जेएमएम ने प्रेस परिषद को भेजा पत्र, झारखंड में पत्रकारों को सरकार के प्रलोभन में आने से रोकें

जेएमएम ने प्रेस परिषद को भेजा पत्र, झारखंड में पत्रकारों को सरकार के प्रलोभन में आने से रोकें
पीबी ब्यूरो ,   Sep 21, 2019

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भारतीय प्रेस परिषद को एक पत्र भेजकर झारखंड में पत्रकारों को सरकार के प्रलोभन में आने से रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी दफ्तर में एक प्रेस कांफ्रेस में सरकार के उन विज्ञापनों पर सवाल उठाया, जिसमें रघुवर दास सरकार ने अपनी योजनाओं के बारे में लेख लिखने के लिए पत्रकारों को 15 हजार रुपए देने का फैसला लिया है. 

सुप्रियो भट्टचार्य ने बताया है कि भारतीय प्रेस परिषद से आग्रह किया गया है कि इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए पत्रकारों को सरकार के प्रलोभन में नहीं आने की सलाह दें, ताकि लोकतंत्र में चौथे स्तंभ की विश्वसनीयता और प्रामणिकता स्थापित रहे. 

जेएमएम नेता ने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद द्वारा 2009 के आम चुनाव के पूर्व पेड न्यूज से संबधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे, जिसके तहत इस तरह के समाचारों पर पूर्णतः रोक लगाने के प्रावधान हैं. साथ ही संबंधित समाचार पत्रों के प्रकाशकों, संपादकों से अपेक्षित भी. 

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जेएमएम ने भारतीय प्रेस परिषद को झारखंड सरकार के जनसूचना संपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञापनों और पत्र की प्रतियां भी भेजी है. साथ ही बताया है कि अगले दो महीने में राज्य में विधानसभा चुनाव है. इस स्थिति में सरकार की योजनाओं का व्याख्यान करना या प्रशंसा स्वरूप आलेख प्रस्तुत करना कहां तक तर्क और न्याय संगत है. 

जेएमएम के नेता ने पत्रकारों से आग्रह किया है कि वे जनता के हितों में सरकार की खामियां और योजनाओं में गड़बड़ियां प्रकाशित करने पर ध्यान दें, ताकि पत्रकारिता पर लोगों का विश्वास बना रहे और लोकतंत्र के चौथे खंभे की अहमियत भी बरकरार रहे.  

गौरतलब है कि सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग ने हाल ही में जारी एक विज्ञापन में बताया है कि विभाग की गठित समिति कुल 30 पत्रकारों का चयन करेगी. चयनित पत्रकारों को पैसा तब मिलेगा, जब वो चुने गए विषयों पर लेख को अपने अखबार या दूसरे किसी संस्थान में छपवाने के बाद आलेख के कतरन को सरकार के संबंधित विभाग में जमा कराएंगे.

टीवी चैनलों के पत्रकारों के लिए भी इसी तरह के निर्देश हैं. उन्हें सरकार की योजनाओं से जुड़ी खबरें तैयार कर प्रसारण का डीवीडी जमा करना होगा. 

सरकारी विज्ञापन में कहा गया है कि अपना विषय बताने वाले 30 पत्रकारों का चयन करने के बाद यह कमेटी उन्हें संबंधित विषयों पर लिखने के लिए एक महीने का समय देगी.

इस दौरान इन्हें अपना लेख अख़बार या किसी और जगह छपवाना होगा. इसके बाद इन पत्रकारों को प्रति आलेख 15 हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा. 

इसके अलावा 25 लेखों को जनसंपर्क विभाग की विमोचित पुस्तिका में छापा जाएगा. इसमें जिन पत्रकारों के आलेख शामिल होंगे, उन्हें अलग से 5-5 हजार रुपए और (सम्मान राशि के बतौर) दिए जाएंगे.

गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले और तैयारियों की कई न्यूज वेबसाइट में खबरें प्रकाशित की गई हैं. साथ ही सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए गए हैं. इसके अलावा सोशल साइट पर भी आलोचना और प्रतिक्रिया का दौर जारी है. 

इस बीच सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने एक शुद्धि पत्र जारी किया है. इसके तहत इस शोध और अन्वेषण कार्यक्रम के तहत आमंत्रित आवेदन की तिथि 16 सितंबर से बढ़ाकर 26 सितंबर कर दी गई है.

इससे पहले भी जेएमएम ने अपने कुछ विधायकों के बीजेपी में जाने की अटकलों से जुड़ी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया था कि बीजेपी के इशारे पर पेड न्यूज के तहत खबरें प्लांट की जा रही हैं.

अलबत्ता हेमंत सोरेन हाल के दिनों में कई ट्वीट करके खबरों के चयन, विश्वसनीयता और पक्ष को लेकर तल्ख टिप्पणी कर चुके हैं. कई मौके पर वे अखबारों में छपी खबरें भी साझा करके सवाल खड़ा करते हैं. 

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