झारखंडः आयोग ने की पिछड़ों को 36 से 50 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा

 झारखंडः आयोग ने की पिछड़ों को 36 से 50 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा
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पीबी ब्यूरो ,   Sep 10, 2020

झारखंड पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य में पिछड़ी जातियों तो जनसंख्या के आधार पर 36 से 50 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा सरकार से की है.

आयोग ने तामिलनाड़ु में मिल रहे पिछड़ों को अधिक आरक्षण की तर्ज पर झारखंड में भी इसकी जरूरत पर सिफारिश की है.  

अभी झारखंड में पिछड़ा वर्ग को सरकारी नौकरियों में 14 फीसदी आरक्षण मिलता है. 

आयोग ने विभिन्न संगठनों की मांग के बाद इस मामले में किये गए अध्ययन के आधार पर यह अनुशंसा सरकार से की है. 

आयोग ने अनुशंसा में कहा है कि झारखंड में पिछड़ी जातियों की 54 से 55 प्रतिशत आबादी है. इसके बावजूद इन्हें मात्र 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जो बेहद कम है. इस वजह से पिछड़ा वर्ग के पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी नहीं मिल पा रही है.

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आयोग का कहना है कि सरकार चाहे, तो जनसंख्या के अनुपात में पिछड़ी जातियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण दे सकती है.

इससे पहले झारखंड राज्य में साल 2002 में मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने 72 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा की थी. सरकार ने इस बारे में संक्लप भी पारित किया. लेकिन अंतिम तौर पर लागू नहीं किया जा सका. 

27 फीसदी की मांग उछलती रही है

गौरतलब है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने पूर्व की रघुवर सरकार के कार्यकाल में सात फरवरी 2019 को भी पिछड़ी जातियों का आरक्षण बढ़ाने की अनुशंसा की थी. रघुवर दास ने चुनाव के वक्त कहा भी था कि उनकी सरकार पिछड़े वर्ग का आऱक्षण बढ़ाने पर गंभीर है, 

उस दौरान भी तमिलनाडु और महाराष्ट्र में पिछड़ी जातियों को दिये जा रहे आरक्षण का उल्लेख किया गया था. 

आयोग ने हाल ही में हुए जातिगत सर्वे को जनसंख्या का आधार बताया है, हालांकि इस सर्वे का अबतक प्रकाशन नहीं हुआ है.

गौरतलब है कि झारखंड में पिछड़ी जातियों को 27 फीसदी आरक्षण को लेकर आजसू पार्टी भी लंबे समय से आंदोलन करती रही है.

आजसू पार्टी ने इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के अलावा राज्यपाल को भी मांग पत्र सौंपा था. आजसू इस बार पर भी जोर देती रही है कि एकीकृत बिहार में पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण हासिल था, लेकिन झारखंड राज्य में इस पर कटौती की गई, 

चुनावी वादे में भी आजस पार्टी ने इसे शामिल किया था. राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी चुनावी घोषणा पत्र में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी.

अब आयोग की अनुशंसा पर सरकार चाहे, तो कार्मिक विभाग प्रस्ताव तैयार कर सकता है. फिर इस पर कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी.

इसके बाद विधानसभा में प्रस्ताव को चर्चा के लिए लाया जा सकता है. विधानसभा से स्वीकृति मिलने के बाद सरकार आरक्षण के प्रावधान में संशोधन कर सकती है.

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