कांग्रेस के चूल्हे पर चढ़ी जेवीएम विधायक प्रदीप यादव और बंधु की हांडी, बहुत जल्दी खिचड़ी पक जाएगी

कांग्रेस के चूल्हे पर चढ़ी जेवीएम विधायक प्रदीप यादव और बंधु की हांडी, बहुत जल्दी खिचड़ी पक जाएगी
Twitter - RPN Singh
पीबी ब्यूरो ,   Jan 23, 2020

झारखंड विकास मोर्चा में बनते- बिगड़ते समीकरणों के पार्टी के दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की आज दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की.

इस मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह मौजूद थे. 

जेवीएम के बीजेपी में विलय की संभावनाओं और अटकलों के बीच दो दिन पहले ही जेवीएम ने विधायक बंधु तिर्की को पार्टी से निकाल दिया है. लिहाजा इस मुलाकात के मायने निकाले जाने लगे हैं.

कांग्रेस- जेवीएम के अंदरखाने से जो खबरें छन कर निकल रही हैं, उस मुताबिक दोनों विधायक बहुत जल्दी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. 

दोनों विधायक अभी दिल्ली में ही हैं प्रदीप यादव से इस मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ''अगर विचार मिलते हों, तो मिलना- जुलना लगा रहता है. हमारी पार्टी ने हेमंत सोरेन और कांग्रेस की सरकार को समर्थन दिया है. इससे पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर ही चुनाव लड़े थे. विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हेमंत सोरेन से मुलाकात और बात होती रही है, लेकिन कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हुई थी. झारखंड की मौजूदा राजनीति और सरकार आगे क्या करे इस पर बातचीत हुई है. '' 

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शुक्रवार को मंत्रिमंडल का विस्तार होना प्रस्तावित था. इस बीच गुरुवार की शाम हेमंत सोरेन ने राज्यपाल से मिलकर मंत्रिमंडल विस्तार की तिथि को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया. 

खबर है कि कांग्रेस ने ही हेमंत सोरेन से कहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार की तिथि बढ़ाई जा सकती है. अगर प्रदीप यादव और बधु तिर्की जल्दी में कांग्रेस में शामिल हुए, तो उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कराया जा सकता है.

कांग्रेस को इसका भी गुमान हो सकता है कि इन दोनों विधायकों के आने से झारखंड में उसके विधायकों की संख्या 18 हो जाएगी. प्रदीप यादव और बंधु तिर्की दोनों हेवी वेट हैं. लिहाजा जेएमएम को भी साधने में सहुलियत होगी. 

जाहिर है अगले कुछ दिन सत्ता की सियासत में हलचल बनी रहेगी. सरकार चलाने के लिए जेएमएम को कांग्रेस के साथ दोस्ती रखनी ही होगी. 

दसवीं अनुसूचि

इस बीच झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह ने ट्वीट करके बताया है कि झारखंड में जेवीएम के तीन में दो विधायक और दिल्ली में पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी से मिले. 

दरअसल, विधानसभा चुनाव में जेवीएम से बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ही चुनाव जीते हैं. बाबूलाल मरांडी के बीजेपी में जाने की अटकलें लगती रही हैं. और प्रदीप यादव तथा बंधु तिर्की ने बाबूलाल मरांडी से मिलकर कहा है कि वे बीजेपी में जाना नहीं चाहते. दोनों विधायक मीडिया से भी कई मौके पर कह चुके हैं कि वे बीजेपी में नहीं जाएंगे. 

दसवीं अनुसूचि के अनुच्छेद 102(2) और अनुच्छेद 191 (2) में दल परिवर्तन के आधार पर निरहर्ता के बारे में जो उपबंध है वह कहता है कि दलबदल के लिए दो तिहाई (टू थर्ड) सदस्यों का जाना जरूरी है.

सदन के किसी मूल राजनीतिक दल अथवा सदस्यों का विलय हुआ तभी समझा जाएगा जब संबंधित विधान दल के कम से कम दो तिहाई सदस्य ऐसे विलय के लिए सहमत हो गए हों. 

