झारखंडः सरना धर्म कोड की मांग पर नए सिरे से गोलबंद होते आदिवासी, आंदोलन को अस्तित्व से जोड़ा

झारखंडः सरना धर्म कोड की मांग पर नए सिरे से गोलबंद होते आदिवासी, आंदोलन को अस्तित्व से जोड़ा
पीबी ब्यूरो ,   Oct 20, 2020

जनगणना में अलग सरना धर्म कोड की मांग झारखंड के छोटानागपुर इलाके में नए सिरे से जोर पकड़ती डजा रही है. आदिवासियों की यह मांग लंबे समय से रही है.

जाहिर है यह आंदोलन की शक्ल ले रहा है. औरयह आंदोलन किस मोड़ पर जाकर थमेगा, इसे देखा जाना है,. दरअसल आदिवासी संगठनों का दावा है कि अबकी आरपार की लड़ाई है. 

इस मांग के समर्थन में रैली, जुलूस, धरना, प्रदर्शन और बैठकों का दौर चल रहा है और शहर से लेकर गांव तक आदिवासी नए सिरे से गोलबंद रहे हैं.

इसी सिलसिले में आज विभिन्न आदिवासी संगठनों से जुड़े लोगों ने राजधानी रांची समेत आसपास के इलाकों में सड़कों पर प्रदर्शन किया. मानव श्रृखंला बनाई और राज्य से लेकर केंद्र सरकार पर जोर डाला कि 2021 की जनगणना शुरू होने से पहले आदिवासियों के लिए कॉलम निर्धारित किए जाएं, ताकि गिनती होने के उनकी अस्तित्व की पहचान रहे.

इसे भी पढ़ें: 43 केंद्रीय मंत्रालयों से भेजे पैसे हेमंत सरकार खर्च नहीं कर रहीः अर्जुन मुंडा

उलगुलान होगा

इस बीच अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की अध्यक्ष पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव के नेतृत्व में राजधानी में मानव श्रृंखला बनाई गई. दोपहर में गीताश्री उरांव के नेतृत्व में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलकर ज्ञापन सौंपा.  

गीताश्री उरांव ने कहा कि यह झारखंड सहित पूरे देश में निवास करने वाले 12 करोड़ आदिवासियो के अस्तित्व का सवाल है. हम धर्मांतरण नहीं चाहते हैं न हम हिंदू बनना चाहते और न ही इसाई. इसलिए सरकार आदिवासियों की अलग पहचान प्रदान करे नहीं तो अब से उलगुलान होगा.

रांची के अलावा दूसरे आदिवासी बहुल जिलों- गुमला, लोहरदगा में भी आदिवासियों ने झंडे- बैनर के साथ जुलूस निकाला धना दिया और मांग के समर्थन में नारेबाजी की.  

रांची स्थित मोरहाबादी मैदान में सरना धर्म गुरु बंधन तिग्गा, आदिवासियों के प्रतिनिधि डॉक्टर करमा उरांव, आदिवासी सेना अध्यक्ष के शिवा कच्छप ने कहा कि अब जनगणना में अधिक समय नहीं रह गया है.

उन्होंने धर्मकोड नहीं तो वोट नहीं का एलान करते हुए कहा कि शीत सत्र के दौरान राज्य में विधानसभा घेराव और दिल्ली में संसद मार्च किया जाएगा.

शिवा कच्छप कहते हैं कि इस बार आर- पार की लड़ाई है. सालों से आदिवासी समुदाय आवाज मुखर करता रहा है. लेकिन अब बात अस्तित्व पर आन पड़ी है. 

केंद्रीय सरना समिति के फूलचंद तिर्की का कहना है कि पूरे देश में आदिवासियों की आबादी 11 करोड़ से ज्यादा है. फिर क्यों न हमारी गिनती अलग से हो. जबकि जैनियों और बौध की संख्या एक करोड़ से कम है, तो जनगणना कॉलम में उनका धर्म कोड शामिल है. 

हम अपना हक मांग रहे हैं, दूसरे धर्मों की तरह आदिवासियों के लिए जनगणना में धर्म कोड शामिल किया जाए. 

केंद्रीय सरना समिति के महासचिव संजय तिर्की ने 2021 की जनगणना में यदि सरना कोड लागू नहीं होता है, आदिवासी समुदाय इसमें भाग नहीं लेंगे. 

इसे भी पढ़ें: हेमंत सरकार को अब न बेरोजगारों की याद है और न ही युवा आक्रोश से उन्हें कोई फर्क पड़ताः सीता सोरेन

उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासियों का अस्तित्व खत्म करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है.

आदिवासी प्रार्थना सभा के संयोजक लक्ष्मीनारायण मुंडा कहते हैं, ''आदिवासियों की ये मांग पुरानी है और इसमें दम है. उनकी जनगणना अलग से होनी चाहिए. यह उनके अस्तित्व से जुड़ा सवाल है. आदिवासियों के जन्म, मृत्यु, विवाह, पर्व-त्योहार के रिति-रिवाज अलग हैं. हमारा पारंपरिक इतिहास है.सरना आदिवासी नहीं चाहते कि हिंदुओ या अन्य धर्म के कॉलम मं उन्हें शामिल किया जाए. "

गुस्से में संगठन

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा क मानसून सत्र में इस बाबत राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव मंजूर कर केंद्र को भेजे जाने के लिए भी आवाजें उठाई गई थी. लेकिन प्रस्ताव पारित नहीं होने से आदिवासी संगठन गुस्से में हैं. 

