रात ढाई बजे हिंदपीढ़ी कब्रिस्तान में दफनाया गया कोरोना से मरे शख्स को, घर में ही नसीब हुई मिट्टी

रात ढाई बजे हिंदपीढ़ी कब्रिस्तान में दफनाया गया कोरोना से मरे शख्स को, घर में ही नसीब हुई मिट्टी
Photo-Imran
पीबी ब्यूरो ,   Apr 13, 2020

झारखंड की राजधानी रांची में कोरोना वायरस से मरने वाले व्यक्ति को रात ढाई बजे हिंदपीढ़ी में दफानाया गया. हिंदपीढ़ी के निजाम नगर स्थित 'बच्चा कब्रिस्तान' में उन्हें मिट्टी दी गई. 

सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने में मिल्ल्त पंचायत और हिंदीपीढ़ी के ही एक पूर्व पार्षद की भूमिका अहम रही. कोरोना से मरने वाले मरीज हिंदपीढ़ी के रहने वाले थे. रविवार की सुबह 9 बजे रिम्स में उनकी मौत हुई थी.

शव को रांची के ही किसी कब्रिस्तान में दफनाए जाने को लेकर प्रशासन और पुलिस को रविवार दिन भर अलग- अलग जगहों पर विरोध का सामना करना पड़ा. इस वजह से लगभग 15 घंटे तक शव रिम्स के एंबुलेंस में ही रखा रहा. 

हालांकि इन विरोध में कब्रिस्तान या किसी मुस्लिम कमेटी के अधिकृत लोग शामिल नहीं थे. 

विरोध का नजारा और प्रशासनिक जद्दोजहद को देखते हुए हिंदपीढ़ी के लोग और मिल्लत पंचायत ने हिंदपीढ़ी स्थित बच्चा कब्रिस्तान में शव दफनाए जाने की पेशकश की. 

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इसके बाद जिला पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने शव को हिंदपीढ़ी स्थित नाला रोड के कब्रिस्तान में भेजा. 

रात ढाई बजे जनाजे की नमाज़ मौलाना ओबैदुल्लाह क़ासमी ने पढ़ाया. कोरोना से मौत होने होने पर अंतिम क्रियाक्रम को लेकर जारी गाइडलाइन के तहत चार लोग ही कब्रगाह तक गए. 

हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए और प्रशासनिक अनुमति से कई लोग जनाजे में शामिल हुए.

इनमें अमन यूथ सोसाइटी के सदस्य अफरोज आलम, नदीम इक़बाल,एजाज गद्दी, शाहिद अयूबी,मिल्लत पंचायत के सदर मोनेसार, उपाध्यक्ष शादाब खान मुख्य तौर पर शामिल थे. 

इससे पहले मौत के बाद दो गज जमीन के लिए आफत की इस स्थिति पर सोशल साइट में दिन से रात तक प्रतिक्रियाओं और अफसोस का दौर जारी रही. 

बरियातू और रातू रोड में हुआ था विरोध

इससे पहले राजधानी के बरियातू और रातू रोड में कब्रिस्तान में शव को दफनाने का स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया था. रातू रोड स्थित कब्रिस्तान के पास मुख्य मार्ग पर दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए. इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं. 

रविवार सुबह कोरोना पॉजिटिव मरीज की रिम्स में मौत के बाद दोपहर में मरीज के शव को दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई. पुलिस और प्रशासन के लोग दिन के करीब एक बरियातू के जोड़ा तालाब रोड स्थित कब्रिस्तान गए. 

इसकी सूचना मिलते ही कुछ लोग सड़क पर निकल आए. उनका कहना था कि यह घनी आबादी वाला क्षेत्र है. यहां कोरोना संक्रमित मरीज का शव नहीं दफनाया जाए. 

बरियातू में विरोध को देखते हुए प्रशासनिक महकमा दिन के करीब ढाई बजे रातू रोड स्थित कब्रिस्तान का जायजा लेने पहुंचा. इस दौरान भी लॉक डाउन का उल्लंघन करते हुए लोग सड़कों पर उतर गए.

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लोगों का कहना था कि जब कोरोना का संकट बढ़ता जा रहा है, तो शव दफनाने को लेकर सरकार आबादी वाले क्षेत्रों का ध्याव रखे. 

लोगों की भीड़ और हालात देखते हुए ट्रैफिक एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग मौके पर पहुंचे और समझाने का प्रयास किया. इससे पहले से पुलिस के कई अधिकारी लोगों को समझाते दिखे. पर लोग अपनी बात पर अड़े रहे. कई लोग कब्रिस्तान के गेट के पास धरना पर बैठ गए.  

आखिरकार पुलिस ने भरोसा दिलाया कि यहां शव नहीं दफनाया जाएगा, तब लोग घरों को लौटे. 

इसके बाद शव दफनाने को लेकर प्रशासनिक और पुलिस के पदाधिकारी बैठक करते रहे. तथा विकल्प तलाशे जाने लगे. 

मलेशियाई महिला के संपर्क में

इन हालात को देखते हुए हिंदपीढ़ी और मिल्लत पंचायत के लोगों ने हिंदपीढ़ी कब्रिस्तान मे ही शव दफनाए जाने की पेशकश की. 

गौरतलब है कि हिंदपीढ़ी के रहने वाले कोरोना पॉजिटिव जिस मरीज की मौत हुई है उनकी पत्नी और बेटे भी कोरोना से संक्रमित हैं और उनका इलाज रिम्स में चल रहा है.  

हालांकिमरने वाले शख्स डाय़बिटीज और हार्ट के भी मरीज थे. सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. 

यह परिवार तबलीगी जमात से जुड़ी मलयेशिया महिला के संपर्क में आने से इस बीमारी की चपेट में आया है. 

मलेशिया की यह महिला भी कोरोना से संक्रमित है. उनका इलाज भी रिम्स के कोविड-19 वार्ड में चल रहा है. 

इससे पहले आठ अप्रैल को बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में साड़म के एक बुजुर्ग की कोराना से मौत हुई थी. 


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