झारखंडः पहले चरण का वोट कल, भिनसरिया से ही बूथों पर जोर, समीकरण रहे झकझोर

 झारखंडः पहले चरण का वोट कल, भिनसरिया से ही बूथों पर जोर, समीकरण रहे झकझोर
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पीबी ब्यूरो ,   Nov 29, 2019

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण में तेरह सीटों पर 30 नवंबर, शनिवार को वोट डाले जाएंगे. इन 13 सीटों पर कुल 189 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 37 लाख 78 हजार 963 मतदाता करेंगे.

गुरुवार की शाम प्रचार का शोर थमने के साथ ही दलों, उम्मीदवारों और रणनीतिकारों ने बूथ मैनेजमेंट पर जोर दिया है. सन-सन बहती जातीय हवाएं उम्मीदवारों और रणनीतिकारों को हिला कर रख रही है.

चुनाव प्रचार में मुद्दे बहुत असर करते दिखे. बस जातीय गोलबंदी और जीतने- हारने के लिए तमाम हथकंडे प्रभावी रहे. 

पलामू में ये हवा कहीं ज्यादा है. यहां बीजेपी पर खतरे भी मंडराते दिख रहे हैं. दरअसल कई सीटों पर वह कांटे की टक्कर में फंस गई है. 

पहले चरण में सरकार के मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव, पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी, ददई दूबे, भानूप्रताप शाही, राधाकृष्ण किशोर, सुखदेव भगत, चमरा लिंडा जनार्दन पासवान सरीखे नेता प्रतिष्ठा की लड़ाई में फंसे हैं. 

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अंतिम वक्त वोट  फिसले नहीं, कार्यकर्ता डिगे नहीं, इसकी मगजमारी जारी है.

 पहले चरण में ही बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, स्मृति इरानी, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा सरीखे दिग्गजों ने प्रचार किया है. 

जबकि कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह प्रचार कर चुके हैं. जेएमएम की कमान हेमंत सोरेन संभाल रहे हैं.

जेवीएम का प्रचार बाबूलाल मरांडी कर रहे हैं और पहले चरण में तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही आजसू पार्टी के लिए सुदेश कुमार महतो ने प्रचार किया है. राजद के लिए तेजस्वी यादव और शरद यादव ने प्रचार किया है. 

जाहिर ही सभी दल एक दूसरे को आजमा रहे हैं. जेएमएम, कांग्रेस और राजद गठबंधन है.जबकि बीजेपी और आजसू अलग है. जेवीएम भी अकेले चुनाव लड़ रहा है. जदयू ने भी पलामू में उम्मीदवार उतारे हैं. जाहिर है उलझनें हैं और कील कांटे भी.  

पहले चरण में बीजेपी के सामने सीटें बचाने की चुनौती कहीं ज्यादा है. दरअसल पलामू कभी राजद जदयू का किला था, जिस पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है.

इस बार कांग्रेस, जेएमएम और राजद का गठबंधन बीजेपी को इन सीटों पर कड़ा टक्कर देते दिख रहा है. गठबंधन ने दावा किया है कि पहला चरण का चुनाव उसके नाम होगा.  बीजेपी भी भरोसे में है. 

बगावत और पाला बदल की वजह से भी कई सीटों पर समीकरण प्रभावित होते दिख रहे हैं. भितरघात का खतरा अलग ही मंडरा रहा है. दरअसल बीजेपी ने कई सीटों पर टिकट विधायकों के टिकट काटे हैं.

एंटी इंकबैंसी से बचने के लिे बीजेपी को काफी जोर लगाना पड़ा है. जबकि पलामू में कई सीटों पर जेवीएम, बसपा, जदयू के उम्मीदवार भी बड़े दलों को परेशान कर रहे हैं. वोटों के काट छांट और बंटवारे के बीच समीकरण को अपने पक्ष में करना हर किसी के लिए कठिन बना है. 

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वो 13 सीटें जहां चुनाव है

गुमला, मनिका, डालटनगंज, विशुनपुर, लातेहार, विश्रामपुर, हुसैनाबाद गढ़वा, लोहरदगा, चतरा, पांकी, छतरपुर, भवनाथपुर. इन 13 सीटों के लिए 4892 बूथ बनाए गए हैं. इनमें 1202 मतदान केंद्र संवेदनशील और 1790 मतदान केंद्र अति संवेदनशील हैं.

नक्सली इलाके होने की वजह से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. सुदूर और पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर से मतदानकर्मियों को भेजा गया है. 

प्रतिष्ठा की लड़ाई में 

विशनपुर में जेएमएम के चमरा लिंडा के सामने सीट बचाने की चुनौती है. बीजेपी के अशोक उरांव उन्हें टक्कर देते दिख रहे हैं. चमरा लिंडा दो बार यह सीट जीते हैं. जाहिर है बीजेपी यह सीट छीनना चाहती है. 

