स्कूल से लौटती मेरी बच्ची की हत्या हुई और पुलिस कहती रही सुबह आना, शाम आना...

स्कूल से लौटती मेरी बच्ची की हत्या हुई और पुलिस कहती रही सुबह आना, शाम आना...
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पीबी ब्यूरो ,   Jan 13, 2019

 मेरी बच्ची का यही गुनाह था कि वो दो किलोमीटर पैदल चलकर अकेले स्कूल जाती थी. किसी से नजरें तक नहीं मिलाती थी और ना ही कभी गलत ख्याल रखती थी. क्या यही कसूर था कि वो निहायत साधारण परिवार की लड़की थी. फूल सी मेरी बेटी की बदमाशों ने बेरहमी से हत्या कर दी. और पुलिस कहती रही शाम को आना. सुबह में आना. इतना कहते हुए राजू साव का गला रूंध जाता है. 

कुछ देर की खामोशी के बाद वे पूछते हैं कि अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी के साथ सख्त सजा मिलनी चाहिए या नहीं. 

कोडरमा जिले में मरकच्चो थाना क्षेत्र के दाशोखुर्द गांव के रहने वाले राजू साव के सवाल और भी हैं.  

उनकी नाबालिग बेटी की हत्या पिछले सात जनवरी को स्कूल से लौटने के दौरान कर दी गई है. जबकि दो दिनों बाद एक पुल के नीचे से बच्ची की लाश मिली.

आशंका इसकी भी है कि हत्या से पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ. हालांकि पुलिस को इस बारे में अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है. 

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दाशोखुर्द से दो किलोमीटर दूर सिमरिया गांव स्थित सरकारी उच्च विद्यालय में वो पढ़ने गई थी. स्कूल की छुट्टी के बाद वह पैदल ही घर लौट रही थी. 

यह नाबालिग बच्ची अगले महीने से होने वाली दसवीं बोर्ड की परीक्षा की तैयारी में जुटी थी. और उसके सपने भी थे. बीए तक पढ़ने की. 

हालांकि उसे अंदेशा था कि शायद घर वाले इतनी दूर तक नहीं पढ़ाएं. राजू साव कहते हैं कि जितना सकते जरूर पढ़ाते. 

परेशान नहीं करते

इस घटना को लेकर मरकच्चो से कोडरमा जिला मुख्यालय तक उबाल है. लेकिन ये सवाल सत्ता, सियासत के गलियारे और सिस्टम को परेशान नहीं करते.

वैसे भी झारखंड में दाशोखुर्द गांव की यह घटना बानगी भर है. शहरों से लेकर गांवों- कस्बों में स्कूल- कॉलेज की लड़कियों के साथ बलात्कार और हत्या के लगातार खौफनाक मामले सामने आते रहे हैं. अलबत्ता अधिकतर मामलों में निहायत साधारण घरों या गरीबों की बेटियां हिंसा का शिकार हो रही हैं. 

जाहिर है कई जगहों पर उनकी बेबसी, सिसकियां या चीख- पुकार पठारों- जंगलों या सदूर गांवों की गलियों में दम तोड़ जाती है. पिछले साल मई महीने में चतरा में एक लड़की के साथ गैंगरेप के बाद उसे जिंदा जला दिया गया था. 

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क्या हुआ दाशोखुर्द में 

राजू साव गांव में ही मामली सा परचून की दुकान चलाते हैं, जबकि उनके दोनों बेटे परदेस में मजदूरी करते हैं. घटना के बाद दोनों बेटे वापस गांव आए हैं. 

राजू साव बताते हैं कि सोमवार की सुबह बेटी स्कूल जाने की तैयारी में थी और हम दोनों (पति- पत्नी) निकट के एक गांव में पहुनई ( रिश्तेदार) के यहां जाने वाले थे. 

हमने बेटी से कहा था कि स्कूल छोड़ देते हैं. तब उसने कहा कि नहीं पापा, आपलोग जाइए. हम पैदल भी जाएंगे, तो टाइम पर स्कूल पहुंच जाएंगे.

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करीब चार बजे रिश्तेदार के यहां से वापस आने पर बहू ने बताया कि ननद अब तक स्कूल से लौटी नहीं हैं. इसके बाद वे स्कूल चले गए. स्कूल बंद था. एक शिक्षक से बात की, तो उन्होंने बताया कि छुट्टी होने पर सहेलियों के साथ उसे लौटते हुए देखा गया है. 

