'टट्टी घर बनाए नहीं तो ओडीएफ का बोर्ड सुहाए कैसे, उखाड़ कर फेंक दिए'

'टट्टी घर बनाए नहीं तो ओडीएफ का बोर्ड सुहाए कैसे, उखाड़ कर फेंक दिए'
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पीबी ब्यूरो ,   Oct 16, 2019

पहले खुले में शौच जाते थे. और अब भी स्थिति वही है. घूंघट डालकर गांव- घर से दूर जाना होता है. अब इन गड्ढों का इस्तेमाल पखाना के लिए तो नहीं किया जा सकता. दरअसल, दो गड्ढे भर बना देने से शौचालय का काम पूरा भी नहीं हो जाता. पता चला है कि सरकारी बाबू लोग बोर्ड लगा रहे हैं कि खुले में शौच से गांव मुक्त हो गया. बाकी कपार हो गया

फुलसू गांव की पूनम देवी गंवई लहजे में यह सब कहते हुए चुप हो जाती हैं. झारखंड में लातेहार जिले के बरियातू प्रखंड के इस गांव में पूनम देवी इस हाल में अकेली नहीं हैं.

गांव की कई महिलाओं को इसका गुस्सा है कि शौचालय निर्माण के नाम पर घालमेल किया जा रहा है. बकौल विभा देवी और शुभा देवी ''हमनी के कहना है कि गांवां तो आकर कोई देखे. पता चल जाएगा कि किनकर घरे में शौचालय बनल और किनकर नाहीं. तब तो गांव के लोगन गुस्साए हैं. बोर्ड उखाड़ कर फेंक दिए तो क्या गलत किए.''

गांव के दर्जनों लोगों के घरों में शौचालय निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ और खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) का बोर्ड लगा दिया गया है. जाहिर है ग्रामीणों का गुस्सा फूटा. उन्होंने बोर्ड उखाड़ कर फेंक दिया. 

यहां पंचायत मुख्यालय के पास राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय की दीवार से सटाकर खुले में शौच मुक्त गांव का बोर्ड लगाया गया था.

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लातेहार के अलावा राज्य के दूसरे जिलों के की गांवों में भी कमोबेश इसी तरह की तस्वीरें उभर रही है. जहां शौचालय निर्माण का काम पूरा हुआ नहीं और ओडीएफ के बोर्ड दनादन लगाए जा रहे हैं. गौरतलब है कि झारखंड को खुले में शौच से मुक्त राज्य पहले ही घोषित कर दिया गया है. कई मौके पर सरकार इसे बड़ी उपलब्धि बताती रही है. 

इसी महीने दो अक्तूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर अहमदाबाद में आयोजित ‘स्वच्छ भारत दिवस’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत अब खुले में शौच से मुक्त हो गया है.

फुलसू के ही पारसनाथ यादव, दिनेश यादव, तुलसी यादव, प्रमोद यादव, बरून भुइंया, मनोज भुइंया, सरजू भुइंया बताते हैं कि शौचालय की दीवार खड़ी कर काम छोड़ दिया गया है. कई लोगों के शौचालय में दरवाजे और पैन नहीं लगाए गए हैं. योजना पूर्ण हुई नहीं और बोर्ड लगा दिए कि गांव खुले में शौच से मुक्त हो गया. ''ई तो यही बात हुई कि झूठ को सच मान लो. लेकिन गांव वालों को यह मंजूर नहीं. टट्टी घर नहीं तो बोर्ड भी नहीं''. 

फुलसु में पिपरा टोला, मुस्लिम टोला, कुम्हार टोला, भुइयां टोला व ठाकुर टोला मिला कर लगभग 300 घर हैं. 2010 के पंचायत चुनाव के बाद 2012 से इस गांव मे शौचालय निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन सात साल में भी रूरा नहीं हो सका. 

शुभा देवी, पुनम देवी, जितेन्द्र ठाकुर, शोभा यादव, नगीया देवी, विभा देवी, शांति देवी का कहना है कि 200 घरों के लोग अब भी खुले में शौच जाते हैं. इसके बाद भी खुले में शौच से मुक्त का बोर्ड लगा दिया गया. कागज पर काम पूरा कर दिए, तो जमीन पर बोर्ड काहे का लगाए. 

हेमंती देवी और मीना देवी गुस्से में कहती हैं, ''12 हजार रुपए का शौचालय और साल भर में भी काम पूरा नहीं. किस- किस से फरियाद करिए. जिससे कहेंगे, वहीं जवाब देगा उपर बता दिया है. जल्दी काम पूरा हो जाएगा.'' 

गणेश यादव कहते हैं कि फुलसू पंचायत के अलावा दूसरे कई गांवों में कमोबेश यही हालत है. कहीं दरवाजा नहीं लगा है, तो कहीं टंकी का काम पूरा नहीं हुआ है. कहीं छत्त नहीं तो, तो कहां पाइप नहीं.

बरियातू प्रखंड के ह गोनिया गांव के लोग इस बात को लेकर नाराज हैं कि खुले में शौच से मुक्त का बोर्ड लगा दिया गया है. जबकि गांव के कई लोग अब भी खुले में शौच जाने के लिए 

मुखिया तेतरी देवी कहती हैं कि यह सच है कि सभी लोगों के शौचालय नहीं बने हैं. योजनाएं स्वीकृत जरूर हुई हैं. कई लोगों के शौचालय का काम अधूरा पड़ा है. इसकी जानकारी संबंधित विभाग और अधिकारियों की दी गई है. 

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स्वच्छ भारत मिशन के प्रखंड समन्वयक राजेंद्र कुमार कहते हैं अभी क्षेत्र में शौचालय निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ है. विभाग को रिपोर्ट भेजी गई है. जल्दी ही काम पूरे कराए जाएंगे. लेकिन खुले में शौच से मुक्त का बोर्ड किसने लगाया है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है. 

हालांकि ये बोर्ड जिला जल स्वच्छता समिति द्वारा लगाए जा रहे हैं. लातेहार के अलावा दूसरे जिलों के गांवों में भी ये ्भियान चल रहा है. हाल ही में बरही के एक गांव में इसी तरह का मामला सामना आया था. 


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