जब शशांक शेखर भोक्ता बोले, 'थम गया 29 साल का सफर, न जाने हेमंत के मन में क्या है'

जब शशांक शेखर भोक्ता बोले, 'थम गया 29 साल का सफर, न जाने हेमंत के मन में क्या है'
Facebook-Shashank Shekhar Bhokta
पीबी ब्यूरो ,   Nov 26, 2019

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने संताल परगना की सारठ सीट पर टिकट अब तक होल्ड पर रखा है. यहां से जेएमएम के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता टिकट के प्रबवल दावेदार हैं. और वे चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं. लेकिन नेतृत्व का रुख देखते हुए उन्होंने मान लिया है कि अंदरखाने कुछ बातें जरूर चल रही है, जो उन्हें टिकट पाने से रोक रहा है. 

परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है ''मैं झारखंड मुक्ति मोर्चा में हूं और रहूंगा. टिकट और चुनाव मेरे लिए कोई मायने नहीं रखते. हां ये सत्य है कि  जनता की सहायता नहीं कर पाने का मलाल जीवन पर्यन्त रहेगा. 29 साल के सफर के बाद रूकने का गम तो रहेगा ही''.
 
बीते 24 नवंबर को जेएमएम ने 13 उम्मीदवारों की सूची जारी की है. इनमें संताल परगना की 11 सीटों के उ्ममीदवार भी शामिल हैं. लेकिन सारठ होल्ड पर है. इसी पर भोक्ता ने और कई बातों की चर्चा की है. 

उन्होंने कहा है, ''सारठ विधानसभा क्षेत्र को होल्ड पर रखा गया है. यानी इस क्षेत्र के झामुमो टिकट के लिए विशेष विचार-विमर्श की आवश्यकता है. सटीक भाषा में मैं चुनाव समिति की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया. बहुत से लोग सुनहरा मौका जानकर झामुमो के टिकट के लिए दौड़ लगा रहे हैं. लेकिन जनता जानती है कि सारठ विधानसभा क्षेत्र की जरूरत क्या है. 29 सालों से झामुमो में जुड़े रहे. जनता के लिए क्या किया, जनता बेहतर जानती है. सारठ को सामंतवादियो से मुक्ति दिलाना मेरी पहली प्राथमिकता थी. 2000 में सारठ को इससे आजादी मिली. खौफ का साम्राज्य खत्म हुआ, पर, पिंजरे से पंक्षी को आजाद तो करा दिया पर पिंजरे का खौफ उनके दिल से निकाल नहीं पाया. पंछियों के स्वयंभू जातीय ठेकेदारों को अपनी बेरोजगारी का भय था. ये जंतु फिर से पिंजरे की ओर निरीह पंक्षियो को ठेलने का प्रयास कर रहे हैं''.

गौरतलब है कि शशांक शेखर भोक्ता ने 2000 और 2009 में सारठ से चुनाव जीता है. हेमंत सोरेन की सरकार में वे विधानसभा का अध्यक्ष बने थे. शुरू से ही वे जेएमएम में रहे. झारखंड आंदोलन में तीन बार जेल चुके हैं. गुरुजी के सिपसलाहों में एक माने जाते रहे हैं. 

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़ः बहुमत साबित करने से पहले देवेंद्र फडणवीस का इस्तीफा

इस बार बीजेपी ने मौजूदा विधायक रणधीर सिंह को उम्मीदवार बनाया है. जबकि जेवीएम से चुन्ना सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. ये परिस्थितियां क्यों और कैसे बनी , इस सवाल पर वे इस संवाददाता से कहते हैंः सब कुछ तो लिख ही दिया, अब रहने दीजिए. क्षण भर की खामोशी के बाद शशांक बताते हैं, ''पांच दिनों पहले हेमंत सोरेन से मिला था. हमने कहा कि जिस उम्मीदवार का नाम तय करना हैं, जल्दी कर दें. लगातार तैयारियों के बीच कार्यकर्ता और समर्थक संशय में हैं. मैंने हमेशा नीति सिद्धांत की राजनीति की है. हेमंत सोरेन ने भरोसा दिलाया था कि बहुत जल्दी नाम तय कर देंगे. 24 नवंबर को 13 उम्मीदवारों की सूची जारी हुई, लेकिन सारठ को होल्ड पर रखा गया है. इतना तो समझ ही सकता हूं कि कुछ बातें चल रही है. लेकिन आहत इस बात से हूं कि हेमंत सोरेन ने राफ-साफ क्यों नहीं बोल पाए. जबकि उन्हें बताना चाहिए था. शायद वे समझ नहीं पाए कि जेएमएम का झंडा ही मेरे कांधे पर टिकता है.''

शशांक शेखर बेबकी से कहते हैं, ''टिकट होल्ड होते ही मैं आलोचकों के लिए चुटकुला बन गया. अन्य उम्मीदवारों के लिए उम्मीद का किरण बन गया. समर्थन मांगने की होड़ लग गई. स्वाभाविक है. लगता है राजनीति बिना पेंदी की लोटा बनकर रह गई है. राजनीतिक प्रतिबद्धता शब्द अब पुरानी हो चुकी है. येन केन प्रकारेण सत्ता हासिल करना ही मक़सद रह गया है. सरयू राय जैसे दिग्गज नेता का हश्र देख सकते हैं. महाराष्ट्र ताजा उदाहरण है. सारठ में हर पांच साल में लोग पार्टी बदलते हैं. आज की राजनीति यही है. राजनीति में रहना है तो यही करना होगा''.

जेएमएम नेता ने यह भी कहा है कि मन विचलित होता है, निष्ठावान कार्यकर्ताओं के गमगीन चेहरे देखकर, जिन्होंने सामाजिक प्रताडना सह कर भी पार्टी और मेरे लिए जी तोड़ मेहनत की. मैं उनके साथ जीवन पर्यन्त खड़ा रहूंगा. इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से गुजारिश की है कि पार्टी के विरुद्ध किसी किस्म की टिप्पणी नहीं करें.


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