वीडियोः रांची में कोरोना पीड़ित युवती की दर्दनाक दास्तां, मोहल्ला ने जीना हराम किया, साहबों' ने कुछ नहीं सुना

वीडियोः रांची में कोरोना पीड़ित युवती की दर्दनाक दास्तां, मोहल्ला ने जीना हराम किया, साहबों' ने कुछ नहीं सुना
पीबी ब्यूरो ,   Sep 15, 2020

झारखंड की राजधानी रांची की एक कोरोना पीड़ित युवती ने फेसबुक लाइव कर अपनी दर्दनाक दास्तां बयां की है. लगभग पंद्रह मिनट के इस वीडियो में युवती ने सिलसिलेवार ढंग से अपनी बेबसी जाहिर की है. 

उन्होंने बताया है कि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद होम आइसोलेशन में रहने की वजह से मोहल्ले के कुछ लोग पूरे परिवार को जान से जान से मारने पर उतारू हैं. और वे मदद की गुहार अफसरों से लगाती रही, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली.

पीड़िता रांची में मोराबादी मस्जिद के पास अपनी मां छोटी बहन और छोटे भाई के साथ रहती हैं. उनके पिता का कुछ साल पहले निधन हो गया है.

इसके साथ ही उन्होंने कहा है, ''जांच और इलाज के नाम पर भी उन्हें सहायता नहीं मिली. जबकि वे रिम्स में भर्ती होना चाहती थी. तब रिम्स से उन्हें कहा गया कि भर्ती नहीं किया जा सकता. आप एसिंप्टोमैटिक हैं''. 

फूट- फूट कर रोई

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इसके साथ ही युवती ने कई सवाल खड़े किए हैं. फेसबुक लाइव के दौरान वे फूट- फूट कर रोते हुए कहती हैं ''क्या कोराना का होना पाप है, जो तमाम सितम सहने पड़ रहे हैं.'' 

इस बीच युवती के फेसबुक लाइव को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान में लिया है. 

उन्होंने रांची के उपायुक्त से जांच करने को कहा है. कोरोना पीड़ित युवती और उसके परिवार को मदद पहुंचाने का निर्देश दिया है.

इधर उपायुक्त ने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री को जानकारी दी है कि आज युवती की फिर से जांच रिम्स में जांच कराई गई है. रिपोर्ट का इंतजार है. साथ ही बरियातू थाना को कार्रवाई करने को कहा गया है. 

भर्ती लेने से मना

पीड़िता बता रही हैं, ''हमें सांस लेने में तकलीफ थी, खाने में स्वाद नहीं मिल रहा था. चार सितंबर को रिम्स में उन्होंने कोविड टेस्ट कराया. छह सितंबर को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई. उन्हें डर लगा, ये क्या हो गया. रिम्स में डॉक्टरों ने हमसे कहा कि घर पर ही रहना होगा. मैंने बताया कि होम आइसोलेशन की कोई व्यवस्था नहीं होने के चलते वो रिम्स में ही एडमिट होना चाहती हैं. इसके बाद डॉक्टर्स ने कहा कि आप यहां नहीं रह सकती. आप एसिंप्टोमैटिक हैं. इसके बाद मैं होम आइसोलेशन में आ गई.'' 

उनका कहना है, ''सात सितंबर को मेरे फोन पर कई कॉल आए. सीओ सर ने किया. बरियातू थाना से भी कॉल आया. अफसरों ने घर में आकर स्टीकर चिपका दिया. साथ ही बैरिकेडिंग कर दिया गया. दूसरे दिन दिन यानी आठ सितंबर को को एक फॉर्म भरने को कहा गया कि आप निजी डॉक्टर के संपर्क में हैं. प्राइवेट से जांच कराना होगा. जबकि रिम्स से कहा गया था कि सारी फैसिलिटी प्रोवाइड कराई जाएगी.'' 