इसे भी पढ़ें: चाईबासा नरसंहारः बीजेपी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा, राज्य को अराजकता में ढकेला जा रहा

जहिर है आरपीएन सिंह इशारे में बता रहे हैं कि जेवीएम के तीन में से दो विधायकों का कांग्रेस में शामिल होने की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई है. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया है. 

इस मुलाकात के मायने तो यह भी निकलते हैं कि आप दोनों के कांग्रेस में जाने से दसवीं अनुसूचि की बाध्यता भी खत्म होती रहेगी. उधर बाबूलाल मरांडी की राह भी बीजेपी में जाने की राह आसान होगी, इस सवाल पर प्रदीप यादव कहते हैंः राजनीति में मुलाकात और बातों के मायने जरूर निकाले जाते हैं, लेकिन फिलहाल यह तैयारी नहीं है. 

पटकथा दोनों तरफ से 

गौरतलब है कि गौरतलब है कि पांच जनवरी को पार्टी की कार्यसमिति को भंग किए जाने के बाद शुक्रवार, 17 जनवरी को नई कार्यसमिति की घोषणा की गई है. इसमें बंधु तिर्की को केंद्रीय महासचिव के पद से हटा दिया गया है.

पार्टी के एक अन्य विधायक प्रदीप यादव को भी कार्यकारिणी में कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई है. जबकि वे पहले प्रधान महासचिव का पद संभाल रहे थे. लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद प्रदीप यादव ने इस पद से इस्तीफा दे दिया था. 

इस बीच 21 जनवरी को बंधु तिर्की को पार्टी से बाहर कर दिया गया. विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने और हटिया में कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करने के आरोप में बंधु तिर्की से जवाब तलब किया गया था. 48 घंटे की मियाद पूरी होने की बाद भी उन्होंने जवाब नहीं दिया. इसलिए पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है. 

जेवीएम के प्रधान महासचिव अभय सिंह इससे इंकार करते हैं कि बंधु तिर्की पर कार्रवाई पार्टी के विलय के मकसद से की गई है. वे कहते हैं कि विधायक बंधु तिर्की पर हटिया क्षेत्र से अधिकृत उम्मीदवार शोभा यादव ने आरोप  लगाया था कि उन्होंने उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया. उसी आरोप में जवाब मांगा गया था, लेकिन 48 घंटे की मियाद पूरी होने के बाद भी वे जवाब नहीं दिए. 

हालांकि इस कार्रवाई के बाद संभावनाओं को बल मिलने लगा कि अब जेवीएम का बीजेपी में विलय की राह को आसान बनाया जा रहा है. बंधु तिर्की को पार्टी से निकाले जाने पर प्रदीप यादव ने तल्ख टिप्पणी की थी. उन्होंने पार्टी से पूछा था कि इतनी जल्दीबाजी क्यों थी. 

इस बीच अंदरखाने इसकी भी चर्चा है कि बाबूलाल मरांडी को भी पता था कि प्रदीप यादव और बंधु तिर्की चुनाव नतीजे आने के बाद से ही कांग्रेस के संपर्क में आ गए हैं. 

चुनाव जीतने के तुरंत बाद हेमंत सोरेन की सरकार को समर्थन देने के लिए प्रदीप यादव और बंधु तिर्की तैयार हो गए थे. तब बाबूलाल मरांडी को ठीक नहीं लगा, लेकिन वे मन मसोस कर रह गए. इसके अलावा हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में भी बाबूलाल मरांडी की अनदेखी करते हुए पीछे की कतार में बैठाया गया था. 

अब दोनों विधायकों के कांग्रेस में जाने से बाबूलाल मरांडी के लिए पार्टी का विलय करना आसान हो सकता है. उनकी सदस्यता भी खतरे में नहीं जाती रहेगी. इधर प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की सदस्यता भी खतरे से बाहर जाती रहेगी. 

हालांकि हालांकि बाबूलाल मरांडी ने अब तक पुख्ता तौर पर नहीं कहा है कि उनकी पार्टी बीजेपी में विलय कर रही है, लेकिन जेवीएम में जिन किस्मों की गतिविधियां हैं उससे अटकलों और संभावनाओं का दौर जारी है. 

 


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