झारखंडः सहायक पुलिसकर्मियों का 'वर्दी-ए-इंसाफ' आंदोलन, तमाम घेराबंदी के बाद भी रांची पहुंचे

झारखंडः सहायक पुलिसकर्मियों का 'वर्दी-ए-इंसाफ' आंदोलन, तमाम घेराबंदी के बाद भी रांची पहुंचे
Publicbol ( गिरिडीह से पैदल ही रांची के लिए चले सहायक पुलिसकर्मी)
पीबी ब्यूरो ,   Sep 12, 2020

झारखंड में सहायक पुलिस कर्मियों ने आंदोलन का रुख अख्तियार कर लिया है. तमाम घेराबंदी के बाद भी वे हजारों की संख्या में राजधानी रांची पहुंचे हैं. कई जिलों से पैदल ही वे भूखे-प्यासे रांची पहुंचे हैं.

इनमें महिला पुलिस भी शामिल हैं. सहायक पुलिसकर्मियों की मांग है कि उनकी सेवा स्थायी हो. जबकि बीस अगस्त को उनकी सेवा खत्म कर दी गई है. तीन साल के लिए यह सेवा ली गई थी.  

इससे पहले शुक्रवार को राज्य के अलग- अलग जिलों से सहायक पुलिसकर्मियों का जत्था बसों से रांची के लिए रवाना हुआ, तो उन्हें पुलिस के अधिकारियों ने आगे बढ़ने से रोका और समझाने-बुझाने की कोशिशें की. 

अलबत्ता कई जगहों पर जिलों के एसपी को इन पुलिसकर्मियों को समझाने के लिए सड़क पर उतरते देखा गया. इसके बाद वे पैदल ही रांची पहुंच गए. शुक्रवार देर रात से मोरहाबादी मैदान में जुटने लगे थे. 

इस बीच रांची पहुंचे सहायक पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल से रांची के डीआईजी, एसएसपी वार्ता कर रहे हैं. यह बातचीत एसएसपी कार्यालय में हो रही है. इस वार्ता का तत्काल कोई नतीजा नहीं निकला है.

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हालांकि पुलिस के आला अधिकारी उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया है. 

गौरतलब है कि तीन साल पहले राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में बतौर अनुबंध लगभग  2500 सहायक पुलिसकर्मियों को बहाल किया गया था. उन्हें 10 हजार रुपए का  मानदेय मिलता है.

लातेहार से आए रंजीत यादव कहते हैं कि उन्हें लिखित में कागज मिला था कि अच्छी सेवा देने पर नियमित कर दिया जाएगा. तीन साल तक महज दस हजार रुपए में 16 से 18 घंटे तक उन लोगों ने ड्यूटी की. साहबों का जो भी फरमान जारी हुआ उसे पूरा किया गया. अब वे सड़क पर आ गए हैं.

पलामू की सविता कहती हैं इस तरह की बहाली क्यों ली जाती है कि कुछ साल काम कराए फिर बाहर कर दिए. ये आंदोलन थमने वाला नहीं है. जान भी जाए तो परवाह नहीं.

शुरू में उन्हें एक साल के लिए रखा गया था. बाद मे इसकी मियाद तीन साल के लिए की गई. अब यह अनुबंध खत्म होने वाला है. लिहाजा सहायक पुलिस कर्मी सेवा स्थायी करने की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर उतर आए हैं. 

मोरहाबादी में जुटी सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि सेवा स्थायी करने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही वे रांची से अपने गृह जिलों को लौटेंगे. वे सीएम आवास पर धनरा प्रदर्शन के लिए भी आगे बढ़ते रहे, लेकिन राजभवन से पहले ही उन्हें रोक दिया गया. 

उनका कहना है कि सरकार ने वादा किया था कि अनुबंध पर काम करने वालों की सेवा स्थायी की जाएगी. 

इधर सैकड़ों सहायक पुलिसकर्मियों के मोरहाबादी मैदान में जुटने के बाद रांची के ट्रैफिक एसपी, सिटी एसपी, सिटी डीएसपी यहां पहुंचे और सहायक पुलिसकर्मियों से बातचीत की.

ट्रैफिक एसपी ने सहायक पुलिसकर्मियों से कहा कि हर हाल में अनुशासन बनाए रखें. 


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