झारखंडः सत्ता बचाने के लिए बीजेपी को 32-35 सीट जीतनी ही पड़ेगी

झारखंडः सत्ता बचाने के लिए बीजेपी को 32-35 सीट जीतनी ही पड़ेगी
पीबी ब्यूरो ,   Dec 21, 2019

झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आएंगे. बीस दिसंबर की शाम चुनाव संपन्न होने के साथ ही आए एग्जिट पोल में जीएमएम- कांग्रेस गठबंधन सरकार बनाने की ओर बढ़ता दिख रहा है. एग्जिट पोल से जेएमएम- कांग्रेस खेमे में उत्साह है. जबकि बीजेपी के माथे पर बल पड़े हैं.

अधिकतर सीटों में अगर-मगर और त्रिकोणीय संघर्ष की उभरी तस्वीर के बीच चुनाव बेहद तीखा हो चला है. और इन हालात में बीजेपो को सत्ता बचाने के लिए कम से कम 32-35 सीटों पर जीत निहायत जरूरत होगी.  

अगर 30 से कम सीटों पर बीजेपी की जीत होती है, तो सत्ता की राह उसके लिए बहुत कठिन हो सकती है. दरअसल बीजेपी के हिस्से 30 सीट से कम आने की स्थिति में जेएमएम गठबंधन को ज्यादा स्पेस मिलता दिखाई पड़ रहा है. 

हालांकि मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत बीजेपी के कई रणनीतिकारों ने कहा है कि बीजेपी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल होगी. एग्जिट पोल के बाद अनुमान और अटकलों को वे नकार भी रहे हैं.

लेकिन तमाम दावे के बीच भी वोटों के समीकरण और चुनाव के बाद छन कर बाहर आती हवाएं इसका संकेत दे रही है कि बीजेपी की मुश्किलें वाकई बढ़ी हुई है. 

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अगर जेएमएम- कांग्रेस- राजद गठबंधन 41 या उससे अधिक सीटें जीत लेता है, तो बीजेपी के लिए सत्ता में वापसी की गुंजाइश वैसे ही खत्म हो जाएगी. 

जेएमएम- कांग्रेस गठबंधन को इसका भरोसा है कि वाम और अन्य के खाते जो सीटें आएंगी उससे भी सरकार गठन में उसके लिए मदद होगा. 

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय कहते हैं कि बीजेपी के लिए कोई कहानी और जोड़-तोड़ की गुंजाइश नहीं बच रही है.

पांच चरणों में हुए चुनाव का रूझान और समर्थन बीजेपी और सरकार में सहयोगी रही आजसू के खिलाफ गया है. जेएमएम के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है. गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलेगा. संताल में इस बार हम बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं. 

इधर बीजेपी के रणनीतिकारों ने पत्ते नहीं खोले हैं कि बहुमत से कम सीटें लाने पर वह कौन सा रुख अख्तियार करेगी, लेकिन अंदरखाने बीजेपी की नजरें आजसू और जेवीएम पर जा टिकी है.

लेकिन आजसू अथवा जेवीएम या फिर दोनों के समर्थन के बाद भी बीजेपी को 32-34 सीट लाना ही पड़ेगा. 

2014 में कैसे बनी सरकार

2014 के चुनाव में बीजेपी ने 37 सीटें जीती थी. उसकी सहयोगी आजसू को पांच सीटें मिली थी. चुनाव परिणाम के कुछ ही दिन बाद जेवीएम से चुनाव जीते छह विधायक बीजीपी में शामिल हो गए थे.

यानी बीजेपी की सरकार को 48 विधायकों का समर्थन था. इधर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के दो, जेएमएम के एक समेत पांच विधायक बीजेपी में शामिल हुए और ये पांचों को चुनाव लड़ाया गया. 

पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ी आजसू इस बार अकेले चुनाव लड़ी है और एग्जिट पोल में उसे तीन से पांच सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है.

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लोकसभा चुनाव में जेएमएम-कांग्रेस- राजद गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा ने भी अकेले चुनाव लड़ा है.

एग्जिट पोल में जेवीएम का प्रदर्शन भी अच्छा होता नहीं दिख रहा है. हालांकि एग्जिट पोल से आजसू और जेवीएम दोनों दल इत्तेफाक नहीं रखते. 

पांचवें चरण के चुनाव संपन्न होने के साथ ही आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि पार्टी मजबूत धुरी बनकर उभरेगी. और जो परिणाम आएगा, वह राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदलेगा.

किसी दल को समर्थन देने या सरकार गठन के सवाल पर उनका स्प्ष्ट कहना है कि नतीजे का इंतजार करना चाहिए. आजसू पार्टी जिन विचारों और संकल्पों के साथ चुनाव में गई है उसे कायम रखेंगे. 

क्यों जरूरी है बीजेपी के लिए

सवाल पूछा जा सकता है कि अगर पूर्ण बहुमत बीजेपी को नहीं मिला, तो सत्ता बचाने के लिए कम से कम 32-34 सीटें जीतना क्यों जरूरी है. दरअसल, इससे ज्यादा फिसलने पर आजसू का साथ भी बीजेपी के काम नहीं आएगा.

तब बीजेपी को जेवीएम की ओर भी हाथ बढ़ाना होगा. उधर जेएमएम गठबंधन को बहुमत छूने में मामूली परेशानी हुई, तो वह भी जेवीएम को पुरानी दोस्ती का हवाला देगा. तब जेवीएम का रुख भी बेहद दिलचस्प हो सकता है. 

जाहिर है बीजेपी के साथ ही अब आजसू को कितनी सीटें मिलती हैं, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. वैसे चुनाव में बीजेपी-आजसू के बीच की दूरियां नतीजे आने के साथ ही खत्म होगी, इसकी संभावना प्रबल है. इसलिए कि दोनों दल लंबे समय तक साथ चले हैं. गठबंधन में आजसू के लिए फिलहाल कोई स्पेस भी नहीं है. 

लेकिन बीजेपी के 30--32 सीटें लाने पर आजसू के लिए 8-10 पर जीत जरूरी होगी.

वैसे बीजेपी-आजसू दोनों खेमे को फिलहाल यह यकीन नहीं हो रहा कि जेएमएम कोई करिश्माई आंकड़े को पार कर सकेगा. लेकिन उन्हें इसका भी डर है कि कांग्रेस- राजद का प्रदर्शन जेएमएम को मजबूत बना सकता है. 

इधर एग्जिट पोल में अन्य के हिस्से जितनी सीटें जाने का अनुमान लगाया जा रहा है वह बहुत मुमकिन नहीं लगता. अन्य के हिस्से दो सीट जाने की तस्वीर दिख रही है. 

लेकिन अंकगणित के लिहाज से वो दो भी बेहद महत्पूर्ण साबित होंगे.

वाम के भी कम से कम दो सीट पर जीत होने की तस्वीर उभर रही है. जाहिर है क्रूशियल स्थित आने पर वो जेएमएम को ही सरकार बनाने में समर्थन कर सकते हैं.  


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