जानें, कितनी मारक है शिबू की सेना और कौन- कौन संभाल रहे

जानें, कितनी मारक है शिबू की सेना और कौन- कौन संभाल रहे
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पीबी ब्यूरो ,   May 14, 2019

झारखंड में सातवें और आखिरी चरण में संताल परगना की तीन सीटों पर 19 मई को वोट डाले जाएंगे. दुमका और राजमहल में बीजेपी और जेएमएम के बीच भारी टसल है. जबकि गोड्डा में भाजपा की लड़ाई जेवीएम के प्रदीप यादव से है. प्रदीप यादव विपक्ष के उम्मीदवार हैं. जाहिर है बरियार बने दिख रहे हैं.

संताल परगना को जेएमएम का गढ़ भी माना जाता है. और बीजेपी इस बार गढ़ पर दरक लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. 

जाहिर है इस चुनाव में जेएमएम के सबसे बड़े रणनीतिकार और विपक्ष का मजबूत चेहरा बनकर उभरे हेमंत सोरेन मुख्य सेनापति की भूमिका निभा रहे हैं. 

चुनाव से ठीक पहले वे संतालपरगना में संघर्ष यात्रा के जरिए रंग जमा चुके हैं. अब यह जानना दिचलचस्प होगा कि इस सेना में और कौन लोग हैं और कितनी मारक है. 

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आखिरी चरण में चुनाव होने की वजह से बीजेपी का बड़ा कुनबा संताल परगना में शिफ्ट कर गया है. प्रधानमंत्री समेत स्टार प्रचारकों के आने की तैयारी है. लिहाजा हेमंत सोरेन की पैनी नजर है. और वे अपने हिसाब से बिसात बिछा रहे हैं. बीजेपी और जेएमएम के लिए दुमका की सीट छीनने- बचाने को लेकर प्रतिष्ठा जुड़ी है. 

शिबू सोरेन खुद दुमका से चुनाव लड़ रहे हैं. और इस बार उन्होंने अपनी मुहिम की रणनीति बदली है. वे बडी़ रैली या सभा के बजाय गांव- गांव जा रहे हैं. 

विधायक 

हेमंत सोरेन की सेना में अगली कतार में राजमहल के मौजूदा सांसद और उम्मीदवार विजय हांसदा के अलावा विधायकों में स्टीफन मरांडी, साइमन मरांडी, नलिन सोरेन, रवींद्र नाथ महतो, सीता सोरन पूर्व विधायकों में शशांक शेखर भोक्ता, अकील अख्तर, हाजी हुसैन अंसारी शामिल हैं. 

स्टीफन मरांडी अभी महेशपुर से विधायक हैं. और दुमका से भी पांच बार चुनाव जीते हैं. जहिर है वे विजय हांसदा और शिबू सोरेन दोनों के लिए मैदान संभाल रहे हैं. लिट्टीपाड़ा से छह बार चुनाव जीते साइमन मरांडी बी विजय हांसदा के लिए मोर्चा संभाल रहे हैं. इधर दुमका लोकसभा क्षेत्र के तीन विधानसभा क्षेत्र शिकारीपाड़ा, जामा और नाला में जेएमएम का कब्जा है. नलिन सोरेन शिकारीपाड़ा सेलगातार पांच बार चुनाव जीते हैं. स्टीफन, साइमन और नलिन को जेएमएम का दिग्गज भी माना जाता है.  

नाला में रवींद्र नाथ महतो भी जमीन से जुड़े हैं. दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन शिबू सोरेन की बहू हैं और जामा भी जेएमएम का गढ़ माना जाता है. दुमका लोकसभा क्षेत्र के जामताड़ा में कांग्रेस का कब्जा है और कांग्रेस के विधायक इऱफान अंसारी भी हेमंत सोरेन के साथ हो चले हैं. 

कोल्हान से 

अब कोल्हान से चंपई सोरेन, कुणाल षाड़ंगी, दशरथ गागराई, रामदास सोरेन सरीखे नेता संताल परगना पहुंचने वाले हैं. इन नेताओं का कहना है कि जब उनके गुरुजी (शिबू सोरेन) मैदान में हों तो बस एक इशारा ही काफी होता है. 

शशांक, लोबिन, हाजी

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उधर सारठ में जेएमएम के पूर्व विधायक शशांक शेखर भोक्ता को बीजेपी के विधायक और सरकार के मंत्री रणधीर सिंह और मधुपुर में हाजी हुसैन इंसारी को बीजेपी सरकार के मंत्री राज पालिवार को पीछे छोड़ने की चुनौती है. बोरियो में लोबिन हेंब्रम को इस बार दमखम दिखाना है. 2014 का चुनाव वे बीजेपी से हार गए थे. 

सारठ विधानसभा दुमका में पड़ता है. जबकि मधुपुर गोड्डा में. हाजी हुसैन अंसारी, कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और पूर्व विधायक अकील अख्तर भी जेएमएम की सेना की अगली कतार में हैं. जरमुंडी से कांग्रेस के विधायक बादल पत्रलेख भी विपक्ष की मुहिम में शामिल हैं. 

संगठन 

इनके अलवा संगठन से जुड़े केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य, संतालपरगना के संयोजक और शिबू सोरेन के अति नजदीकी विजय सिंह, विवेक, बसंत सोरेन, दुमका जिला अध्यक्ष सुभाष मंडल, श्याम यादव, शिबा बास्की, पंकज मिश्रा, केताबुद्दीन शेख, अशोक मंडल, श्याम यादव, सुभाष सिंह, श्याम हेंब्रम सरीखे नेता चुनावी मोर्चा संभाल रहे हैं. हालांकि श्याम हेंब्रम को हाल ही गिरफ्तार किया गया है. लेकिन उनके समर्थक मैदान में डटे हैं. 

विपक्षी दल

संताल परगना में ही विपक्षी दलों की सेना में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर, सुबोधकांत सहाय, सुखदेव भगत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार, जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी, राजद के पूर्व विधायक संजय कुमार यादव, सुरेश पासवान, गौतम सागर राणा, बंधु तिर्की सरीखे नेताओं के जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. इनमें सबसे असरदार बाबूलाल मरांडी को माना जा रहा है. वे गोड्डा के अलावा दुमका में भी शिबू सोरेन के काम आएंगे. बाबूलाल मरांडी दुमका से चुनाव जीत चुके हैं और शुरुआती दौर में यह क्षेत्र उनकी कर्मस्थली रही है.   


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