बकरियों की पांचवी पास डॉक्टर दीदी, आंखों में सपने क्या हैं

बकरियों की पांचवी पास डॉक्टर दीदी, आंखों में सपने क्या हैं
Amit Chowdhary
लकी ,   Feb 11, 2019

वे वक्त का फर्क नहीं करती. और पुराने दिनों को याद भी नहीं करना चाहती. उनकी आंखों में सपने हैं. एक नहीं अनेक. बच्चों को दूर तक पढ़ाना. अपना पक्का मकान बनाना. और गांवों में नाम कमाना. सखियों के काम आना. 

बलमदीना तिर्की. पांचवी पास. झारखंड का राजधानी रांची से करीब 40 किलोमीटर दूर गेतलसूद पंचायत के भाकूटुंगरी की रहने वाली. यही नाम और पता. पर पहचान बड़ी. झारखंड में हजारों पशु सखियों के बीच बलमदीना तिर्की का नाम शुमार है. इन दिनों वे महिला समूहों के बीच प्रशिक्षण देने में व्यस्त चल रही हैं. कहती हैं खाना पकाना बच्चों को स्कूल भेजना, खुद गांवों की तरफ निकलना. एकदम फुर्सत नहीं मिलती. 

उन्होंने खुद भी बकरियां पाल रखी हैं. इन बकरियों की तंदुरूस्ती के सवाल पर वे हंस भर देती हैं. 

पिछले साल पंद्रह नवंबर को राज्य सरकार ने बलमदीना तिर्की को 'झारखंड सम्मान 2018' से नवाजा है. साथ ही एक लाख रुपए का इनाम भी दिया है.

बलमदीना कहती हैं, ''कभी सोचा नहीं था लखपति बनूंगी. अलबत्ता सम्मान और इनाम के बाद जिम्मेदारियां बढ़ी है. हमेशा यही लगता है कि किसी को मेरे मेरे काम और नाम से शिकवा नहीं हो. मेनहत से कभी मुंह नहीं मोड़ी. उम्मीदों की राह पर आगे बढ़ी. खुद पांचवी तक पढ़ सकी, इसकी कसक होती है. इसलिए बच्चों को दूर तक पढ़ाना चाहती हूं''. 

इसे भी पढ़ें: क्या बाबूलाल हार में जीत देख रहे, अकेले दम पर उठाए थे पंद्रह लाख वोट

कौन हैं पशु सखियां

झारखंड राज्य आजीविका कार्यक्रम के तहत गांवों में महिलाओं को कई किस्म के प्रशिक्षण दिलाए जाते रहे हैं. इस अभियान का मकसद है कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हों और गांवों में रहकर ही उनकी आमदनी का जरिया मिले. राज्य में बड़े पैमाने पर महिलाएं समूह बना कर कई क्षेत्रों में काम कर रही हैं. 

कुछ साल पहले आजीविका मिशन ने गांवों की महिलाओं को पशु सखी का प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया था. ब्लॉक स्तरीय ट्रेनिंग के बाद ये महिलाएं बकरियों में पीपीआर, खुरपका, मुंहपका जैसी बीमारियों का इलाज करती हैं. साथ ही टीकाकरण डीवार्मिंग करती हैं. और ग्रामीणों को अच्छे पोषण, रख-रखाव के साथ बेहतर पशुपालन की सलाह देती हैं. 

झारखंड राज्य आजीविका मिशन सोसायटी के कम्युनिकेशन अधिकारी कुमार विकास बताते हैं, ''बेशक झारखंड के आदिवासी इलाकों में समूहों से जुड़कर महिलाएं परिवर्तन की कई कहानियां लिखने लगी हैं. पहाड़ी और जंगली इलाके में 70 फीसदी से ज्यादा लोग बकरी पालन करते हैं लेकिन बकरियों की सही देखरेख न होने की वजह से बकरियां और मुर्गियां कई बीमारियों की चपेट में आकर मर जाती थीं. मृत्यु दर में इजाफा, छोटे पशुपालकों के बीच बड़ी समस्या बन गई थी. लेकिन पशु सखियों ने अब हालात बदल दिए हैं. प्रमोशन सोसाइटी के सहयोग से झारखंड में 58 हजार से ज्यादा किसानों ने बकरी पालन शुरू किया है. और पांच हजार पशु सखियां गांवों में काम कर रही हैं''. 

एक लाख रुपए

एक लाख रुपये से क्या काम किए, इस सवाल पर बलमदीना कहती हैं कि सहेज कर बैंक में रखा है. दस हजार रुपए की बकरियां खरीदी थी. उसकी बिक्री से दो हजार रुपए की कमाई हुई है. एक पक्का घर बनाने का सपना है. उसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन डाला है. उम्मीद है कि सरकार से जल्दी ही स्वीकृत हो जाएगी. जब वो घर बनेगा, तो कुछ अलग से पैसे लगाने की जरूरत हुई, तो वही इनाम वाले पैसे लगाउंगी. अगर जरूरत नहीं पड़ी, तो बच्चों की आगे की पढ़ाई में खर्च करने का इरादा है.

बलमदीना बताती हैं कि पशु सखी बनकर अब पांच  से छह हजार रुपए तक महीने की कमाई हो जाती है. लिहाजा घर- परिवार ठीक से चलता है. वरना जिंदगी में उन पलों का सामना भी करना पड़ा है जब सांझ को चूल्हा चलेगा या नहीं, यह आशंका सामने होती थी. 

