पंच के पद पर बैठकर परमेश्वर नहीं बन सके स्पीकरः सुबोधकांत सहाय

पंच के पद पर बैठकर परमेश्वर नहीं बन सके स्पीकरः सुबोधकांत सहाय
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पीबी ब्यूरो ,   Feb 20, 2019

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि दल-बदल के मामले में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव का फैसला हैरान करने वाला है. साथ ही किसी भी न्यायिक प्रणाली में 'जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड' माना जाता है. स्पीकर का यह फैसला न सिर्फ विलंब से आया है, बल्कि सर्वविदित तथ्यों के प्रतिकूल भी है. 

कांग्रेस नेता ने इस फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सभी जानते हैं कि ये सभी छह लोग झाविमो के चुनाव चिह्न पर उसके उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और जीते थे. 

गौरतलब है कि बुधवार को दल-बदल के मामले में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने छह विधायकों के पक्ष में फैसला सुनाया है, जो साल 2014 में जेवीएम के टिकट से चुनाव जीतने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे. बीजेपी में शामिल होने वाले में विधायक नवीन जायसवाल, जानकी यादव, रणधीर सिंह, आलोक चैरसिया, गणेश गंझू और अमर बाउरी थे. इनमें रणधीर सिंह और अमर बाउरी सरकार में मंत्री हैं. 

इसके बाद झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने दसवीं अनुसूचि के तहत कार्रवाई की मांग की थी.  

पूर्व केंद्रीय मत्री ने कहा है कि इस फैसले से लाखों वोटर भी आहत हुए हैं जिन्होंने झारखंड विकास मोर्चा और उनके प्रमुख बाबूला मरांडी के प्रति समर्थन के साथ उन उम्मीदवारों को वोट दिए थे. इस फैसला जन प्रतिनिधियों के आचरण और राजनीतिक मर्यादा को भी प्रभावित करेगा. 

इसे भी पढ़ें: परत दर परतः क्या झारखंड में मोदी लहर कायम है और 47 लाख वोटों का रिकॉर्ड बचा पाएगी भाजपा?

सुबोधकांत सहाय ने कहा है, ''भाजपा ने झाविमो के विधायकों को अपने पाले में करने के लिए किस किस्म के प्रलोभन दिए, इसका खुलासा भी हो चुका है. झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के प्रमाण वाला पत्र भी सार्वजनिक किया है. यहां यह अवधारणा रही है कि पंच के पद पर बैठनेवाला परमेश्वर का स्वरूप होता है और उससे इसी के अनुरूप फैसले की उम्मीद की जाती है. क्या यह फैसला इस अवधारणा के अनुरूप है''?

कांग्रेस नेता का कहना है कि गुंजाइश हो कि विधानसभा अध्यक्ष ने अपने फैसले में जिन तथ्यों को आधार बनाया हो वह दलबदलू विधायकों के पक्ष में हो, लेकिन इससे निश्चित रूप से उन मतदाताओं में असंतोष पैदा होगा, जिन्होंने इन छह लोगों को झाविमो के उम्मीदवार के रूप में जिताकर विधानसभा में भेजा था.


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