कोल्हानः हक-हुकूक और सपनों के झारखंड के वास्ते पैदल नाप रहे 260 किमी रास्ते

कोल्हानः हक-हुकूक और सपनों के झारखंड के वास्ते पैदल नाप रहे 260 किमी रास्ते
Deepak Ranjit
पीबी ब्यूरो ,   Sep 15, 2019

ये हक-हुकूक की लड़ाई को धार देने की मुहिम है. हमारे पूर्वजों और लड़ाके साथियों ने बहुत कु्र्बानियां दी है. हमें उनके सपनों का झारखंड चाहिए, जहां झारखंडी विचारों और भावना के आधार पर शासन, सिस्टम काम करे. वृहद झारखंड की लड़ाई का यह आगाज भी है. हमारी आवाज का असर होगा. भले इसमें देर हो. युवाओं को गोलबंद करने और डटकर परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए ही यह यात्रा निकाली गई है. विरेंद्र कुमार जब यह बोल रहे होते हैं, तो कुछ युवा हवा में झंडे लहराते हैं, कुछ मुट्ठियां भींचे नारे लगाते हैं. डुगडुगी बजाई जाती है. 

झारखंड जनतांत्रिक महासभा के बैनर तले 14 सितंबर को निकली 'झारखंड नवनिर्माण यात्रा' आज 15 सितंबर को साकची के रास्ते बिरसानगर पहुंच रही है. यहां पहुंचने पर साथ ही बिरसा मुंडा की प्रतिमा के सामने जनसभा होगी.

इससे पहले शनिवार को घाटशिला से यह यात्रा निकली है. घाटशिला के बाद तिलकामांझी चौक, डिमना, अंबेडकर चौक बेलटाड के रास्ते युवाओं की टोलियां बोड़ाम पहुंची. बोड़ाम में ही लोगों ने रात्रि विश्राम किया. आज सुबह यह यात्रा बोड़ाम से रघुनाथपुर पहुंची है. यहां से इचागढ़, चौका, चांडिल, सोनारी होते हुए बिरसानगर पहुंचेगी. यानी 260 किलोमीटर की दूरी पूरी होगी. 

इस यात्रा में जगह- जगह लोग शामिल होते जा रहे हैं. यात्रा के दौरान चौक-चौराहों में शहीदों की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया जा रहा है. जबकि गांवों-घरों से निकलकर लोग यात्रा में शामिल लोगों को माला पहनाकर स्वागत किया जा रहा है. 

जबकि यात्रा की अगुवाई मुख्य रूप से सुनील हेंब्रम, विरेंद्र कुमार, दीपक रंजीत, कृष्णा लोहार, मदन मोहन सोरेन, संजय कर्मकार, अंकुर महतो, चंदन महतो, प्रकाश महतो विष्णु गोप कर रहे हैं. 

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महासभा के अगुवा दीपक रंजीत कहते हैं, ''झारखंड का इतिहास प्रतिरोध, संघर्ष और आंदोलन का रहा है. आजादी के पहले से और बाद में भी लगातार हम लड़ रहे हैं. आज जब हमारे अस्तित्व पर चौतरफा हमला हो रहा है. हमें एकजुट हो कर प्रतिरोध करना होगा. इस यात्रा के जरिए हम झारखंड के नवनिर्माण में युवाओं की भूमिका को सामने लाना चाहते हैं. उन्हें जगाते हुए गोलबंद करना चाहते हैं.''

सुनील हेंब्रम बताते हैं कि इस यात्रा का मकसद झारखंड के असली और जमीनी मुद्दों को जिंदा रखना और उस पर संघर्ष को आगे बढ़ाना है. मौजूदा झारखंड हमारे सपनों का झारखंड नहीं है.

यहां झारखंडी हित के कानूनों को बदला जा रहा है और लूट केंद्रित नीतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है. आधा झारखंडी झारखंड से बाहर हैं. झारखंड एकता को कायम करना है और संपूर्ण झारखंड को लेना है. संपूर्ण झारखंड में झारखंडियों का सर्वांगीण विकास संभव है. 

मदन मोहन सोरेन कहते हैं कि सुनियोजित तरीके से झारखंड के असली मुद्दों से लोगों को भटकाया जा रहा है. सत्तारूढ़ पार्टियां झारखंड के लोगों की भावना के विपरीत अपना एजेंडा सेट कर रही है. चुनावी सियासत में वही एजेंडे पर जोर दिए जाते हैं. गांव और ग्राम सभा तथा लोगों के हक अधिकार पर बातें नहीं की जाती. इसी हक-अधिकार की लड़ाई के लिए युवाओं को जगाने में हम सभी जुटे हैं. हमें पता है कि सत्ता और सिस्टम के सामने आवाजें उठाना मामूली नहीं, लेकिन उम्मीदें कायम हैं कि हम झारखंड नवनिर्माण के संघर्ष को आगे बढ़ा सकेंगे. 


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