सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के 90 वें जन्मदिन पर विशेषः 'मेरी आवाज ही पहचान है गर याद रहे'

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के 90 वें जन्मदिन पर विशेषः 'मेरी आवाज ही पहचान है गर याद रहे'
Facebook
नवीन शर्मा ,   Sep 28, 2019

आज का दिन का संगीत की दुनिया और खासकर देशवासी के लिए बेहद अहम है. सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के 90 वें जन्म दिन पर उनकी सुर साधना औय गायन में हासिल महारत को शिद्दत से याद किया जा रहा है. 

लता मंगेशकर 28 सितंबर 1929 को इंदौर में मशहूर संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के यहां पैदा हुई थीं. उनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे.

लता मंगेशकर ने विभिन्न भाषाओं में गीत गाए. पिछली पीढ़ी से लेकर नई पीढ़ी लता मंगेशकर की आवाज की कायल रही है. भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" से भी उन्हें नवाजा गया है. 
 
1947 में देश को दो बेशकीमती उपहार मिले. पहला- देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ और दूसरा- लता मंगेशकर  ने  इसी साल हिंदी फिल्म के लिए अपना पहला गाना रिकॉर्ड कराया जो  ठुमरी था. इसके बोल थे ‘पा लागूं, कर जोरी, श्याम मोसे न खेलो होरी’ . फिल्म- थी आप की सेवा में (1947) इसके संगीतकार दत्ता दवजेकर व गीतकार महिपाल थे. 

इस तरह हमारे देश ऩे 1947 से एक नए सफर की शुरूआत की. इस सफर को सुरमई बनाने में लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली और मनमोहक आवाज से एक ऐतिहासिक भूमिका अदा की है. 


जिम्मेदारी का बोझ 

इसे भी पढ़ें: जेवीएम विधायक प्रदीप को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत

1942 में पिता की असामयिक मौत की वजह से घर में सबसे बड़ी होने के कारण परिवार के पालन पोषण की पूरी जिम्मेदारी महज 13 साल की किशोरी लता के नाजुक कंधों पर आ गई। लता जी ने हार नहीं मानीं और बखूबी घर की जिम्मेदारियों को निभाती चली गईं. 

एक इंटरव्यू में उन्होने कहा था, 'घर के सभी मेंबर्स की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई थी. इस वजह से कई बार शादी का ख़्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी. बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी. बहुत ज़्यादा काम मेरे पास रहता था. साल 1942 में तेरह साल की छोटी उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया था इसलिए परिवार की सारी जिम्मेदारियां मुझपर ऊपर आ गई थीं तो शादी का ख्याल मन से निकाल दिया.''

हिंदी फिल्‍मों में यादगार सफरनामा 

1947 से हिंदी फिल्‍मों में शुरू हुआ लता का अनूठा सफर 1949 तक एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच गया था. यहां ये बात दीगर है कि देश विभाजन के बाद उस समय की सबसे महत्वपूर्ण गायिका नूरजहां पाकिस्तान चलीं गईं थी.

मास्टर गुलाम हैदर की खोज लता ने 1949 में पांच महत्वपूर्ण फिल्‍मों में पार्श्व गायन किया. इनमें महल, बड़ी बहन, लाडली, अंदाज और बरसात। इसके बाद तो लता मंगेशकर ही हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी गायिका बन गईं. फिल्म महल का 'आएगा आनेवाला' गीत आज 70 साल बाद भी शौक से सुना जाता है. लता जी की सुरीली साधना में कई रोचक किस्से भी हैं. 

बेहद अहम किस्से

गीत निर्देशक मदन मोहन अपनी पहली फिल्म आंखें (1948) में लता मंगेशकर से गाना गवाना चाहते थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. यतीन्द्र नाथ मिश्र की किताब ‘लता सुर गाथा’ में लता ने मदन मोहन के साथ अपने रिश्ते की कहानी सुनाते हुए बताया था ''एक बार मदन मोहन लता के घर पहुंचे, उस दिन रक्षाबंधन था. मदन मोहन इस बात से बेहद दुखी थे कि उनकी पहली फिल्म में लता नहीं थीं. फिर वे लता को घर ले गए और कहा- ''आज राखी है ये लो मेरी कलाई पर बांध दो. मदन मोहन ने लता से कहा कि तुम्हें याद है जब हम पहली बार मिले थे तब हमने भाई-बहन का गीत गाया था. आज से तुम मेरी छोटी बहन और मैं तुम्हारा मदन भैया। आज से तुम अपने भाई की हर फिल्म में गाओगी''. 

लता से किया हुआ वादा मदन मोहन के निधन के बाद भी पूरा किया गया। दरअसल जब 2004 में फिल्म वीर-जारा में मदन मोहन के कंपोजीशन का इस्तेमाल किया गया, तब सारे गाने लता मंगेशकर ने ही गाए थे.

इसके पहले 1975 में मदन मोहन के निधन के बाद रिलीज हुईं तकरीबन 6 फिल्मों में उनका संगीत लिया गया. जिसमें से कई में लता मंगेशकर की आवाजें सुनने को मिलीं. 

कभी बेसुरी नहीं होती

यह बात मशहूर गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खां साहब ने लता मंगेशकर के बारे में कही थी. यह लता मंगेशकर के बारे में उस व्यक्ति का विचार है जिनके बारे में लता दी अपनी सबसे बड़ी अभिलाषा बताते हुए कहतीं हैं कि काश मैं उस्ताद बड़े गुलाम अली खां साहब की तरह गा पाती.

