लोहरदगाः क्या 'सुदर्शन चक्र' चल पाएगा, दो चुनावों में बच कर जो निकले हैं

लोहरदगाः क्या 'सुदर्शन चक्र' चल पाएगा, दो चुनावों में बच कर जो निकले हैं
Publicbol
चित्रांश ,   Apr 01, 2019

संगठन और संघ के बीच बढ़िया छवि रखने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत का चक्र लोहरदगा में इस बार चल सकेगा. क्या उनकी सीधी लड़ाई कांग्रेस से होगी. क्या इस बार फिर लोहरदगा के चुनावी मैदान में कोई तीसरा कोण उभरेगा. और वह कोण बेहद अहम होगा. सवाल और भी हैं. और ये सवाल सुदर्शन भगत के मैदान संभालने के साथ ही साथ ही चुनावी सियासत में तेजी से घूम रहे हैं.

दरअसल 2009 और 2014 में सुदर्शन भगत बहुत मामूली वोटों से चुनाव जीत सके हैं. इन दोनों चुनावों में सुदर्शन भगत को कांग्रेस के डॉ रामेश्वर उरांव और चमरा लिंडा (अभी जेएमएम के विधायक) से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था. कांग्रेस की कसक यह रही है कि दोनों चुनाव में चमरा लिंडा उसके वोट बैंक पर ज्यादा दरक लगा सके. 

इधर कठिन मुकाबले के बीच 2014 में सुदर्शन भगत चुनाव जीते, तो उन्हें नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया. अभी वे यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

मामूली मार्जिन

गौरतलब है कि 2014 में बीजेपी के सुदर्शन भगत महज 6489 वोटों से चुनाव जीते थे. दूसरे नंबर पर रहे रामेश्वर उरांव को दो लाख 20 हजार 177 वोट मिले थे. जबकि चमरा लिंडा तृणमूल कांग्रेस से चुनाव लड़े थे. और चमरा लिंडा को एक लाख 18 हजार 355 वोट मिले थे. तीनों उम्मीदवारों का वोट महज कुछ हजारों के अंतर पर आगे- पीछे रहा. 

इसे भी पढ़ें: चुनाव आयोग के निर्देश पर हटाए गए झारखंड के एडीजी अनुराग गुप्ता

2009 के चुनाव में चमरा लिंडा निर्दलीय चुनाव लड़े. और वे दूसरे नंबर पर रहे. इस चुनाव में बीजेपी के सुदर्शन भगत 8251 वोटों से चुनाव जीते.

सुदर्शन भगत को एक लाख 44 हजार 605 जबकि चमरा लिंडा को एक लाख 36 हजार 344 वोट मिले. तीसरे नंबर पर रहे रामेश्वर उरांव को एक लाख 29 हजार 610 वोट मिले.

सुदर्शन भगत की छवि सरल, सहज की रही है. लेकिन केंद्र में मंत्री बनाए जाने के बाद पांच सालों में वे लोहदगा संसदीय क्षेत्र के लिए कोई अहम या बड़ा काम कर सके हों इसे लेकर सवाल पहले से उठते रहे हैं. 

हांल के दिनों में कांग्रेस के अरूण उरांव ने सिलसिलेवार तरीके से इन्हीं मामलों को उठाते हुए बीजेपी को सकते में डाल दिया है. 

बीजेपी को डर

यही आंकड़े बीजेपी को डराते हैं. बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता है कि अगर विपक्ष से कोई एक उम्मीदवार हुआ, तो मैदान बहुत कठिन हो सकता है.

इधर विपक्षी गठबंधन में लोहरदगा की सीट कांग्रेस के खाते में गई है. कांग्रेस ने अब तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. हालांकि उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस में कम से कम तीन अहम नाम हैं- रामेश्वर उरांव, अरूण उरांव और सुखदेव भगत.

कौन हैं दावेदार

सुदर्शन भगत के सामने क्या चुनौतियां हो सकती है उसकी चर्चा से पहले कांग्रेस के इन तीन दावेदारों की राजनीतिक हैसिय़त और पकड़ पर चर्चा प्रासंगिक होगा.

