कजाकिस्तान में चमकी झारखंड की बेटी फ्लोरेंस का सपना है ओलंपिक जीतना

कजाकिस्तान में चमकी झारखंड की बेटी फ्लोरेंस का सपना है ओलंपिक जीतना
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पीबी ब्यूरो ,   Jun 05, 2019

झारखंड की उभरती एथलीट फ्लोरेंस बारला की आंखों में सपने हैं. ओलपिंक जीतने का. कजाकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण एथलेटिक्स मीट में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद फ्लोरेंस उत्साह तथा साहस से लबरेज हैं. 

झारखंड की बेटी फ्लोरेंस पिछले दो सालों से राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. कजाकिस्तान में स्वर्ण पदक जीत कर झारखंड लौटने पर फ्लोरेंस का खेल मंत्री अमर बाउरी और सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह ने सम्मानित किया और बधाई दी है. फ्लोरेंस के इस परचम को झारखंड के खेल जगत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. 

फ्लोरेंस कहती हैं कि उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है. अगला लक्ष्य ओलपिंक में भागीदारी और पदक जीतने का है. इसके लिए जीतोड़ मेहनत करूंगी. दरअसल किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहले ही प्रयास में इस खिलाड़ी ने फ्लोंरेस ने अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवाया है. 

कजाकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण एथलेटिक्स मीट में फ्लोरेंस ने 400 मीटर दौड़ में 54.73 का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता.  इससे पहले खेलो इंडिया के दौरान उसने 55.72 सेकंड का सर्वश्रेष्ठ समय निकाला था. 

इसे भी पढ़ें: झारखंडः सूख गई उम्मीदें, पाताल तक तलाश, डेगची भर पानी, भटक रही जिंदगानी

गांवों की पथरीली और उबड़खाबड़ जमीन पर दौड़ लगाने वाली फ्लोरेंस बारला सबसे पहले रांची में हुए बाल समागम में भाग लेने आयी थी. उस दौरान बेहतर प्रदर्शन देखते हुए नवाडीह स्थित डे बोर्डिंग सेंटर भेजा गया. वहां कोच ब्रदर क्लेप की देखरेख में एथलेटिक्स का प्रशिक्षण लेने लगी. अभावों और मुफलिसी को फ्लोरेस ने कभी आड़े नहीं आने दिया. 
फिर एक वक्त आया जब वो अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने की काबिल बनीं. 

पिछले दो सालों से फ्लोरेंस बारला राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही है. खेलों इंडिया में इस खिलाड़ी ने रजत पदक जीता था. इसके पहले रांची में आयोजित 34वें जूनियर नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता के 400 मीटर में स्वर्ण पदक, 400 मीटर ओपन नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा को साबित कर दिया था.

झारखंड सरकार व सीसीएल द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे झारखंड स्टेट स्पोट्र्स प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएसपीएस) की प्रशिक्षु फ्लोरेंस का यह पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है. साथ ही तीन साल पहले शुरू हुए जेएसएसपीएस के इतिहास में ये किसी भी खिलाड़ी द्वारा जीता गया पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है. 


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