जबरन साइन कराए

आगे उन्होंने कहा है, ''आठ सितंबर को ही मुझसे एक फॉर्म भराया गया जिसमें लिखा गया कि एक निजी डॉक्टर की सलाह पर मैं होम आइसोलेशन में रह रही हूं. लेकिन सच यह है कि मैं किसी भी निजी डॉक्टर के संपर्क में नहीं हूं. जबकि रिम्स से मैंने पूछा था कि मेरा टेस्ट कैसे होगा तो उन्होंने कहा था कि आपको सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी. 11 सितंबर को मेरा टेस्ट होना था, मैंने सीओ को फोन किया तो उन्होंने कहा कि आपका टेस्ट 14 सिंतबर को होगा.''

मोहल्ले का सितम 

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पीड़िता ने आरोप लगाया है, ''मेरे मोहल्ले के कुछ लोग- बबलू अंसारी, महादेव, छोटू लोहरा और राजा लोहरा है. ये सभी सात सिंतबर से ही हमें मारने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि मैं कहीं और से बीमारी लेकर आई हूं और मुझे या फिर मेरे परिवार को जिंदा रहने का कोई हक नहीं है. मुझसे पूरे मोहल्ले में कोरोना फैल जाएगा. जिस दिन मेरे घर की बैरिकेडिंग की गई उस दिन किसी ने नहीं बताया कि आपको जितनी जरूरत की चीजें चाहिए आप ले आईए. मेरी मम्मी हार्ट पेशेंट है. छह महीने पहले उन्हें हार्ट अटैक आया है उनकी दवा चलती है. अगर हमें कोई कुछ मदद करने या देने आता है तो उसे मोहल्ले वाले डराते धमकाते हैं.''

सबको मैसेज, पर कई जवाब नहीं 

फेसबुक लाइव के जरिए वे बता रही हैं, ''मैंने 12 सितंबर को ट्विटर पर डीसी सर छवि रंजन को मैसेज किया, लेकिन उनका कोई रिप्लाई नहीं आया. मैंने सीओ सर से कहा कि वेलोग मारने की धमकी दे रहे हैं, कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैंने सीओ को बताया कि मेरी फैमिली के सभी लोग निगेटिव हो चुके हैं, फिर भी हमें मारने की धमकी दी जा रही है लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया. 13 सितंबर को मेरे घर के बाहर मोहल्ले के लोग आए और पथराव किया,. हम लोग डर गए थे. हमने सोचा कि सुबह सब ठीक हो जाएगा. इसलके बाद सीओ सर से 14 को कहा कि जांच करानी है. उन्होंने कहा कि मोराबादी कैंप में जाकर जांच करा लें. मैंने कहा कि घर का बैरिकेडिंग खुलवा दें क्योंकि मैं खोल कर जाउंगी, तो वेलोग कुछ भी कर सकते हैं. आप बैरिकेडिंग हटवा देंगे तो हम सब्जी, दूध राशन वगैरह ला पाएंगे.सीओ ने कहा कि रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही बैरिकेडिंग हटाया जाएगा''. 

जिसके पास पैसे हैं 

युवती की पीड़ा है, ''काश मैं दिल्ली में होती, वहां होम आइसोलेशन में सारी सुविधाएं हैं. मैं खुद को कोस रही हूं कि आखिर मैं झारखंड में क्यों हूं. यहां की व्यवस्था काफी गंदी है. मोहल्ले के 2000 लोग मेरे घर पर हमें मारने पहुंचे. बीच-बचाव में मेरे भाई-बहन को चोट आई. कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है. युवती ने कहा कि शिबू सोरेन को कोरोना हुआ तो उन्हें कितनी सुविधाएं मिली. कोरोना अगर पैसे वाले को हो तो वो ठीक हो सकता है. उन्हें सभी सुविधा मिलेगी, बेड मिलेगा, हॉस्पिटल मिलेगा. पर आम आदमी के लिए सिर्फ दर्द है.'' 


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