झारखंडः मुकम्मल इलाज को तरसती महिलाएं और गर्भ में बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट गंभीर, रिपोर्ट तलब

झारखंडः मुकम्मल इलाज को तरसती महिलाएं और गर्भ में बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट गंभीर, रिपोर्ट तलब
Publicbol (File Photo)
पीबी ब्यूरो ,   May 06, 2020

झारखंड की राजधानी रांची में अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने के चलते बीते दो दिनों में गर्भ में हुए दो बच्चों की मौत को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है और सरकार से जवाब मांगा है. 

अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद दो- दो जजों ने इस पर संज्ञान लिया और सरकार से जवाब मांगा है. खंडपीठ ने मौखिक तौर पर कहा कि रांची के अल्पतालों में गर्भवती महिलाओं का इलाज नहीं होना और गर्भ में बच्चों की मौत विचलित करने वाली घटना है. गर्भवती महिलाओं को इलाज से वंचित करना बेहद चौंकाने वाला है. 

चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए महाधिवक्ता को 12 मई तक जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया.

जबकि जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य सचिव, रिम्स निदेशक, सिविल सर्जन और रांची जिला प्रशासन को प्रतिवादी बनाया है और जवाब देने का निर्देश देते हुए मामला चीफ जस्टिस की बेंच में स्थानांतरित कर दिया है.

जस्टिस एसएन पाठक की अदालत ने संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे मामलों में  अदालत आंखें बंद नहीं कर सकती.  राज्य की जनता को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता.

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इलाज मौलिक अधिकार है

अदालत ने कहा है कि इमरजेंसी में किसी का इलाज उसका मौलिक अधिकार है. ऐसे में गर्भ में बच्चे की मौत से होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति कैसे की जा सकती है. स्वास्थ्य की सुविधा देना राज्य सरकार का संवैधानिक अधिकार है. 

अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों का संचालन राज्य सरकार करती है. अस्पताल के कर्मचारियों को वहां पहुंचने वाले सभी लोगों का इलाज करना उनका कर्तव्य है. अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो मरीज के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं. 

जांच रिपोर्ट पेश करें

उधर चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने कोरोना से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नाराजगी जतायी और कहा कि दो दिनों में इस तरह की दो घटनाएं हुई जो काफी दुखद है.

ये ऐसी घटना है जिससे हर किसी का दिल दुखता है. अदालत ने सरकार को इस पर गंभीरता दिखाते हुए जांच कराने का आदेश दिया और यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो.

12 मई को अदालत ने मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा कि आखिर निजी अस्पताल बंद क्यों हैं. इन अस्पतालों में इलाज क्यों नहीं हो रहा है. इस पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि इन दोनों घटनाओं की जांच का आदेश सरकार ने पहले ही दे दिया है. कोरोना संक्रमण फैलेने के बाद निजी अस्पतालों ने ओपीडी और इलाज करना बंद कर दिया था.

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय का नया निर्देश आ गया है. जबकि सरकारी सदर अस्पताल की नर्सों में कोरोना संक्रमण और रिम्स में एक गर्भवती महिला में कोरोना का लक्षण पाए जाने के बाद उन्हें सेनेटाइज किया गया था और कुछ दिनों के लिए प्रसुति वार्ड बंद कर दिया गया था.

वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डोरंडा स्वास्थ्य केंद्र को इसके लिए तैयार रखा गया है. 

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रांची में दो पत्रकारों की पत्नी

गौरतलब है कि राजधानी रांची में एक अंग्रेजी अखबार पायोनियर के छायाकार विनय मुर्मू की पत्नी के साथ यह घटना घटी. प्रसव पीड़ा के दौरान विनय अपनी पत्नी को लेकर सदर एक निजी अस्पताल गए. वहां इलाज नहीं किया गया.

इसके बाद सदर अस्पताल पहुंचे. सदर अस्पताल में कोई नर्स और डॉक्टर नहीं थे. वहां से सरकारी अस्पताल डोरंडा पहुंचे. डोरंडा में कागज भरने और पूछताछ करने में लगभग 40 मिनट लगा दिए.

तब तक विनय की पत्नी की हालत बिगड़ती चली गई. वे फिर एक निजी अस्पताल पहुंचे. गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी थी. ऑपरेशन कर उसे निकाला गया. 

इसी तरह न्यूजविंग के पत्रकार प्रवीण कुमार की पत्नी के साथ भी यही हादसा हुआ. प्रसव पीड़ा के बाद प्रवीण अपनी पत्नी को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे. अस्पताल ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया. प्रवीण परेशान रहे. वे दूसरे अस्पताल पहुंचे. लेकिन तब तक बच्चे की गर्भ में मौत हो चुकी थी. 

चेतावनी का असर नहीं 

इससे पहले कोरोना संकट के बीच झारखंड में अधिकतर निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम ने इलाज बंद कर दिया है. साथ ही मोटी फीस लेकर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों ने भी शटर गिरा दिए हैं. लॉक डाउन के 40 दिन होने को हैं.

इस बीच सरकार ने साफ तौर पर निजी अस्पतालों को हिदायत दी है कि वे इलाज का काम प्रारंभ करें. वर्ना निबंधन रद्द कर दिया जाएगा.  

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने दो मई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बताया था कि अब तक ज्यादा निजी अस्पताल औऱ नर्सिंग होम बंद हैं.

इस कारण दूसरे रोगों के मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है. इस बाबत निजी अस्पताल के संचालकों को चेतावनी दी गई है कि वे अपने अस्पताल को खोलें, वरना उनका निबंधन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

मुख्यमंत्री का कहना है कि कोरोना के अलावा दूसरे बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज को लेकर सरकार गंभीर है.


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