सरकार में मनरेगा का शोर, पर लातेहार में काम के लिए तरस रहे गरीब, मजदूर और कमजोर

सरकार में मनरेगा का शोर, पर लातेहार में काम के लिए तरस रहे गरीब, मजदूर और कमजोर
Photo- Dheeraj Kumar (लातेहार के चपरी गांव में दलित समुदाय के लोग काम मांग रहे)
पीबी ब्यूरो ,   Jun 12, 2020

फगुआ के वक्त ही परदेस से लौटे थे. इसके बाद लॉकडाउन लग गया. दिहाड़ी खटने परदेस नहीं जा सके. कुछ लोगों से पता चला कि गांव में ही काम खुलेगा. नरेगा में काम की मांग की थी. हाथ को काम मिल जाए, इसका इंतजार है.  

संजय भुइंया को यह पता नहीं कि उनके नाम से मस्टर रोल निकल गया गया है. वे कहते हैं कि किसी मेठ, सेवक ने बताया नहीं कि कहां काम खुला है. कब जाना है. 

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के सुदूर चपरी गांव में संजय भुइंया अकेले इस हाल में नहीं. छोटू राम भी होली के वक्त गुजरात से लौटे थे. मनरेगा में काम की मांग की, लेकिन अब तक हाथ खाली हैं. 

इस गांव में अधिकतर दलित समुदाय के परिवार हैं. और मनरेगा में काम के लिए कई हफ्ते से तरस रहे हैं. गरीब मजदूर सौ दिन का पूरा काम चाहते हैं.

सिरसत भुइंया समेत कई लोगों ने टूटी-फूटी भाषा में एक दरख्वास्त 26 मई को प्रखंड विकास पदाधिकारी को भेजा था. इसमें कई लोगों ने अंगूठा भी लगाए हैं. 26 दिन गुजर गए, काम नहीं मिला. 

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इधर लॉकडाउन से उपजे गंभीर संकट के बीच झारखंड में मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाने और गरीबों, मजदूरों को काम देने के लिए सरकार में शोर है.

तमाम निर्देश दिए जा रहे हैं. बड़े पैमाने पर काम खुले, इसके लिए तीन नई योजनाएं भी शुरू की गई है. लेकिन जमीनी हकीकत गरीबों, वंचितों की चिंता और तकलीफ बढ़ाती है. 

भोजन के अधिकार तथा नरेगा वॉच से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता धीरज कुमार कहते हैं कि लातेहार जिले के के कई आदिवासी दलित गांवों में गरीब और मजदूर इन्ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. 

वे बताते हैं कि टीसीबी में काम के लिए संजय भुइंआ के नाम से मस्टर रोल खुला, पर मजदूर को पता नहीं कि काम पर कब जाना है. दरअसल यहीं से बिचौलिया का काम शुरू होता है. 

लॉकडाउन में गरीबों की परेशानी बढ़ी है. ग्रामीणों को काम खुलने का इंतजार है. वे चाहते हैं कि कानून के तहत पूरे 100 दिन का काम मिले और समय पर पैसा.

कई गांवों के लोग बता रहे हैं कि रोजगार सेवक के रहमोकरम पर है सब टिका है. वो चाहेगा, तो काम खुलेगा. जमीन पर अधिकारी पहुंचते नहीं, जिससे ये शिकायतें आम है. 

लेकिन सरकारी तंत्र के कामकाज के तौर तरीके मे पारदर्शिता नहीं है. मेठ और रोजगार सेवकों की मनमानी की अक्सर शिकायतें मिलती हैं. काम मांगने पर नहीं दिया जाना कानून का उल्लंघन है.

 


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