खूंटी का एक गांवः अपने दम पर बनाया अनाज बैंक, मकसद- कोराना संकट में किसी का चूल्हा नहीं बुझे

खूंटी का एक गांवः अपने दम पर बनाया अनाज बैंक, मकसद- कोराना संकट में किसी का चूल्हा नहीं बुझे
पीबी ब्यूरो ,   Apr 30, 2020

झारखंड में खूंटी जिले के एक गांव गानालोया ने अपने दम पर अनाज बैंक बनाया है. मकसद बिल्कुल साफ है- कोरेना संकट के बीच लॉकडाउन से उपजे असाधारण स्थिति के बीच किसी घर का चूल्हा नहीं बुझे. और न ही कोई भूखा सोए. 

गांव के हीरालाल महतो बताते हैं कि गांव में सरकारी इंतजाम से ग्रामीणों को राशन मिल रहा है, लेकिन बहुत घरों में मुश्किलें कायम हैं. 

हालात को देखते हुए सामाजिक संस्था सेवा वेलफेयर सोसाइटी ने यह पहल की. और फिर देखते ही देखते अनाज बैंक तैयार हो गया. गांव के ही लोग इस बैंक में अपनी हैसियत के अनुसार अनाज दान कर रहे हैं, जिसे जरूरमंदों के बीच बांटा जा रहा है. 

हीरालाल महतो ने खुद 4 क्विंटल चावल और हीरालाल राम महतो ने 80 किलो चावल बैंक में दान किया है. जगदीश महतो ने 100 किलो अनाज देने का आश्वासन दिया है. गांव के 
मंदिर परिसर में अनाज बैंक रखा गया है. बाकायदा हिसाब भी पुख्ता रखा जा रहा है. मसलन किसने क्या दिए और किसे मदद की गई. 

लगभग 350 परिवार वाले इस गांव में लगभग 35-40 घरों को सरकारी सुविधाओं के बावजूद लॉक डाउन के दौरान खाने-पीने को दिक्कतें आ रही थी.

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गांव के लोगों ने इसके सामाधान के लिए सेवा वेलफेयर सोसाईटी से संपर्क किया. तब सोसाईटी के लोगों ने गांव के कुछ लोगों से इस बाबत बातचीत की और गांव वालों से ही सहयोग मांगा.

पहले चरण में 57 लोगों ने अन्न दान किया, लेकिन जरूरतें ज्यादा थी. गांव वालों ने तय किया कि इस अभियान को रूकने नहीं देना है. गांव की शांति समिति के अध्यक्ष देवेंद्र महतो, ग्रामपंचायत सदस्य रोशन लाल गंझू, आदित्य गंझू, मुखहंस कुमार, तुलसी गंझू, पुरेंद्र हजाम, सुशील सोय,अघनु महतो ने मिलकर 56 घरों ले पांच-पांच किग्रा अनाज संग्रह किया. 

इस अभियान में जुटे ग्रामीणों के मना करने के बाद भी मजदूर अजय शर्मा ने पांच किलो अनाज दान किया. 

सोसाईटी के सुशील सोय का कहना है कि ऐसा करने के पीछे का उद्देश्य है कि कोविड-19 के इस महामारी में सामुदायिक सहभागिता के बल पर लड़ने के लिए गांव के लोगों को जागरूक किया जा सके. इससे गांव में कोई भूखा नहीं रहेगा. इसके साथ आपसी प्रेम के साथ् सामाजिक समरसता बढ़ेगी. 

देवा हस्सा बताते हैं कि अब यह अभियान कई गांवों में शुरू होने जा रहा है. मकसद सिर्फ एक है- संकट की इस घड़ी में कोई भूखा नहीं रहे.  और सामुदायिक भागीदारी बढ़े. 


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