झारखंडः आदिवासी 'लेडी टार्जन' को पद्म श्री, झूम रहे जंगल-पहाड़ और गांव-जवार

झारखंडः आदिवासी 'लेडी टार्जन' को पद्म श्री, झूम रहे जंगल-पहाड़ और गांव-जवार
Facebook- Jamuna Tudu
पीबी ब्यूरो ,   Jan 26, 2019

लेडी टार्जन के नाम से मशहूर जमुना टुडू. जंगलों से अथाह मोहब्बत करने वाली आदिवासी महिला. उनकी झोली में एक और पुरस्कार. गणतंत्र दिवस के मौके पर सर्वोच्च पद्म पुरस्कार की घोषणा के साथ ही झूम रहे हैं वो जंगल- पहाड़, जिन्हें जमुना ने जान पर खेल कर बचाया-बढ़ाया है. 

अपनी पहली प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा है,"पहले भी कई पुरस्कार और सम्मान हासिल किए हैं, लेकिन इस सम्मान (पद्म श्री) से जिम्मेदारी कहीं ज्यादा हो गई है. जाहिर है बीस वर्षों की यह मुहिम नए मोड़ पर जाएगी. इस सम्मान को मैं जंगल- पठार, नदी- नाले और अपनी हजारों महिला सहयोगी नाम समर्पित करती हूं". 

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पहले अकेली फिर दस महिलाओं की टोली. जंगल बचाओ का मंत्र फूंकती इस आदिवासी महिला की मुहिम में अब 10 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं. पूर्वी सिंहभूम में उन्होंने चार सौ से अधिक वन सुरक्षा समति का गठन किया है. 

जाहिर है गांव- जवार और उनकी मुहिम में शामिल हजारों महिलाएं भी झूम रही हैं. जमुना दीदी को पद्म श्री जो मिला है. बधाईयों का तांता लगा है. जमुना सबका आभार प्रकट कर रही हैं. 

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने भी जमुना को मिले इस सम्मान के लिए उन्हें बधाई दी है. साथही उनके साहस को सलाम किया है. 

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जमुना की इस मुहिम और कामयाबी पर परमिला टुडू कहती हैं कि ये दीदी के दृढ़ संकल्पों का परिणाम है. उन्होंने महिलाओं को जागरूक किया है और समाज को भी जगाया है. आदिवासी समुदाय को उन पर गर्व है. उन्हें मिले इस सम्मान से नारियों का मान बढ़ा है. मजदूर की जिंदगी से यहां तक पहुंची जमुना टुडू पर सभी को गर्व है. 

झारखंड ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य रतन तिर्की ने जमुना टुडू को जोहार कहा है. साथ ही बधाई दी है. 

गौरतलब है कि वन संरक्षण के उनके संकल्प को कई मौके पर ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा. वन माफिया की नजरों में वे खटकती रहीं. जमुना टुडु को मौत की कई धमकियां भी मिली हैं, उनका घर तक लूट लिया गया और एक रेलवे स्टेशन के पास उन पर हमला भी हुआ था. पर वे घबराई नहीं. उनके पैर पीछे नहीं हटे. तीर धनुष और पांरपरिक हथियारों के साथ वो जंगलों में निकलने लगीं. बिल्कुल तन कर. 

उन्होंने यह उदाहरण पेश किया है कि गांव में किसी लड़की के जन्म पर गांव की महिला 18 पौधे लगाए जाएं और लड़की की शादी पर 10 पौधे लगाए जाएं.

इनजेंडर्ड डॉयलॉग वूमन चेंजिंग द वर्ल्ड समेत कई कार्यक्रमों में वे शिरकत कर चुकी हैं. 

जानें जमुना को 

वैसे जमुना किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. 38 साल की इस महिला का जन्म ओड़ीशा के रायरंगपुर स्थित रांगामटिया गांव में हुआ है. वो मैट्रिक तक पढ़ी हैं. 

1998 में उनकी शादी झारखंड के चाकुलिया स्थित मुटुरखाम (बेड़ाडीह टोला) के मानसिंह टुडू के साथ हुई. नैहर से ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण तता जंगलों को बचाने का मंत्र पढ़ा. सुसराल आने के बाद यह मंत्र मुहिम बन गया. 

जमुना के प्रयास से ही मुतुरखम और आसपास के जंगल हरे- भरे हैं. सामाजिक जागरूकता तथा रचनात्मक कार्यों में वे बढ़- चढ़ कर हिस्सा लेती हैं. गरीब- गुरबों, बेबस- लाचारो की मदद करना उन्हें अच्छा लगता है. शराब के खिलाफ भी उन्होंने कई दमदार अभियान चलाया है. 

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अवेकेंड इंडिया पुरस्कार, फिलिप्स ब्राभे नेसल अवार्ड, ऑल ग्रास रूट वूमेन ऑफ अवार्ड, स्त्री शक्ति अवार्ड, वीरांगना विशिष्ट सम्मान, झारखंड राज्य वन महोत्सव पुरस्कार के अलावा अन्य कई सम्मान उन्हें मिले हैं. भारत सरकार के महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा चयनित 100 वूमेन ऑफ इंडिया में भी जमुना शामिल रही हैं.  


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