बीजेपी छोड़ जेएमएम में शामिल हुए समीर मोहंती, क्या बहरागोड़ा में कुणाल षाड़ंगी की नींद उड़ाएंगे

बीजेपी छोड़ जेएमएम में शामिल हुए समीर मोहंती, क्या बहरागोड़ा में कुणाल षाड़ंगी की नींद उड़ाएंगे
Publicbol (बाएं से दूसरे जेएमएम का पट्टा पहने हैं समीर मोहंती)
पीबी ब्यूरो ,   Nov 06, 2019

झारखंड में सिंहभूम की राजनीति में सक्रिय और बहरागोड़ा विधामसभा से चुनाव लड़ते रहे समीर मोहंती आज बीजेपी छोड़कर जेएमएम में शामिल हो गए. जेएमएम के नेता हेमंत सोरेन और चंपई सोरेन ने पार्टी का पट्टा पहनाकर समीर का स्वागत किया. समीर बड़ी तादाद में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ रांची पहुंचे थे. 

समीर मोहंती के जेएमएम में शामिल होने के साथ यह लगभग तय है कि पार्टी उन्हें बहरागोड़ा से चुनाव लड़ाएगी. समीर और जेएमएम दोनों इसे घर वापसी भी बता रहे हैं. दरअसल  मोहंती पहले जेएमएम में ही थे. 

जेएमेम में शामिल होने के साथ ही समीर ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है, ''उन्हें महलों में रहने की आदत थी, तो उन्हें महल मुबारक, हमारे हिस्से की झोपड़ी हमें सुकून देती है''. 

हाल ही में बहरागोड़ा से जेएमएम के विधायक कुणाल षाड़ंगी के बीजेपी में शामिल होने के बाद से जेएमएम और समीर की नजरें एक दूसरे पर जा टिकी थी. जेएमएम में शामिल होने से पहले समीर ने अपने समर्थकों तथा पुराने कार्यकर्ताओं के साथ पूरे क्षेत्र में घूमकर रायशुमारी भी की. 

वैसे 2014 का चुनाव वे जेवीएम के टिकट से लड़े थे. और तीसरे नबंर पर थे. बीजेपी के दिनेशानंद गोस्वामी दूसरे नंबर पर थे जबकि समीर बहुत मामूली अंतर से बीजेपी उम्मीदवार के पीछे थे. माना जाता है कि मोहंती अपने प्रभाव से ही 42 हजार से अधिक वोट हासिल कर सके थे. 

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समीर मोहंती बीजेपी के सांसद विद्युवरण महतो के भी करीबी रहे हैं. विद्युतवरण चाहते थे कि समीर को इस बार बीजेपी से बहरागोड़ा का टिकट मिले. इससे पहले कुणाल षाड़ंगी के पाला बदल से तस्वीरें बदलने लगी.

खबरों के मुताबिक समीर ने विद्युतवरण को भी दिल की बात बता दी कि वे अब पुराने घर लौटना चाहते हैं. इसलिए कि वे चुनाव की तैयारी में जुटे थे. और जब तारीख नजदीक आई, तो उम्मीदवारी बदलने लगी. 

बहारोगड़ा में विद्युवरतण महतो की जमीनी पैठ रही है. वे बहरागोड़ा से जेएमएम के विधायक भी रहे हैं. 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले जब विद्युतवरण बीजेपी में शामिल हुए, तो जेएमएम ने कुणाल पर दांव खेला.

और अब कुणाल के पलटी मारने से जेएमएम को जमीन से जुड़ा उसका पुराना सिपाही मिल गया है. लिहाजा समीर मोहंती के आने से वोटों के समीकरण सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं, इससे इंकार नहीं किया जा रहा. 

वैसे भी कुणाल के बीजेपी में जाने के बाद से जेएमएम ने बहरागोड़ा की सीट को प्रतिष्ठा से जोड़ रखा है. समीर वोटों के हर समीकरण को साधने में जुटे हैं.

कुणाल के पक्ष में एक समीकरण यह जरूर बनता है कि उनके पिता डॉ दिनेश षाड़ंगी बीजेपी से विधायक रहे हैं. और झारखंड सरकार में वे मंत्री भी थे. सामाजिक तौर पर उनकी खासी प्रतिष्ठा रही है. साथ ही रघुवर दास की रणनीति के तहत ही कुणाल बीजेपी में शामिल हुए हैं.

लोकसभा चुनाव में भी बहरागोड़ा  से बीजेपी को रिकॉर्ड वोट मिले. जबकि कुणाल ने जेएमएम उम्मीदवार चंपई सोरेन के लिए खूब मेहनत की. इसके बाद से ही कुणाल की नजदीकी बीजेपी से बढ़ने लगी थी. 

अब कुणाल षाड़ंगी बीजेपी के सभी तारों को जोड़ने में जुटे हैं और कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच रहे हैं. बहरागोड़ा सीट को लेकर ही बीजेपी और जेएमएम के बीच सोशल साइट पर भी जंग छिडी है. 

जेएमएम समर्थक कुणाल को एक्सपोज करने में जुटे हैं जबकि कुणाल अपनी कुशलता साबित करने में वक्त बिल्कुल गंवा नहीं रहे. 

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय कहते हैं कि बहरागोड़ा जेएमएम की सीट थी और रहेगी. अब कुणाल अपना घर संभालें, जेएमएम चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. पार्टी जिसे भी मैदान में उतारेगी, वह जीतेगा. समीर मोहंती जेएमएम के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं. उनके घर लौटने से कार्यकर्ताओं में उत्साह है. 

 

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