7 लाख भाड़ा देकर इंफाल से दुमका लौटे मजदूर, बोले, कब तक सरकार का इंतजार करते

7 लाख भाड़ा देकर इंफाल से दुमका लौटे मजदूर, बोले, कब तक सरकार का इंतजार करते
पीबी ब्यूरो ,   May 22, 2020

झारखंड सरकार के एप पर आनलाइन फॉर्म भरे. अफसरों- नेताओं को फोन करके गुहार लगाई. कोई रास्ता नहीं निकला. फिर भाड़े पर बस लेकर वापस लौटे. 

प्रवासी मजदूर कोका राय, पंकज राय जगदीश पाल यह कहते हुए हिम्मत दिखाने की कोशिश करते हैं कि जेब से इतने पैसे खर्च करने आसान नहीं थे. लेकिन मुश्किलों को अपने बूते ही पीछे छोड़ना होगा, यह हमें पता है. 

झारखंड में दुमका जिले के रामगढ़ और गोपाकांदर प्रखंड के रहने वाले 96 प्रवासी मजदूर इंफाल से वापस अपनी धरती पर लौटने में सफल रहे हैं. बसों से लौटे इन मजदूरों ने सात लाख रुपए भाड़े पर खर्च किए. 

मजदूर बताते हैं कि लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया. रहने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी, लेकिन हाथ पर हाथ धरे कब तक बैठते. झारखंड में भी कोरोना का संक्रमण फैल रहा है, इसे लेकर घर- परिवार की चिंता अलग सताने लगी. सभी साथी वापस लौटने के लिए लंबे दिनों तक प्रयास करते रहे. साथ ही खुद क्वारंटाइन में रहने को तय किया है. 

वहीं 41 प्रवासी मजदूरों का एक और जत्था असम के सिल्चर से 2.35 लाख खर्च कर बस से वौपस दुमका लौटा है. 

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रामगढ़ प्रखंड के चिंहुटिया औक शंकपुर गांव के प्रवासी मजदूर बताते हैं कि वेलोग इंफाल में भवन निर्माण का कार्य करते थे. लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया. रहने में वहां परेशानी नहीं थी. लेकिन हालात देखने से यही लगा कि वापस लौटना पड़ेगा. उतनी दूर से पैदल आ भी नहीं सकते थे. 

फूलचंदर बताते हैं कि जब बस वाले ने इतनी बड़ी रकम मांगी, तो मानो कई मजदूरों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. लेकिन जैसे- तैसे इंतजाम करना पड़ा. घर वालों को भी जानकारी दी. 

इधर रामगढ़ प्रखंड पहुंचने के बाद मजदूरों ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी और खुद ही क्वारंटाइन में रहने का अनुरोध किया. सभी मजदूरों के कागजात देखने के बाद  उन्हें होम क्वारंटाइन में रहने को कहा गया है. मजदूरों ने बताया कि मणिपुर में उन सभी की थर्मल स्कैनिंग के साथ कई बार जांच भी कराई गई है. 

रामगढ़ के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजय कुमार मिश्रा का कहना है कि सभी प्रवासी मजदूर ग्रीन जोन से आए हैं. कोरोना संक्रमण के मामले में इंफाल(मणिपुर) सेफ जोन में आता है.

चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मिश्रा ने बताया कि सेफ जोन से आने के बावजूद एहतियात के तौर पर सभी प्रवासी मजदूरों को होम क्वारंटाइन में रहने को कहा गया है.

वहीं, असम के सिलचर से 2.35 लाख रुपए में बस भाड़ा देकर वापस आने वाले प्रवासी मजदूर रामगढ़ के सुसनियां के रहने वाले हैं. संजय कुमार,भरत कुमार, निरंजन सहित कई मजदूरों ने बताया कि वे लोग असम में सड़क निर्माण कंपनी में मजदूरी करते थे. इन मजदूरों ने भी अपनी जेब से पैसे खर्च बस भाड़ा उठाया. 

हेमंत का गृह मंत्री को पत्र

इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है. इसके जरिए देश के सुदूर इलाकों में फंसे झारखंडी मजदूरों को वापस लाने के लिए हवाई जहाज चलाने की अनुमति मांगी है. 

इससे पहले 12 मई को राज्य के मुख्य सचिव ने भी केंद्रीय गृह सचिव को इस बाबत पत्र भेजा था. हेमंत सोरेन का कहना है कि लद्दाख के सुदूरवर्ती इलाकों में झारखंड के करीब 200 प्रवासी मजदूर फंसे हैं. 

इसके अलावा उत्तर पूर्वी राज्यों में करीब 450 श्रमिक अब भी फंसे हुए हैं, जिन्हें ट्रेन या बस से लाना फिलहाल संभव नहीं है. इसलिए गृह मंत्रालय राज्य के श्रमिकों को सम्मान पूर्वक लाने की अनुमति प्रदान करें. मुख्यमंत्री ने कहा है कि लेह और उत्तर पूर्वी राज्यों से चार्टर प्लेन चलाने की अनुमति देना चाहेंगे. 

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सुदेश बोले, पैसे लौटाए सरकार 

इससे पहले आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और विधायक दल के नेता सुदेश कुमार महतो ने दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की हालत पर चिंता जताने के साथ सरकार से मांग की है कि अपने बूते ट्रकों, बसों और अन्य गाड़ियों से घर लौट रहे मजदूरों को सरकार उनके पैसे लौटाए. 

उन्होंने कहा है कि देश के कई कई जगहों से लाख- डेढ़ लाख रुपए किराये देकर झारखंड के मजदूर जत्थे में वापस हो रहे हैं. इसमें एक- एक मजदूर भाई को दो से पांच हजार रुपए वहन करना पड़ रहा है. 

बहुत मजदूर घर से पैसे मंगाकर लौट रहे हैं. घर के लोग कर्ज लेकर पैसे भेज रहे हैं. इसलिए सरकार को इस मामले में संवेदनशील तरीके से आगे बढ़कर खर्च उठाना चाहिए. 

इसके साथ ही सरकार ये सूचनाएं सार्वजनिक करे कि कहां से और किन तारीखों को प्रवासी मजदूर लौट सकेंगे. कब- कब किन स्टेशनों से रेलगाड़ियां चलने की अनुमति दी गई है. 


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