इसे भी पढ़ें: ऑक्सीजन जांच की कमी से बच्चों की मौत का मामला: विभागीय जांच में निर्दोष पाए गए डॉ कफील

एक और वाकया सुनिए. एक दिन सुबह खां साहब सुबह में रियाज कर रहे थे, तो लता का गाया यमन राग का गीत ''जा रे  बदरा बैरी जा रे सुना'' तो कहने लगे इस लड़की का यमन तीनों में पड़ा है , मैं अपना यमन भूल गया हूं.

लता मंगेशकर के गायन की शायद ये सबसे बेमिसाल तारीफ है. इसी तरह की बात मशहूर संगीतकार यहूदी मेनुहिन ने करते हुए कहा थी कि काश ! मेरी वायलिन आपकी गायकी की तरह बज सके- ''नाम गुम जाएगा चेहरा से बदल जाएगा''... ये मशहूर गीत गुलजार साहब ने लता मंगेशकर के ध्यान में रख कर लिखा था. 

उनके श्रेष्ठ 30 गीत :

उठाए जा उनके सितम (अंदाज) 

हवा में उड़ता जाए (बरसात) 

आएगा आएगा आएगा आने वाला (महल) 

घर आया मेरा परदेसी (आवारा) 

तुम न जाने किस जहाँ में (सजा) 

ये जिंदगी उसी की है (अनारकली)
 
तेरे बुना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं (आंधी) 

मोहे भूल गए साँवरिया (बैजू बावरा) 

यूँ हसरतों के दाग (अदालत) 

जाएँ तो जाएँ कहाँ (टैक्सी ड्राइवर) 

प्यार हुआ इकरार हुआ (श्री 420) 

रसिक बलमा (चोरी चोरी) 

ऐ मालिक तेरे बंदे हम (दो आँखे बारह हाथ) 

आ लौट के आजा मेरे गीत (रानी रूपमती) 

प्यार किया तो डरना क्या (मुगल ए आजम) 

ओ बसंती पवन पागल (जिस देश में गंगा बहती है) 

दिल तो है दिल, दिल का ऐतबार क्या किजे( मुकद्दर का सिकंदर) 

अल्लाह तेरो नाम (हम दोनों) 

पंख होती तो उड़ आती रे (सेहरा) 

ठारे रहिसो ओ बांके यार (पाकीजा)
 
चलते चलते (पाकीजा) 

सुन साहिबा सुन (राम तेरी गंगा मैली) 

कबूतर जा जा(मैंने प्यार किया) 

मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियाँ है (चाँदनी) 

यारा सीली सली (लेकिन) 

दीदी तेरा देवर दीवाना (हम आपके है कौन) 

मेरे ख्वाबों में जो आए (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे) 

दिल तो पागल है (दिल तो पागल है) 

जिया जले जाँ जले (दिल से) 

हमको हमीं से चुरा लो(मोहब्बतें)

कई अहम पुरस्कार मिले

फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)

राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 और1990)

महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 19671969) और पद्म भूषण1974) 

दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड (1989 ) 

दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1993 )

 फिल्म फेयर का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार (1996 )

स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (1997) राजीव गांधी पुरस्कार (1999 ) 

एन.टी.आर. पुरस्कार 1999 , पद्म विभूषण 1999 

ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (2000) 

आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (2001) 

स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (2001) 
 


(आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

लोकप्रिय

जेडीयू के दफ्तर में सीएम नीतीश से मिले गुप्तेश्वर पांडेय, 'सुशासन' की तारीफ की
जेडीयू के दफ्तर में सीएम नीतीश से मिले गुप्तेश्वर पांडेय, 'सुशासन' की तारीफ की
 मनमोहन सिंह की तरह गहराई वाले प्रधानमंत्री की कमी महसूस कर रहा है भारत: राहुल
मनमोहन सिंह की तरह गहराई वाले प्रधानमंत्री की कमी महसूस कर रहा है भारत: राहुल
पता नहीं, पीएम मोदी देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं, कृषि विधेयक सबसे बड़ा प्रहारः हेमंत सोरेन
पता नहीं, पीएम मोदी देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं, कृषि विधेयक सबसे बड़ा प्रहारः हेमंत सोरेन
गायक एस पी बालासुब्रमण्यम का निधन, मखमली आवाज से प्रशंसकों के दिलों पर दशकों तक राज किए
गायक एस पी बालासुब्रमण्यम का निधन, मखमली आवाज से प्रशंसकों के दिलों पर दशकों तक राज किए
बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बजाः 28 अक्तूबर से तीन चरणों में मतदान, 10 नवंबर को नतीजे
बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बजाः 28 अक्तूबर से तीन चरणों में मतदान, 10 नवंबर को नतीजे
कृषि बिल के विरोध में किसानों का हल्ला बोल, समर्थन में तेजस्वी यादव ट्रैक्टर लेकर उतरे सड़क पर
कृषि बिल के विरोध में किसानों का हल्ला बोल, समर्थन में तेजस्वी यादव ट्रैक्टर लेकर उतरे सड़क पर
पीएम मोदी ने फिटनेस को लेकर कोहली से यो यो टेस्ट के बारे में पूछा, विरोट बोले, बेहद अहम है यह
पीएम मोदी ने फिटनेस को लेकर कोहली से यो यो टेस्ट के बारे में पूछा, विरोट बोले, बेहद अहम है यह
रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी का कोरोना वायरस से निधन, एम्स में ली अंतिम सांस
रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी का कोरोना वायरस से निधन, एम्स में ली अंतिम सांस
पलामू: टीपीसी का जोनल‌ कमांडर गिरेंद्र गंझू गिरफ्तार
पलामू: टीपीसी का जोनल‌ कमांडर गिरेंद्र गंझू गिरफ्तार
टाइम की सूचीः नरेंद्र मोदी दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में, पर तल्ख टिप्पणी भी
टाइम की सूचीः नरेंद्र मोदी दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में, पर तल्ख टिप्पणी भी

Stay Connected

Facebook Google twitter