पूर्व आईपीएस अधिकारी रामेश्वर उरांव ने 2004 में कांग्रेस की टिकट से लोहददगा का चुनाव जीता था. 2004 में ही कांग्रेस लंबे दिनों बाद बीजेपी से यह सीट छीनने में सफल रही थी.

रामेश्वर उरांव, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन भी रहे हैं. लेकिन 2009 और 2014 में वे बीजेपी के सुदर्शन भगत से चुनाव हार गए.

इसे भी पढ़ें: लंबे दिनों बाद भाजपा के विद्युतवरण और आजसू के सहिस हुए करीब, गिले-शिकवे किए दूर

दो चुनाव हारने के बाद डॉ रामेश्वर उरांव अपनी जरूरतों के हिसाब ही क्षेत्र में घूमते रहे. हालांकि लोहरदगा की राजनीति जानने- समझने वाले भी मानते हैं कि डॉ उरांव के समर्थकों या चुनाव में मैदान संभालने वालों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन वे अपने नेता के प्रति समर्पित होते हैं.

सुखदेव भगत कांग्रेस से लोहदगा के विधायक हैं. और झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. राज्य प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़ राजनीति में आए सुखदेव भगत ने क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की है और कार्यकर्तों- समर्थकों को लामबंद भी कर रखा है.

डॉ अरूण उरांव भी आईपीएस रहे हैं. अभी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सह प्रभारी हैं. राहुल गांधी की युवा रणनीतिकारों की टोली में उनका नाम शुमार रहा है. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में उस राज्य के आदिवासी इलाकों में डॉ अरूण उरांव ने अहम भूमिका निभाई है. इन दिनों वे लोहरदगा संसदीय क्षेत्र में सक्रिय हैं.

संबावना प्रबल है कि कांग्रेस उन्हें लोहरदगा में आजमाए. दरअसल राजनीति में आने के बाद अरूण उरांव की मौजूदगी आम लोगों के बीच और पार्टी के अंदर प्रभावी तौर पर होती रही है. 

बीजेपी की नजरें इसी ओर टिकी है कि कांग्रेस इन तीनों में किसे मैदान में उतारती है. वैसे इन तीनों में किसी एक को टिकट मिलने के बाद चुनाव में आपसी तालमेल कैसा रहेगा, यह परखा जाना भी बाकी है.

चमरा लिंडा

झामुमो विधायक चमरा लिंडा ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं कि उनका रुख क्या होगा. जबकि पार्टी के अंदर कुछ दिनों पहले उन्होंने यह पेशकश की थी कि लोहरदगा में दोस्ताना ही सही झामुमो को लड़ना चाहिए. लेकिन पार्टी ने उनसे कहा कि गठबंधन के खिलाफ नहीं जा सकते.

लोहरदगा की राजनित पर पैनी नजर रखने वाले स्थानीय पत्रकार संजय कुमार कहते हैं कि बेशक चमरा लिंडा पर सबकी नजरें टिकी है. अगर वे गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ गए, तो कांग्रेस के लिए पहले की तरह दिक्कत हो सकती है. गठबंधन के साथ कांग्रेस की उम्मीदें जगी है कि इस बार के चुनाव में कोई तीसरा कोण नहीं बनेगा. और बीजेपी की नजरें चमरा लिंडा के रुख पर टिकी है.

चमरा लिंडा बिशुनपुर से विधायक हैं. और बिशुनपुर में 2014 के चुनाव में बीजेपी के सुदर्शन भगत को सबसे ज्यादा वोट मिले थे.  

लोहरदगा में बीजेपी के जिला अध्यक्ष राजमोहन राम इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखते. वे कहते हैं वे तमाम समीकरण पीछे छूट गए हैं. बीजेपी के कार्यकर्ता दृढ़ निश्चय के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं. फिर सुदर्शन भगत सुलझे, सरल और सहज राजनेता हैं. इसका लाभ भी मिलेगा.  उन्हें सभी वर्गों में समर्थन मिलता रहा है. इसलिए कांग्रेस के किसी उम्मीदवार के आने या तीसरा- चौथा कोण से बीजेपी के लिए मुश्किलें नहीं हैं.