बलमदीना तिर्की के पति सिलियम तिर्की एक निजी स्कूल में बस ड्राइवर हैं. महीने में उन्हें पांच हजार रुपए मिलते हैं. बलमदीना बताती हैं कि इन पांच हजार रुपए से कैसे घर- परिवार संभाल पाते. यह मुश्किल था. 

इसे भी पढ़ें: रामदेव पर ओवैसी का पलटवार, कहा, अपनी मर्जी से मुसलमान हैं

साल 2013 में उन्होंने पशु सखी का प्रशिक्षण हासिल किया. इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखी. कई मौके पर बलमदीना दूसरे राज्यों में भी ट्रेनिंग देने जाती हैं. तब उन्हें ज्यादा पैसे मिलते हैं. 

बलमदीना बताती हैं कि  पहले वो जंगलों- पठारों के रास्ते कई किलोमीटर तक पैदल चलती थीं. कमाई के पैसे बचाकर कर उन्होंने अपने लिए मोपेड और पति के लिए बाइक खरीदी. एक पलंग भी बनवाया है. और मोबाइल फोन के अलावा मनोरंजन के लिए टीवी खरीद चुकी हैं. वे बताती हैं कि घर के बर्तन- बासन भी ठीक हो चले हैं. साथ ही अब घर- परिवार के सदस्यों की भी वक्त- बेवक्त आर्थिक मदद कर पाती हैं. 

बलमदीना ने अपने दोनों बच्चों- तेरेसा तिर्की और सिबिया तिर्की को अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिला दिलाया है. साल में साठ हजार रुपए बच्चों की पढ़ाई में खर्च करती हैं. 

कठिन दौर 

इसी इलाके में भेलवजरा गांव की संगीता उरांव बताती हैं कि बममदीना दीदी ने उनकी बकरियों को मरने से बचा लिया. बलमदीना, बकरियों का इलाज करते-करते अब मुर्गी, सूकर, बैल और भैंस का भी प्राथमिक उपचार करने लगी हैं. साथ ही दूसरे गांव की महिलाओं को पशु सखी बनाने के लिए प्रशिक्षित करती हैं.

 वे बताती हैं कि शुरुआती दौर में कई मौके पर गांवों में बड़े- बुजुर्ग गंवई लहजे में कहते थे कि 'तोंय का इलाज करबे. और इकर ले कहां से टेरनिंग पाले ही.' (तुम क्या इला करोगी और कहां से ट्रेनिंग ली है.) लेकिन हौसला कम नहीं पड़ा. और जब नुस्खे का असर होने लगा, तो अब उन्हीं लोगों के बीच डॉक्टर दीदी के नाम से पुकारी जाती हूं.

गेलतसूद की रंगती देवी कहती हैं कि अब गांवों में बकरियों, मुर्गियों की तबीयत नासाज क्या हुई, बलमदीना पहले बुलाई जाती हैं. बकरियों को तो पहली नजर में ही देख कर ही वो नब्ज भांप लेती है.   


(आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

लोकप्रिय

चाईबासाः नैहर में थी आदिवासी महिला, पति बीमार पड़े, तो साइकिल से नाप ली 50 किमी दूरी
चाईबासाः नैहर में थी आदिवासी महिला, पति बीमार पड़े, तो साइकिल से नाप ली 50 किमी दूरी
अच्छी पहलः ओडिशा ने 500 एमबीबीएस छात्रों को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया
अच्छी पहलः ओडिशा ने 500 एमबीबीएस छात्रों को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया
कोरोना रोका जा सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ के जेलों से छोड़े गए 584 कैदी
कोरोना रोका जा सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ के जेलों से छोड़े गए 584 कैदी
कोरोना का कहर, देश में संक्रमण के 2,902 मामले, मरने वालों की संख्या 68 हुई
कोरोना का कहर, देश में संक्रमण के 2,902 मामले, मरने वालों की संख्या 68 हुई
2 दिन में तबलीगी जमात के 647 लोग कोरोना पॉजिटिव निकले जबकि 24 घंटों में 12 मरीजों की मौत
2 दिन में तबलीगी जमात के 647 लोग कोरोना पॉजिटिव निकले जबकि 24 घंटों में 12 मरीजों की मौत
नर्सों से अभद्रता करने वाले तबलीगी जमात के लोगों पर लगेगा रासुका, छोड़ेंगे नहींः योगी आदित्यनाथ
नर्सों से अभद्रता करने वाले तबलीगी जमात के लोगों पर लगेगा रासुका, छोड़ेंगे नहींः योगी आदित्यनाथ
पीएम मोदी ने राज्यों से कहा, अगले कुछ हफ्तों में टेस्टिंग, ट्रेसिंग और क्वारंटाइन पर रहे जोर
पीएम मोदी ने राज्यों से कहा, अगले कुछ हफ्तों में टेस्टिंग, ट्रेसिंग और क्वारंटाइन पर रहे जोर
 धार्मिक स्थानों पर जमा होकर अव्यवस्था पैदा करने का यह वक्त नहीं है : ए आर रहमान
धार्मिक स्थानों पर जमा होकर अव्यवस्था पैदा करने का यह वक्त नहीं है : ए आर रहमान
देश में पांव पसारता कोरोना, संक्रमण के 1965 मामले, मरने वालों की संख्या 50
देश में पांव पसारता कोरोना, संक्रमण के 1965 मामले, मरने वालों की संख्या 50
कोरोना के बीच क्यों सुर्खियों में हैं डॉक्टर सुधीर डेहरिया
कोरोना के बीच क्यों सुर्खियों में हैं डॉक्टर सुधीर डेहरिया

Stay Connected

Facebook Google twitter