इसके बाद बेटी की सहेली के घर गए, तो उसने बताया कि बीच रास्ते वो अपने घर के लिए मुड़ गई और हमारी बच्ची आगे बढ़ गई. बेटी की सहेली से बातचीत में इसकी भी जानकारी मिली कि बेटी ने उसे बताया था कि स्कूल जाते वक्त रास्ते में बाइक पर सवार कुछ लोगों ने तंग करने की कोशिश की थी, लेकिन उसने सिर भी नहीं उठाया. और आगे बढ़ती रही. 

उस लड़की ने ही बेटी को सलाह दी थी कि घर वालों को जरूर बताना और मंगलवार यानि आठ जनवरी को वेलोग टीचर को जानकारी देंगी. 

शाम में ही थाना गए 

राजू साव के मुताबिक शाम सात बजे तक अपने स्तर से बेटी की खोज करते रहे, लेकिन कुछ पता नहीं चला. फिर मरकच्चो थाना गए. वहां से कहा गया कि रात तक इंतजार करें. नाता- गोतिया से भी पूछ लो. फिर सुबह आना. 

राजू साव की बहू बताती हैं कि पूरी रात वेलोग जगे रहे. चूल्हा तक नहीं जला. कई आशंका को लेकर मन घबराता रहा.  

मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे राजू साव फिर थाना पहुंचे, तो एक पुलिस वाले ने कहा कि थाना प्रभारी किसी बैठक में भाग लेने गए हैं. शाम में आना. 

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इस बीच राजू साव ने मुखिया से बात की और कहा कि एफआईआर दर्ज करवाना जरूरी है. तब जाकर देर शाम में एफआईआर दर्ज किया गया. 

बुधवार की सुबह किसी रिश्तेदार ने फोन पर जानकारी दी कि सिमरिया से दाशोखुर्द के बीच में जो पुल है उसके नीचे एक लड़की की लाश देखी गई है. सभी लोग हांफते- भागते वहां पहुंचे, तो देखा वो मेरी बच्ची की लाश थी. 

आत्मा कलप गया

राजू साव के छोटे बेटे रंजीत बताते हैं कि सोमवार की रात उन्हें घर वालों से जानकारी मिली थी कि बहन स्कूल से लौटने के दौरान लापता है. 

इसके बाद अपने बड़े भाई प्रवीण कुमार के साथ वेलोग पुणे से चलकर गुरुवार की सुबह गांव पहुंचे. राजेश कहते हैं कि दरवाजे पर छोटी बहन की लाश पड़ी थी. उसे देखकर आत्म कलपने लगा. 

बहुत क्रूरता से मासूम बच्ची की हत्यी की गई. लगता है कि विरोध करने के दौरान चाकू पकड़ने में उसकी उंगुलियां कट गई थी. जिन लोगों ने स्कूल जाते समय तंग किया होगा वही इस घटना को अंजाम दे सकते हैं. पुलिस अगर कार्रवाई में तुरंत जुट जाती, तो गुंजाइश है कि उसकी जान बच जाती. या फिर वो दोपहर में ही मारी गई हो. 

राजेश बताने लगे कि हाल ही में बहन से परीक्षा की तैयारियों को लेकर बातें हुई थी. उसने वादा किया था कि अच्छे नंबर से पास करूंगी. और मैंने उससे कहा था कि तुम्हारी पसंद का उपहार खरीद कर दूंगा. दोनों भाई से वो छोटी थी इसलिए हमलोग उसकी शादी भी धूमधाम से करना चाहते थे. 

कोडरमा के पुलिस अधीक्षक एम तमिल वाणन ने इस घटना की जांच के लिए एसआइटी बैठाई है. उन्होंने घटना स्थल का जायजा लिया है और गांव के लोगों से बातें की है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा है कि पुलिस जल्दी ही इस मामले का खुलासा करेगी. 

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इत्तेफाक नहीं

कोडरमा की पूर्व विधायक और झारखंड सरकार में मंत्री रही अन्नपूर्णा देवी समेत कई संगठन इस घटना को लेकर सड़कों पर निकल पड़े हैं.  

अन्नपूर्णा देवी कोडरमा में महिलाओं और युवतियों गोलबंद करते हुए कैंडल मार्च निकाला और पीड़ित परिवार से मिलकर पूरी जानकारी ली. साथ ही पुलिस से भी पूछा है कि अब तक कार्रवाई क्या हुई है. 

