खतरा बड़ा और चुनौतियां सामने हैं, सरकार की तैयारी भी व्यापक होनी चाहिए

खतरा बड़ा और चुनौतियां सामने हैं, सरकार की तैयारी भी व्यापक होनी चाहिए
Photo- Surendra Soren (कोरोना के खतरे के बीच दूसरे राज्यों से लौटे झारखंड के युवा रांची स्टेशन पर )
आनंद कुमार ,   Mar 22, 2020

जिस बड़ी तादाद में खाड़ी के देशों सहित अन्य बाहरी मुल्कों में काम करनेवाले लोग भारत लौट रहे हैं और वहां से अपने शहर-गांव को प्रस्थान कर रहे है, उससे गांव और कस्बों तक बीमारी के प्रसार से इनकार नहीं किया जा सकता. 

इसके अलावा छुट्टी दिए जाने और कामकाजी लोगों की संख्या घटाए जाने के करण दूसरे शहरों से भी विद्यार्थी और कामकाजी लोग अपने शहर, कस्बे और गांव को लौट रहे हैं.

ऐसा देखने को मिल रहा है कि कोई ऐसा व्यक्ति जो बाहर से अपने गांव आता और संयोग या दुर्योग से उसे अगर मामूली सर्दी-खांसी भी है, तो लोग उस घर को घेर ले रहे हैं. उसे गांव से बाहर करने पर उतारू हो रहे हैं.

अभी ऐसी इक्का-दुक्का घटनाएं हुईं हैं, जिन्हें प्रशासनिक, सामाजिक सूझबूझ से संभाल लिया गया, लेकिन बीमारी के फैलाव की स्थिति में इन घटनाओं के भी बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता.

ऐसे में बीमारी से निबटने के अलावा सरकार और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाये रखने की भी चुनौती होगी. दूसरे भारतीय समाज पश्चिमी समाज के विपरीत सामाजिक रूप से आपस में बेहद गूंथा हुआ है.

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परिवारजनों के अलावा कामवाली, नौकर, ड्राइवर, दूधवाला, पेपरवाला, सिक्योरिटी गार्ड, सफाईवाला, दुकानदार आदि से रोज काम पड़ना है. ये लोग कई-कई घरों में काम करते हैं. इनसे बिल्कुल कट कर रहना बड़ा कठिन काम है. ऐसे में साफ;सफाई रखना और जितना संभव हो दूरी बनाए रखना ही विकल्प है.

सरकार गाड़ियों की संख्या कम कर रही है. शहरों को सील भी किया जाएगा. सब सही है, लेकिन कोरोना तो भारत में बाहर से आया. जब चीन में फैला तभी चेत जाना था. चीन से हमारा बड़ा कारोबार है.

गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों को संकट से बचाने की जिम्मेदारी भी सिस्टम पर है. सिस्टम यह काम संवेदनशील होकर ही कर सकता है. सिर्फ ट्वीट और कागजाती आदेशों से आम लोगों को राहत नहीं मिल सकती. 

खतरा बड़ा है इसलिए तैयारी भी व्यापक होनी चाहिए. सरकार पर बड़ी जिम्मेदारी है लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी नागरिकों की है. आवश्यक घर से न निकल कर, भीड़भाड़ न लगाकर, समान के लिए दुकानों में आपाधापी न मचाकर, अफवाहों के प्रसार में भागीदार न बनकर और सरकारी निर्देशों का पालन कर हम एक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकते हैं.

बीमारी से लड़ने में हमारी खुद की भूमिका सबसे ज्यादा अहम है. अपने परिवार, बच्चों, समाज, देश और सबसे पहले आपके खुद के लिए.

(लेखक झारखंड में वरिष्ठ पत्रकार हैं और Publicbol.com की कोरोना से जुड़ी एक रिपोर्ट पर उनकी सीधी प्रतिक्रिया है) 

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