चतरा में बीजेपी के जनार्दन पासवान और राजद के सत्यानंद भोक्ता के बीच झूकझूमर चल रहा है. जनार्दन पासवान राजद में रहकर दो बार यहां चुनाव जीते हैं. 2009 में वे पूरे राज्य में सबसे ज्यादा वोटों से चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार थे. जबकि सत्यानंद भोक्ता बीजेपी से यह सीट पहले जीते हैं. अभी वे राजद में हैं. 

लोहरदगा में बीजेपी के सुखदेव भगत त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे हैं. उनका मुकाबला आजसू की नीरू शांति भगत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव से है. सुखदेव भगत पिछले महीने ही कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए हैं. 

लातेहार में जेवीएम छोड़ बीजेपी में आए प्रकाश राम को पूर्व मंत्री और जेएमएम के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम आमने- सामने की टक्कर दे रहे हैं. जेवीएम के अमन कुमार भोक्ता तथा जदयू के फूलचंद गंझू भी वोटों के समीकरण को प्रभावित कर रहे हैं. 

गुमला में बीजेपी को सीट बचाने की चुनौती है. जेएमएम हर हाल में वापसी चाहता है. बीजेपी ने इस बार उम्मीदवार भी बदल दिया है. शिवशंकर उरांव का टिकट काटकर मिसिर कुजुर को उम्मीदवार बनाया है. जबकि जेएमएम से भूषण तिर्की लड़ रहे हैं. दोनों के बीच आमने- सामने की लड़ाई होती दिख रही है. 

पलामू में घमासान 

पलामू की विश्रामपुर सीट पर सरकार के मंत्री और बीजेपी उम्मीदवार रामचंद्र चंद्रवंशी की टक्कर कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री ददई दूबे से है. ददई दूबे यहां से चार बार चुनाव जीते हैं. और 2004 में धनबाद से कांग्रेस के सांसद भी रहे हैं. जबकि चंद्रवंशी विश्रामपुर से तीन बार चुनाव जीते हैं. जेवीएम की उम्मीदवार अंजू देवी और जदयू के ब्रह्मदेव प्रसाद भी चुनाव मे कोण बनकर उभरे हैं. 

डालटनगंज में बीजेपी के उम्मदवार आलोक चौरसिया और कांग्रेस के केएन त्रिपाठी के बीच सीधी लड़ाई की तस्वीर ऊभर रही है. जेवीएम के डॉ राहुल तीसरा कोण बनते दिख रहे हैं. लेकिन केएन त्रिपाठी ने बीजेपी को सकते में डाल रखा है. इस तरह मनिका में कांग्रेस के रामचंद्र सिंह और बीजेपी के रघुपाल सिंह के बीच सीट बचाने छीनने की लड़ाई है. 

छतरपुर में बीजेपी से बगावत कर आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राधाकृष्ण किशोर का मकाबला बीजेपी की पुष्पा देवी, राजद के विजय राम और जदयू की सुधा चौधरी से है. छतरपुर से किशोर पहले पांच बार चुनाव जीत चुके हैं. 

इसी तरह हुसैनाबाद में घमासान मचा है. एनसीपी के कमलेश सिंह, राजद के संजय कुमार सिंह यादव यह सीट छीनने की जंग में फंसे हैं. संजय इस सीट पर पहले दो बार चुनाव जीते हैं. जबकि कमलेश सिंह एक बार जीते हैं.

आजसू के शिवपूजन मेहता को सीट बचाने की चुनौती है. पिछले चुनाव में वे बसपा से जीते थे. इस बार चुनाव के समय पाला बदल लिए. बसपा ने शेर अली को उतारा है. बीजेपी के समर्थन से लड़ रहे निर्दलीय विनोद सिंह को भी अपनी दमदारी दिखाने की चुनौती है. 

भनू और मेहता पर निगाहे

भवनाथपुर में पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक भानूप्रताप शाही का मुकाबला निर्दलीय लड़ रहे अनंत प्रताप देव और कांग्रेस के केपी यादव तथा जेवीएम के विजय केसरी से है. लेकिन चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ भानू और अनंत के बीच सीधी लड़ाई की तस्वीर उभरी है. 

इसी तरह गढ़वा में बेजीपी के सत्येंद्र नाथ तिवारी के सामने सीट बचाने की चुनौती है. वे 2009 और 2014 में चुनाव जीते हैं. इस बार जेएमएम के मुन्नू ठाकुर से सीधा मुकाबला होता दिख रहा है.

पांकी में बीजेपी के शशिभूषण मेहता और कांग्रेस के बिट्टू सिंह के बीच आमने- सामने की लड़ाई होती दिख रही है. यह सीट बीजेपी के लिए भी प्रतिष्ठा की बनी है. दरअसल चुनावी इतिहास में इस सीट पर कभी जीत हासिल नहीं की है. 

जबकि कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बिट्टू सिंह के सामने अपने पिता विदेश सिंह की विरासत बचाने की चुनौती है. विदेश सिंह तीन बार इस सीट पर चुनाव जीते. 2016 में उनके निधन के बाद बेटे बिट्टू सिंह ने उचुनाव जीता. 

शशिभूषण मेहता हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं. उनकी जीत तय करने के लिए बीजेपी के कई दिग्गजों ने प्रचार किया है. 


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