फूलचंद तिर्की ने हेमंत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने सरना कोड को लेकर प्रस्ताव मानसून सत्र में पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की घोषणा की थी, लेकिन विधानसभा में किसी मंत्री ने सरना कोड के बारे में मुंह तक नहीं खोला. 

उन्होंने कहा कि आदिवासी अपने हक और अधिकार के लिए जागरूक हो चुके हैं. आदिवासी अपने अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे. 

उधर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ बिरसा उरांव की अगुवाई में बूटी मोड़ स्थित शिवाजी चौक पर मानव श्रृंखला बनायी गई. 

डॉ बिरसा उरांव ने कहा है कि आदिवासियों की पहचान आदिवासी धर्म कोड से बनेगी. उन्होंने कहा कि भारत की जनगणना में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी आदि धर्मों का उल्लेख रहता है. इसी प्रकार आदिवासियों के लिए भी अलग से जनगणना में कॉलम रहे. उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि जब तक आदिवासी धर्म कोड नहीं मिल जाता, जनगणना नहीं करवायी जाए.

इसी मांग पर केंद्रीय सरना समिति समेत आदिवासी संगठनों ने पिछले 15 अक्तूबर को रांची समेत पूरे राज्य में चक्का जाम आंदोलन चलाया था.  

मुख्यमंत्री से मिले आदिवासी प्रतिनिधि

इस बीच दोपहर बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बुलावे पर सरना धर्म गुरू बंधन तिग्गा, डॉक्टर करमा उरांव, शिवा कच्छप, नारायण उरांव, निर्मल पाहन रवि तिग्गा आदि मुख्यमंत्री से प्रोजेक्ट भवन में मिले.

आदिवासी नेताओं ने मुख्यमंत्री से मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम और समुदाय की भवना से सीएम को अवगत कराया. साथ ही कहा कि चार दशकों से यह मांग की जाती रही है.

लिहाजा  जल्द विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाए.

मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उचित कार्रवाई करेगी. 

सरना आदिवासी समुदाय का जोर इस बात पर भी रहा है कि इनका इतिहास काफी पुराना है. और वे हिंदू नहीं हैं. वे प्रकृति के पुजारी हैं. उनका अपना धर्म है 'सरना'.

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में से 28 सीटें और 14 लोकसभा में चार सीटें आदिवासियों के लिए सुरक्षित हैं और आदिवासी इलाक़ों के लिए अलग से ट्राइबल एडवाइज़री काउंसिल भी है.

 


(आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

लोकप्रिय

 राबड़ी देवी का नीतीश पर पलटवार, 'लालू जी ने राजनीतिक जीवनदान दिया, उनका शुक्रगुजार रहें'
राबड़ी देवी का नीतीश पर पलटवार, 'लालू जी ने राजनीतिक जीवनदान दिया, उनका शुक्रगुजार रहें'
बिहार विधानसभा में तेजस्वी के आरोपों पर बिफर पड़े सीएम नीतीश कुमार
बिहार विधानसभा में तेजस्वी के आरोपों पर बिफर पड़े सीएम नीतीश कुमार
गढ़वाः रिश्वतखोरी में मुखिया गिरफ्तार, बिना पैसा लिए योजना देने को तैयार नहीं थे
गढ़वाः रिश्वतखोरी में मुखिया गिरफ्तार, बिना पैसा लिए योजना देने को तैयार नहीं थे
 कंगना की जीत, बंगला ढहाने के मामले में हाई कोर्ट ने रद्द किया बीएमसी का आदेश
कंगना की जीत, बंगला ढहाने के मामले में हाई कोर्ट ने रद्द किया बीएमसी का आदेश
महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी कथित तौर पर नजरबंद
महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी कथित तौर पर नजरबंद
लालू के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर, जेल में रहकर फोन इस्तेमाल का आरोप
लालू के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर, जेल में रहकर फोन इस्तेमाल का आरोप
सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव पर हेमंत सरकार इतनी मेहरबान क्यों, कोर्ट संज्ञान लेः बाबूलाल मरांडी
सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव पर हेमंत सरकार इतनी मेहरबान क्यों, कोर्ट संज्ञान लेः बाबूलाल मरांडी
बीजेपी विधायक विजय सिन्हा बिहार विधानसभा के स्पीकर चुने गए, गठबंधन का जोर काम नहीं आया
बीजेपी विधायक विजय सिन्हा बिहार विधानसभा के स्पीकर चुने गए, गठबंधन का जोर काम नहीं आया
कांग्रेस के कद्दावर नेता अहमद पटेल का निधन
कांग्रेस के कद्दावर नेता अहमद पटेल का निधन
 ट्वीट कर सुशील मोदी ने बताया, किस नंबर से लालू जेल से फोन पर एनडीए विधायकों को प्रलोभन दे रहे
ट्वीट कर सुशील मोदी ने बताया, किस नंबर से लालू जेल से फोन पर एनडीए विधायकों को प्रलोभन दे रहे

Stay Connected

Facebook Google twitter