दत से याद किया जाता है.

साहिबगंज जिले के भोगनाडीह में गर्व और उत्साह का अलग ही नजारा होता है. लेकिन हूल दिवस की तारीख बिल्कुल नजदीक आने के साथ ही शहीदों के गांव-परिवार में इन दिनों उथल-पुथल है.

यह जगह झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बरहेट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है. हेमंत इस सीट से लगातार दो बार चुनाव जीते हैं. 

उधर गुरुवार को प्रतिमा स्थल पर धरना देने में मंडल मुर्मू, भागवत मुर्मू, रूपचांद मुर्मू, मृतक की मां बाहा टुडू, पत्नी कापरो किस्कू समेत कई लोग शामिल थे.

आरोपी का सरेंडर 

इस बीच रमेशर मुर्मू की कथित हत्या के मामले में आरोपी सद्दाम अंसारी ने 23 जून को कोर्ट में सरेंडर किया है. बरहेट पुलिस उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में जुटी है.

इससे पहले रमेशर मुर्मू की पत्नी कपरो किस्कू के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.

उन्होंने आवेदन में बताया है कि सद्दाम अंसारी द्वारा एक आदिवासी युवती पर अश्लील फब्तियां कसे जाने पर रमेशर मु्र्मू ने विरोध किया था. सद्दाम अंसारी ने जान से मारने की धमकी दी थी. उसी रात रमेश्र मुर्मू की संदिग्ध परिस्थितियों ंमें मौत हो गई. 

रमेशर मुर्मू की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में होने और परिजनों के आरोपों की वजह से जांच पर पुलिस के आला अधिकारी सीधी नजर बनाए हुए हैं. 

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आदिवासी छात्रों ने मोर्चा खोला 

उधर एसपी कॉलेज दुमका के आदिवासी छात्र नेताओं ने सिदो-कान्हू के वंशजों द्वारा हूल दिवस नहीं मनाने का निर्णय का ल्वागत किया है.

गुरुवार को कॉलेज परिसर में हॉस्टल के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. इससे पहले छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र जिला प्रशासन को सौंपा है. 

छात्र नेता श्यामदेव हेंब्रम ने कहा है कि पहले पीड़ित परिवार को न्याय दो बाद में सम्मान दो. पोस्टमार्टम रिपोर्ट साजिश के तौर पर तैयार किया गया है इसलिए सीबीआई जांच जरूरी है.

जोसेफ बास्की का कहना है कि 12 जून को हत्या की गई और 11 दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई. जाहिर है यह रिपोर्ट संदेह पैदा करती है.

गूंज रांची तक

इसी मामले में पूर्व मंत्री और दुमका की पूर्व विधायक लुइस मरांडी धरना पर बैठीं. इससे पहले उन्होंने भोगनाडीह जाकर रमेशर मुर्मू के परिजनों से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली. इधर बीजेपी ने इस मामले में अलग से जांच कमेटी गठित की है. 

इस जांच कमेटी में शामिल सांसद समीर उरांव, सुनील सोरेन, लुइस मरांडी, डॉ अरूण उरांव, पूर्व मंत्री हेमला मुर्मू, रामकुमार पाहन, शिवशंकर उरांव, गंगोत्री कुजूर अशोक बड़ाइक और बिंदेश्वर उरांव घटना की तथ्यात्मक जानकारी जुटाने और पीड़ित परिवार के लोगों से मिलने भोगनाडीह पहुंचे हैं. 

इस बीच आजसू पार्टी ने इस मामले में सीबीआई जंच कराने की मांग की है. पार्टी के प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने कहा है कि यह घटना बेहद संवेदनशील है. सरकार हूल विद्रोह के नायकों के वंशजों की बातों को गंभीरता से ले और इस घटना की जांच सीबीआई से कराई जाए. 


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