जाने-माने साहित्यकार और आलोचक खगेंद्र ठाकुर नहीं रहे, शोक की लहर

जाने-माने साहित्यकार और आलोचक खगेंद्र ठाकुर नहीं रहे, शोक की लहर
पीबी ब्यूरो ,   Jan 13, 2020

जाने-माने साहित्यकार और आलोचक खगेंद्र ठाकुर का निधन हो गया है. वे 83 साल के थे. पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. इलाज के लिए उन्‍हें पटना एम्‍स में भर्ती कराया गया था. आज उन्होंने अंतिम सांस ली. 

खगेंद्र ठाकुर के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है डॉ खगेंद्र ठाकुर का जन्‍म झारखंड के गोड़डा जिले के मालिनी गाव में 9 सितंबर 1937 में हुआ था. इनके पिता का नाम शिवशंकर ठाकुर और माता का नाम अकोला देवी था. 

खगेंद्र ठाकुर शुरुआत से ही वामपंथी धारा की राजनीति से जुड़े रहे. वे लंबे समय तक झारखंड भाकपा राज्य कमेटी के सहाययक सचिव सह सदस्य भी रहे.

खगेंद्र ठाकुर भागलपुर विश्वविद्यालय में प्रध्यापक भी थे. बाद में इस पद से इस्तीफा देकर वे पार्टी के सक्रिय राजनीति में जुड़ गए और आजन्म पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे. डॉ.खगेन्द्र ठाकुर के निधन पर पार्टी के राज्य कार्यालय का झंडा झुका दिया गया है. 

भाकपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य सह झारखंड राज्य के सहायक सचिव महेन्द्र पाठक ने कहा है कि ठाकुर के निधन से भाकपा को अपूरणीय क्षति हुई है. 

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उन्होंने कहा कि खगेंद्र ठाकुर पार्टी के बौद्धिक स्तंभ थे. साथ ही उनके नहीं रहने से देश के प्रगतिशील सांस्कृतिक व साहित्यिक आन्दोलन को गहरी क्षति हुई है. वे प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे. उन्होंने मार्क्सवाद और वर्त्तमान राजनीति से संबंधित कई पुस्तकों का सृजन किया. साथ ही साहित्यिक सवालों पर प्रगतिशीलता को लेकर निरंतर हस्तक्षेप करते रहे हैं. 

 खगेंद्र ठाकुर 1973 से 1994 तक बिहार प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के महासचिव रहे. 1994 से 1999 तक प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेवारी संभाली.

झारखंड- बिहार में साहित्याकों, आलोचकों, कवियों के बीच वे काफी लोकप्रिय रहे. कई आयोजनों में वे बढ़चढ़ कर भाग लेते. व्यंग्य और कविताएं विधा में भी उनकी पहचान थी. रक्त कमल परती पर, धार एक व्याकुल (कविता संग्रह) उनकी चर्चित कृति में शामिल थी. 

वे लेखक नहीं हैं, ज्योति का अक्स, धुआँ उठने को है, पुरानी हवेली, मेरा सीना हाजिर है समेत कई रचनाएं उनके नाम शामिल हैं. 

झारखंड-बिहार के पत्र-पत्रिकाओं में उनके आलेख, रचना नियमित तौर पर छपते रहे हैं. सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों पर भी वे लिखते रहे. 


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