बंधु तिर्की

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में तीन- मांडर, गुमला, सिसई पर बीजेपी का कब्जा है. बिशुनपुर में जेएमएम और लोहदगा में कांग्रेस है. मांडर से पूर्व विधायक बंधु तिर्की इस बार कांग्रेस की खुलकर मदद करेंगे, इसे लेकर कोई शक नहीं दिखता. 2014 में हार के बाद से उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा है. और लगातर गांव- गांव जाते रहे हैं. लोहरदगा में सुखदेव भगत किसी हाल में कांग्रेस के वोट कम नहीं पड़ने देना चाहेंगे. गुमला में जेएमएम और कांग्रेस दोनों का प्रभाव है.

पत्रकार संजय कुमार कहते हैं कि वोटों का जो समीकरण हैं उस लिहाज से कोई तीसरा कोण नहीं बना, तो बीजेपी की राह बहुत कठिन हो जाएगी. इसलिए कि कांग्रेस के जितने दावेदार हैं वे दमदार भी हैं और इस इलाके में काफी पहले से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं.

कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम कहते हैं कि बीजेपी से यह सीट छीनना कांग्रेस की पहली प्राथमिकता है. इस बार गठबंधन को लेकर भी कोई संशय नहीं है. विपक्ष के सभी नेता एकजुट रहेंगे. 


(आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

लोकप्रिय

सीट शेयरिंग पर चिराग के तेवर, अगर कोई एलजेपी का अस्तित्व मिटाने की सोचेगा, तो संभव नहीं
सीट शेयरिंग पर चिराग के तेवर, अगर कोई एलजेपी का अस्तित्व मिटाने की सोचेगा, तो संभव नहीं
सुप्रीम कोर्ट का सिविल सेवा परीक्षा 2020 स्थगित करने से इंकार
सुप्रीम कोर्ट का सिविल सेवा परीक्षा 2020 स्थगित करने से इंकार
हाथरस गैंग रेप और पीड़िता की मौतः पीएम मोदी ने की मुख्यमंत्री से बात, योगी ने एसआईटी बैठाई
हाथरस गैंग रेप और पीड़िता की मौतः पीएम मोदी ने की मुख्यमंत्री से बात, योगी ने एसआईटी बैठाई
तारीखों में जानिएः अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित पूरा घटनाक्रम
तारीखों में जानिएः अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस से संबंधित पूरा घटनाक्रम
झारखंडः कोरोना से मौत का आंकड़ा 700, सबसे ज्यादा स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले जमशेदपुर में लोगों की जान गई
झारखंडः कोरोना से मौत का आंकड़ा 700, सबसे ज्यादा स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले जमशेदपुर में लोगों की जान गई
हाथरस गैंगरेपः अक्षय कुमार बोले, इतनी क्रूरता, दोषियों को फांसी पर लटका देना चाहिए
हाथरस गैंगरेपः अक्षय कुमार बोले, इतनी क्रूरता, दोषियों को फांसी पर लटका देना चाहिए
विपक्ष का एक ही काम, जाने-समझे बिना किसी भी मसले पर विरोध करो: पीएम मोदी
विपक्ष का एक ही काम, जाने-समझे बिना किसी भी मसले पर विरोध करो: पीएम मोदी
कृषि विधेयक किसानों के लिए मौत की सजा हैं: राहुल गांधी
कृषि विधेयक किसानों के लिए मौत की सजा हैं: राहुल गांधी
पप्पू यादव ने बनाया प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन, कहा, 30 साल के महापाप को खत्म करना है
पप्पू यादव ने बनाया प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन, कहा, 30 साल के महापाप को खत्म करना है
लवली आनंद ने राजद का दामन थामा, बोलीं, नीतीश सरकार ने धोखा दिया है
लवली आनंद ने राजद का दामन थामा, बोलीं, नीतीश सरकार ने धोखा दिया है

Stay Connected

Facebook Google twitter