लॉक डाउन के चलते बाहर फंसे झारखंडी मजदूरों को वापस लाना संभव नहीं, पर जरूरतें पूरी करेगी सरकार

लॉक डाउन के चलते बाहर फंसे झारखंडी मजदूरों को वापस लाना संभव नहीं, पर जरूरतें पूरी करेगी सरकार
Publicbol (गढ़वा के मजदूर वापस आने के लिए परेशान हैं)
पीबी ब्यूरो ,   Mar 27, 2020

कोरोना संकट को लेकर झारखंड के युवा और मजदूर अब भी बड़ी तादाद में दूसरे राज्यों में फंसे पड़े हैं. इस बीच लॉक डाउन को कारगर बनाने और केंद्र सरकार के गाइड लाइन को देखते हुए सरकार ने कहा है कि जो लोग दूसरे प्रदेशों में हैं, वहीं बने रहें. वहां के शासन प्रशासन से बात कर झारखंड सरकार मजदूरों की जरूरतें पूरी करने की तमाम कोशिशें करेगी. 

आज राजधानी रांची स्थित प्रोजेक्ट बिल्डिंग में मुख्य सचिन डॉ डीके तिवारी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लॉकडाउन के बाद विभिन्न प्रदेशों में फंसे झारखंड वासियों द्वारा लगातार वापस घर लाने के आग्रह को देखते हुए सभी विकल्पों पर विचार किया गया.

इस दौरान लॉकडाउन के लिए बनी राज्यस्तरीय समितियों के नोडल पदाधिकारियों ने वर्तमान परिस्थितियों के बीच अपने विचार और सुझाव साझा किए.  

मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार के गाइड लाइन का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि झारखंड के जो लोग, अन्य प्रदेशों में जहां हैं, वहीं बने रहेंगे. उन राज्यों के शासन और प्रशासन से संपर्क कर झारखंड वासियों की मूलभूत जरूरतों को वहीं पूरा कराया जाएगा.

इसके लिए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जल्दी बाहर के प्रदेशों में फंसे लोगों की संख्या, पता-ठिकाना आदि की मुकम्मल जानकारी लेकर उन तक स्थानीय स्तर पर सुविधा सुविधा पहुंचाने का प्रयास शुरू करें.

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उन्होंने आला अधिकारियों से कहा कि इसके लिए सीधे वहां के कलक्टरों से संपर्क कर झारखंड वासियों की सूची प्राप्त करें और उनकी जरूरतों की जानकारी प्राप्त करें. अगर जरूरी हो तो राज्य सरकार झारखंड वासियों को सुविधा उपलब्ध कराने के एवज में वहां के कलक्टरों को सीधे राशि भी देगी.

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि यह कार्य यथाशीघ्र किया जाए. वहीं बाहर के प्रदेशों में फंसे लोगों की लगातार काउंसलिंग करने पर बल देते हुए कहा कि इससे उन्हें यह ढांढस मिलेगा कि उनकी खैर ली जा रही है.

गौरतलब है कि आज ही सुबह में रामकुमार रौशन नामक व्यक्ति ने हेमंत सोरेन को ट्वीट कर जानकारी दी है कि धनबार क्षेत्र के दर्जनों मजदूर हैदराबाद में फंसे हैं. लॉक डाउन की वजह से रहने- खाने की मुश्किलों से वे जूझ रहे हैं. 

जबकि हेमंत सोरेन ने जवाब दिया है कि वहीं रूकना उनके लिए मुनासिब है. देशव्यापी लॉक डाउन की वजह से सबको घर वापस लाना संभव नहीं है, पर उन्हें खाने की तकलीफ हो, तो राज्य सरकार उन तक मदद जरूर पहुंचाएगी. 

गढ़वा और चतरा के मजदूर

इस बीच गढ़वा जिले के भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के कई मजदूरों के तेलंगाना समेत दूसरी जगहों पर फंसे होने की जानकारी सामने आई है.

गैर सरकारी संस्था सोशल इनोवेशन ग्रुप के अध्यक्ष अनुपन सिंह ने पलामू के सांसद वीडी राम को पूरे मामले की जानकारी दी है. और मजदूरों को वापस लाने का आग्रह किया है. 

मजदूरों के बाहर के राज्यों में फंसे होने के मामले में हाल ही में भवनाथपुर के विधायक भानू प्रताप शाही ने मुख्य सचिव से मिलकर पहल करने का आग्रह किया था.

 

हेमंत सरकार के मंत्री और गढ़वा के विधायक मिथिलेश ठाकुर का कहना है कि उन्होंने पूरे जिले के मजदूरों के बारे में सरकार को जानकारी दी है.

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उन्होंने कहा है कि लोग घबराएं नहीं. जो जहां हैं वहीं रहे, उनके रहने खाने की व्यवस्था सरकार गंभीरता से करा रही है.  

उधर चतरा जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड अंतर्गत चिरीदीरी पंचायत के दर्जनों लोग महाराष्ट्र के उलाशनगर कल्याण में फसे हुए हैं. ये मजदूर जिस कंपनी में काम करते थे वहां काम बंद हैं.

लॉक डाउन में फंसे इन मजदूरों के सामने रहने-खाने की दिक्कत हो रही है. उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है. 


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