अन्नपूर्णा देवी बताती हैं कि बुधवार को बच्ची की लाश मिलने के बाद गांव वालों ने स्थानीय पुलिस के खिलाफ रोषपूर्ण प्रदर्शन किया. नारेबाजी की तब जाकर अधिकारियों के कान खड़के. 

वे कहती हैं कि लड़कियों की इज्जत और जान को लेकर बढ़ती घटनाएं राज्य की कानून व्यवस्था का हाल बता रही हैं. और पुलिस महकमा आंकड़ों की बाजीगरी में जुटा है. जबकि शासन का इकबाल एकदम ध्वस्त है.

वे आरोप लगाती हैं कि बीजेपी सरकार के लिए यह कोई एजेंडा नही हैं. तभी तो सरेराह लड़कियां अगवा कर ली जा रही हैं. एक पीड़ित पिता 48 घंटे थाने का चक्कर लगाता है और पुलिस कहती है कि इंतजार करो, नाता- गोतिया से पूछो. 

बाल अधिकार कार्यकर्ता बैद्यनाथ कहते हैं कि इसे पुलिस की कमजोरी कहें या लापरवाही मानव तस्करी और बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़ी घटनाओं या अगवा- अपहरण की आशंका पर फौरी कार्रवाई नहीं होती. जब बातें खिलाफ में जाने लगती है, तो तेजी दिखाई जाती है. जबकि तत्काल और सटीक कार्रवाई का जा सके, इसके लिए अलग- अलग स्तरों पर लगातार पुलिस की ट्रेनिंग भी होती रही है.  

जानी- मानी महिला कार्यकर्ता और जनवादी महिला समति प्रतिनिधि रेणु प्रकाश का कहना है कि वाकई झारखंड में भवायह हालात हैं. घर में घुसकर लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं ये जाहिर करती है कि कानून का डर समाप्त हो रहा है. 

वे बताती हैं कि बलात्कार और हत्या के मामले में एफआइआर और गिरफ्तारियां होना नाकाफी है. पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी बनती है इन मामलों में तेजी से अनुसंधान हो, साक्ष्य जुटाकर आरोपियों को सख्त सजा दिलाई जा सके, जबकि यह काम कम होता है. 

दूसरी तरफ सामाजीकरण की प्रक्रिया लगातार कमजोर होने या छिन्न भिन्न होने के कारण स्कूली और मासूम लड़कियां दरिंदगी का शिकार हो रही हैं.  

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हालात

राज्य में साल 2016 में बलात्कार के 1087, साल 2017 में 1322 मामले दर्ज किए गए हैं. 

जबकि साल 2018 में नवंबर महीने तक बल्ताकार के 1006 मामले दर्ज किए गए हैं. इसी आंकड़े के आधार पर हाल ही में अपराध अनुसंधान विभाग ने महिला हिंसा में कमी का दावा भी किया था. 


सिर काट ले गए

पिछले साल 25 दिसंबर की शाम राजधानी रांची से करीब चालीस किलोमीटर दूर बुंडू थाना क्षेत्र एक गांव करांबू में एक नाबालिग छात्रा की हत्या कर दी गई. और अपराधी सिर तक काट कर ले गए. हत्या से पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म की आशंका जताई गई है. पुलिस 11 दिनों बाद बाद कटा सिर बरामद कर सकी. 

इसी साल के पहले हफ्ते सिंहभूम में पोटका थाना क्षेत्र के माटकु गांव में चौथी कक्षा की एक बच्ची की हत्या कर दी गई थी. शाम में वो अपने घर के जानवर खोजने निकली थी. 

जबकि 11 जनवरी को हजारीबाग में एक नाबालिग के साथ चलती गाड़ी में दुष्कर्म की घटना हुई. 

उधर दस जनवरी को आदिवासी बहुल गुमला जिले के घाघरा में एक नाबालिग का पहले अगवा किया गया. फिर उसे बंधक बनाकर रखा गया और दुष्कर्म की घटना हुई. 

जबकि पांच जनवरी को इसी इलाके में शादी समारोह से एक स्कूली बच्ची का अपहरण कर गैंग रेप किया गया. घटनाओं की तहकीकात करें, तो लंबी फेहरिश्त हैं. 


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