रांची विश्वविद्यालयः अनुबंध सहायक प्राध्यापकों को 15 महीने से मानदेय नहीं, संकट में जिंदगी

रांची विश्वविद्यालयः अनुबंध सहायक प्राध्यापकों को 15 महीने से मानदेय नहीं, संकट में जिंदगी
पीबी ब्यूरो ,   Jun 25, 2020

रांची विश्वविद्यालय में अनुबंध पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों को पिछले 15 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है. इस वजह से उनकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई है. 

इन शिक्षकों की चिंता है कि कुलाधिपति सह राज्यपाल के आदेश के दो माह गुजर जाने के बावजूद कई स्नातकोत्तर विभागों एवं कालेजों में नियुक्त अनुबंध सहायक प्राध्यापकों को मानदेय राशि का भुगतान नहीं किया गया है. 

प्राध्यापकों ने राज्यपाल की बातों का विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा न मानना राज्यपाल की बातों का अवहेलना बताया है.  जबकि इस संबंध में संघ द्वारा लगातार मुख्यमंत्री, संबंधित विभाग एवं अन्य मंत्रियों- विधायकों को लिखित आवेदन देकर अवगत कराया जाता रहा है.

गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान 17 मार्च से बंद हैं. 

स्नातकोत्तर विभागों एवं कालेजों में कार्य कर रहे अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों का मानदेय घंटी के आधार पर मिलता है. महीने में जितनी कक्षाएं संचालित होती हैं उतना ही मानदेय बनता है.

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इन असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रति घंटी छह सौ रुपए और महीने में अधिकतम 36 हजार रुपये मिलने का प्रावधान है. जबकि छुट्टियों के दिनों और परीक्षा संचालन के समय मानदेय नहीं मिलता है.

कोरोना वायरस के कारण विगत तीन महीने से झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षण कार्य बंद हैं. जिसके कारण अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों को बीते तीन महीने का मानदेय एक रुपया भी नहीं मिल पाया. 

इस परिस्थिति में शिक्षकों को अपना भरण-पोषण कर पाना मुश्किल हो गया है. जबकि ये अनुबंध सहायक प्राध्यापकों द्वारा लाकडाउन समयावधि में लगातार आनलाईन क्लास, विश्वविद्यालय के कम्यूनिटी रेडियो 'रेडियो खांची' एवं यूट्यूब चैनल के अलावा ह्वाटसअप पर छात्र-छात्राओं को नोटस और अन्य संबंधित जानकारियां उपलब्ध करायी गई और वर्तमान में भी यह जारी है. 

यही नहीं लाकडाउन समयावधि में इन अनुबंध सहायक प्राध्यापकों द्वारा यूजी परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन का काम भी कराया गया. कापियों का मूल्यांकन कार्य प्राध्यापकों के द्वारा अपने-अपने घरों पर ही कर ये अपने दायित्वों का निर्वहन किए.  साथ ही लाकडाउन अवधि में विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार विभागावार इनसे यूजी और पीजी का माडल क्वेश्चन तैयार कराया गया. 

इन शिक्षकों का आरोप है कि कई स्नातकोत्तर विभागों एवं कालेज के पदाधिकारियों के अड़ियल रवैये के कारण अब तक पिछला बकाया का भुगतान हेतु कोई सकारात्मक पहल नहीं किया गया है,

जबकि कई स्नातकोत्तर विभागों एवं कालेजों में कार्यरत अनुबंध सहायक प्राध्यापकों को दिसम्बर 2019 तक का बकाया भुगतान कर दिया गया. जबकि अनुबंध प्राध्यापकों की स्थिति प्रवासी मजदूरों से भी बदत्तर हो गई है.

संघ के उपाध्यक्ष डॉ रिझू नायक का कहना है कि एफ ओ पिछले डेढ़ माह से ट्रेजरी बंद होने का हवाला देते हुये अंधेरे में रखें हुये हैं. उन्होंने कहा था कि 15 जून तक मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा.

मानदेय भुगतान के संबंध में जब 22 जून 2020 को एफ ओ से संपर्क किया गया तब पुनः उन्होंने ट्रेजरी बंद होने की बात कही और कहा कि ऑडिट चल रहा है. मानदेय भुगतान हेतु प्रोसेसिंग चल रहा है. 

डॉ नायक आगे कहते हैं कि जब अनुबंध सहायक प्राध्यापक संघ के शिक्षकों ने कुलपति से बकाया मानदेय भुगतान हेतु मिले तब उन्होंने कहा कि आपलोगों के भुगतान मद में जो राशि आई थी वह दूसरे मद में खर्च हो गई है. सरकार से डिमांड की गई है.


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