एक ही शोर, मोदी मैजिक का जोर...

एक ही शोर, मोदी मैजिक का जोर...
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पीबी ब्यूरो ,   May 23, 2019

चुनावों में उछाला गया नारा- फिर एक बार मोदी सरकार का शोर नजीते के रूझान के साथ जोर पकड़ते जा रहे हैं. अबतक के मिले रुझानों के मुताबिक बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए 300 सीटों के आंकड़े को पार दिखाई पड़ रहा है.

जैसे- जैसे बीजेपी जीत की ओर बढ़ रही है, जश्न का दौर तेज होता जा रहा है. महाराष्ट्र में भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर कार्यकर्ता जश्न में डूबे हैं. वे आपस में मिठाइयां बांट रहे हैं और ढोल-नगाड़ों की धुन पर भांगड़ा कर रहे हैं. बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश , राजस्थान में भी बीजेपी के कार्यकर्ता और समर्थक खुशियों में डूबे दिख रहे हैं. 

2014 की तरह इस बार भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव लड़ने वाली बीजेपी शानदार जीत की ओर बढ़ रही है. जिन राज्यों में गठबंधन के तहत विपक्षी दलों ने चुनाव लड़ा, वहीं भी उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा है.

उत्तर प्रदेश में सपा- बसपा गठबंधन ने बीजेपी को थोड़ा नुकसान जरूर पहुंचाया है, लेकिन बीजेपी पश्चिंम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र में बेहतर प्रदर्शन करती दिख रही है. बिहार में भी एनडीए जोरदार प्रदर्शन करता दिख रहा है. यहां महागठबंधन को करारा झटका का सामना करना पड़ सकता है. 

2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी पहली बार केंद्र की राजनीति में आए थे, चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के पक्ष में लहर देखी गई और नतीजा भी वैसा ही रहा. इस बार ऐंटी-इनकंबैसी फैक्टर और तमाम मसलों पर विपक्षी हमलों के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा था कि नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर मिल सकती है.

इसे भी पढ़ें: हिन्दी पट्टी राज्यों में बीजेपी की दमदार पारी, विपक्ष के लिए संभालना मुश्किल

हालांकि जैसे-जैसे मोदी की रैलियां होती गईं, देश में मोदी का असर प्रभावी होता गया, जबकि पहले से बिखरा विपक्ष अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष करता दिखा. सात चरणों के चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल्स ने एनडीए में पहले ही उत्साह भर दिया था. लेकिन वोटों की गिनती के बाद यह उत्साह कहीं ज्यादा परवान चढ़ता दिख रहा है. मोदी मैजिक विपक्ष के सारे फैक्टर को धाराशायी करता दिख रहा है.

2014 में नरेंद्र मोदी हिंदी पट्टी राज्यों में जाति के आधार पर पार्टियों को मिलने वाले वोटों को साधने में कामयाब रहे थे. इस बार यूपी में भले ही एसपी, बीएसपी और आरएलडी जैसी ठोस जनाधार वाली पार्टियों ने हाथ मिलाकर नया समीकरण तैयार करने की कोशिश की थी पर रुझानों से साफ है कि मोदी के साइलेंट वोटरों की बड़ी तादाद है. जिनका मिजाज सिर्फ मोदी ही समझ पाते हैं. यह एक तरह से क्षेत्रीय पार्टियों और उन नेताओं के लिए खतरे की घंटी है जो अपना जातिगत वोट आधार लेकर चुनावों में दावेदारी जताते हैं.  

मोदी क्षेत्रीय दलों को अपने साथ मिलाकर क्षेत्रीय दलों के वोट बैंक पर सेंध लगाने में सफल होते दिख रह हैं. बिहार और महाराष्ट्र इसका उदाहरण है. 

 


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