कांग्रेस के गलियारे में जेवीएम के प्रदीप और बंधु,मंत्रिमंडल विस्तार में पेंच, मुश्किलें छिपाते हेमंत

कांग्रेस के गलियारे में जेवीएम के प्रदीप और बंधु,मंत्रिमंडल विस्तार में पेंच, मुश्किलें छिपाते हेमंत
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चित्रांश ,   Jan 24, 2020

क्या हेमंत सोरेन कांग्रेस के दबाव में हैं. क्या मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस की दावेदारी से हेमंत मुश्किलें छिपा रहे हैं. क्या शुक्रवार को मंत्रिमंडल विस्तार की प्रस्तावित तारीख को कांग्रेस के इशारे पर ही टाला गया.

सवाल और भी हैं. इन सवालों का सीधा जवाब जेएमएम या कांग्रेस से नहीं मिल रहा है. एक बात जरूर कही जा रही है कि जल्दी ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और सब कुछ ठीक है. कोई जिच नहीं है. लेकिन कड़वा सच है कि सत्ता पक्ष की सियासत नए मोड़ पर है.

 बहमुत के लिए पूर्ण और मजबूत आंकड़ा रहने के बाद भी झारखंड में हेमंत सोरेन कैबिनेट का विस्तार 27 दिनों से लटका है. इस पर यूं ही नहीं पर्दा डाला जा सकता. 

हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर को झारखंड में सत्ता की बागडोर संभाली है. उनके साथ कांग्रेस के दो- रामेश्वर उरांव और आलमगीर आलम और राजद कोटा से एक- सत्यानंद भोक्ता मंत्री ने शपथ ली है. 

मंत्रिमंडल में अधिकतम 11 मंत्री शामिल हो सकते हैं. राजद ने एक सीट पर ही चुनाव जीता है. उसे सरकार में हिस्सेदारी मिल गई है.

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गुरुवार की सुबह हेमंत सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात कर शुक्रवार को मंत्रिमंडल विस्तार के लिए समय मांगा था.

इसके बाद ने चाईबासा नरसंहार के पीड़त परिवारों से मिलने चले गए. वहां से लौटने पर फिर राज्यपाल से मिले और मंत्रिमंडल विस्तार के लिए तारीख टालने का आग्रह किया. 

उन्होंने मीडिया से कहा, ''चाईबासा की घटना से मन आहत है. हमारे लोग ही मारे गए हैं. मानवता नहीं कहता कि शपथ ग्रहण का आयोजन हो. राज्यपाल को भी पूरी घटना की जानकारी दी है. शुक्रवार को दिन एक बजे मंत्रिमंडल का विस्तार होना था, लेकिन तिथि टालने को कहा है''. 

बीजेपी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इस पर तंज कसा है. उन्होंने कहा, ''सुबह में राज्यपाल से मिलने वक्त हेमंत सोरेन का मन आहत नहीं था. चाईबासा की घटना तो तीन दिनों से सुर्खियों में है. लेकिन गांव से लौटने के बाद मुख्यमंत्री का मन आहत हो गया. बेशक, कांग्रेस के दबाव में गुजर रहे हैं''. 

समीकरण और समय 

सियासत में समीकरण, वक्त, परिस्थितियां, सब्र, दांव- पेंच के मायने होते हैं. इसकी तफ्सील से चर्चा से पहले गौर कीजिए समय और समीकरण पर.

इधर मंत्रिमंडल विस्तार का समय और तैयारियां तय हो रही थी. उधर दिल्ली में जेवीएम के विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात हो रही थी. 

गुंजाइश पूरी हो कि कांग्रेस ने नए समीकरणों पर नजर डालते हुए मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख बढ़ाने को कहा हो. जाहिर है हेमंत मुश्किलों को छिपा रहे हैं. 

इससे पहले जेवीएम के दोनों विधायक पहले झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह और महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर बातचीत की. इसके बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी से उनकी मुलाकात कराई गई. 

जेएमएम और कांग्रेस इससे वाकिफ है कि झारखंड में मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर कांग्रेस की हिस्सेदारी तय करने के लिए आरपीएन सिंह और केसी वेणुगोपाल को ही अहम जिम्मेदारी दी गई है.

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कांग्रेस के अधिकतर विधायक इन दोनों नेताओं से मंत्री बनाने की गुजारिश भी कर चुके हैं.

इस मुलाकात के बाद कांग्रेस- जेवीएम के अंदरखाने से जो खबरें छन कर निकल रही हैं, उस मुताबिक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की बहुत जल्दी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. इसकी पृष्ठभूमि लगभग तैयार कर ली गई है.

जेवीएम में विधायकों की संख्या तीन है. लिहाजा दो तिहाई विधायकों के टूटने से दसवीं अनुसूचि की बाध्यता से भी दोनों बचते रहेंगे. 

जेवीएम के बीजेपी में विलय की संभावनाओं और अटकलों के बीच दो दिन पहले, 21 जनवरी को विधायक बंधु तिर्की को पार्टी से निकाल दिया गया है. लिहाजा इस मुलाकात के मायने निकाले जाने लगे हैं.

हालांकि प्रदीप यादव इस मुलाकात को लेकर कहते हैं, ''मिलना- जुलना लगा रहता है. हमारी पार्टी ने हेमंत सोरेन और कांग्रेस की सरकार को समर्थन दिया है. इससे पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर ही चुनाव लड़े थे. विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हेमंत सोरेन से मुलाकात और बात होती रही है, लेकिन कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हुई थी. झारखंड की मौजूदा राजनीति और सरकार आगे क्या करे इस पर बातचीत हुई है.'' 

बनाया जा सकता है मंत्री

प्रदीप यादव और बंधु तिर्की दोनों का कद बड़ा रहा है. सरकार में पहले मंत्री रहे हैं. कांग्रेस में शामिल होने से पहले दोनों अपनी जिम्मेदारी भी तय कराना चाहेंगे.

उधर कांग्रेस को इसका भी गुमान हो सकता है कि इन दोनों विधायकों के आने से झारखंड में उसके विधायकों की संख्या 18 हो जाएगी. साथ ही प्रदीप यादव और बंधु तिर्की दोनों हेवी वेट हैं. इलिए सरकार में जेएमएम को भी साधने में सहुलियत होगी. 

कांग्रेस जेएमएम को यह अहसास करा रही है कि स्पीकर का पद भी उनके हिस्से में गया है. गौरतलब है कि नाला से जेएमएम के विधायक रवींद्र नाथ महतो झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष बने हैं. 

कांग्रेस- जेवीएम के अंदरखाने से मिलती खबरों के मुताबिक मंत्रिमंडल में प्रदीप यादव को शामिल भी कराया जा सकता है. जबकि बंधु को संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है. 

इससे पहले बुधवार को दिल्ली से हेमंत सोरेन लौटे थे, तो उन्होंने जल्दी ही मंत्रिमंडल विस्तार का संकेत दिया था.

अंदरखाने इसकी चर्चा साफ है कि दिल्ली दौरे के दौरान हिस्सेदारी पर उन्होंने कांग्रेस को बता दिया था कि कांग्रेस से चार लोगों को ही मंत्री बनाया जा सकता है.

इससे पहले 16 जनवरी को दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं के साथ हेमंत सोरेन की हिस्सेदारी और दावेदारी बातचीत हुई. 

खबरों के मुताबिक कांग्रेस ने कई भारी भरकम विभागों पर भी दावेदारी कर रखी है. इसे भी हद तक सुलझा लिया गया है. लेकिन प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के कांग्रेस के गलियारे में आने से अचानक सीन बदला है. 

हेमंत सोरेन के लिए मुश्किलें यह है कि अगर कांग्रेस को मंत्रिमंडल में पांच जगह दी गई, तो जेएमएम के विधायकों को साधना आसान नहीं होगा.

दरअसल हेमंत के अलावा जेएमएममें 28 विधायक हैं. इनमें दर्जन भर दिग्गज हैं. और सभी का जोर मंत्री बनाने पर है. 

जेएमएम सबसे बड़ा दल के तौर पर उभरा है. और जनता की आकांक्षाओं के अनरूप सरकार चलाने की बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती भी हेमंत सोरेन पर है. लेकिन कांग्रेस को लग रहा है कि सरकार में बड़ी और अहम भागीदारी से उसका कद और वजन उभरेगा. कांग्रेस की वजह से बीजेपी जब-तब निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहेगी. 

इसलिए कि कांग्रेस को एक्सपोज करने का मतलब शीर्ष स्तर पर तस्वीर बिगाड़ने जैसा होगा. 

पिछले दिनों ये खबरें सतह पर आई थी कि दिल्ली में हेमंत सोरेन से मिलकर कांग्रेस के कई विधायक मंत्रिमंडल में शामिल कराए जाने की तरफदारी की, तो वे परेशान हो गए.

इस बीच जेवीएम ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. प्रदीप यादव को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया है. हालांकि इससे सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता. 

लेकिन प्रदीप यादव और बंधु तिर्की कांग्रेस में शामिल कब होते हैं और इन दोनों को लेकर कांग्रेस कौन सी चाल चलती है. या प्रत्यक्ष- परोक्ष दबाव बनाती है. यह देखा जाना बाकी है. 

इन हालात के बीच मंत्रिमंडल विस्तार नहीं होने को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस को निशाने पर ले लिया है. आज ही बेजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह ने रांची में प्रेस कांफ्रेस करके कहा कि कांग्रेस समर्थन के बदले पूरे दाम वसूल कर रहेगी. फिर समर्थन भी वापस लेगी. 


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