झारखंडः सुर्खियों में वे तीन शिक्षक, जिन्हें नवाजा गया राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से

झारखंडः सुर्खियों में वे तीन शिक्षक, जिन्हें नवाजा गया राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से
Courtesy- ANI (चास की निरूपमा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सम्मान लेती हुईं)
पीबी ब्यूरो ,   Sep 05, 2020

शिक्षक दिवस के मौके पर पांच सितंबर शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए झारखंड के तीन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया.

बेहद अहम माने जाने वाले इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों में जमशेदपुर की इशिता डे, बोकारो की डॉक्टर निरुपमा कुमारी और सिमडेगा के स्मिथ कुमार सोनी शामिल हैं. इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी मौजूद रहे.

इधर संबंधित जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक शामिल हुए. राष्टपति के सामने शिक्षकों ने अपना अनुभव भी साझा किया. 

चास की निरुपमा 

बोकोरा में चास स्थित रामरुद्र प्लस टू उच्च विद्यालय में डॉ निरूपमा हिंदी पढ़ाती हैं. 39 साल की यह शिक्षक 13 वर्षों से अध्यापन के क्षेत्र में अपने इनोवेटिव आइडियाज के लिए जानी जाती हैं. 

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पुरस्कार मिलने के बाद निरुपमा की पहली प्रतिक्रिया थी, ''एक शिक्षक के लिए बड़ा सपना होता है कि उसे यह सर्वोच्च शिक्षक सम्मान मिले. इसके लिए उन्हें प्रसन्नता हो रही है. पुरस्कार का श्रेय अपने शिक्षकों, मार्गदर्शकों के साथ विद्यार्थियों के नाम समर्पित है. बच्चों ने ही उन्हें एक सफल शिक्षक बनाया है''. 

डॉ. निरुपमा कहती हैं, भाषा के क्षेत्र में आईटी का उपयोग कर बच्चों के लिए अध्यापन को सहज बनाने की उनकी पहल रंग लाने लगी है.

इसके अलावा शिक्षण में अभिनव प्रयोग, ई-कंटेंट के निर्माण, वेबसाइट के जरिए अध्यापन और कोरोना महामारी के दौर में महत्वपूर्ण कार्यों के जरिए बच्चो को सहज तरीके से पढ़ाने की कोशिशें की. निर्णायक मंडली ने उनके प्रयासों को सराहा है. 

वे बताती हैं कि बंगाली, कुड़माली और खोरठा भाषा-भाषी बच्चों को हिंदी पढ़ने में काफी दिक्कतें आती थीं. 

तब बच्चों को वर्गीकृत कर उन पर खास ध्यान देती थीं. तेज, मध्यम स्तरीय और कमजोर बच्चों को अलग-अलग समूह में और गोलाकार बैठाकर वह पढ़ाती रही हैं. बच्चों के लिए वह खास तौर से वर्कशीट बनाती रही हैं, जिससे सही तरीके से पाठ याद रख पाते थे. 

जमशेदपुर की इशिता डे

जमशेदपुर की इशिता डे को भी इस साल का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है. 17 सालों से शिक्षण कार्य से जुड़ीं एग्रिको स्थित तारापोर की वाइंस प्रिंसिपल हैं.

12वीं के बच्चों को वे अर्थशास्त्र और 10वीं क्लास में भूगोल पढ़ाती हैं. लेकिन गणित को इनोवेटिव आइडिया के साथ समझाने में मदद करती रही हैं. 

इशिका डे ने तीन सरकारी स्कूलों को गोद लिाय है. उन तीनों स्कूलो में नए आइडिया के साथ बच्चों को शिक्षा की तेज रफ्तार में शामिल होने के लिए मोटिवेट करती हैं. 

उन्होंने दो वर्ष पूर्व ही स्कूल का लेशन प्लान नई शिक्षा नीति के अनुसार बनाई. बच्चों के साथ बेहतर तालमेल पढ़ाई को रुचिकर बनाने के लिए उनके प्रयासों को सराहा जाता रहा है.

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और इन्ही विशिष्टताओं की वजह से राष्ट्रीय सम्मान के लिए उनका चयन भी हुआ. पुरस्कार पाने के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया थी. पढ़ना और बच्चों को पढ़ाना यही हमारी पसंद है. 

उनका कहना था कि पिता से मिली प्रेरणा पर मैं शिक्षण कार्यों से जुड़ी. जबकि पति और घर- परिवार तथा स्कूल के प्राचार्य का हमेशा सहयोग मिला. 

बानो सरकारी स्कूल के स्मिथ सोनी

मूल रूप से गुमला जिले के बसिया निवासी स्मिथ कुमार सोनी अभी  मध्य विद्यालय बानो में कार्यरत हैं. तबादले के बाद जब वे इस विद्यालय आए तो यहां बच्चों की संख्या बहुत कम थी और पढ़ाई का वातावरण नहीं था. 

इसके बाद उन्होंने मोर्चा संभाला. गांवों में घर- घर गए. और लोगों को अहसास कराया कि बेटी पढ़ेगी, तो आगे बढ़ेगी.

उनके प्रयासों स्कूल में लगभग पांच सौ बच्चे हो गए इसके साथ ही रिजल्ट भी शत- प्रतिशत होने लगा.

सोनी की एक खासियत है कि वे पढ़ाई के दौरान बेटे- बटियों के बीच फर्क नहीं करते और साथ ही अभिभावकों से बेलाग कहते हैं कि वे भी कतई फर्क नहीं करें.  

शिक्षक सोनी बच्चों को बच्चों को हमेशा आइडिया के साथ किताबों से जोड़ते हैं.लॉकडाउन में उन्होंने बच्चों को पढ़ाई के कई गुर बताए और कई मौके पर गांवों में घूम- घूम कर बच्चों से बातचीत कर उनकी  समस्याओं को दूर करने की कोशिशें की.    

स्मिथ कुमार सोनी ने अम्बा टोली कोलेबिरा स्कूल से शिक्षण की शुरुआत 1994 में की थी.

उनके साथ ही ज्वाइन करने वाले साथी शिक्षक श्यामसुंदर सिंह के अनुसार स्मिथ शुरू से ही अपना हर काम पक्का और पू्र्ण करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. 

बच्चों को पढ़ाने और उनका सर्वांगीण विकास करने के लिए उनका समर्पण सदा ही बाकी शिक्षकों के लिए अनुकरणीय रहा.

सरकार ने उनकी लगन, सेवा समर्पण और उनके आइडियाज को देखते हुए राज्यस्तरीय परिवर्तन दल में भी शामिल किया था.

उनके कई सुझाव शिक्षा सुधार तथा नवाचार कार्यक्रम में अपनाए गए. उनके विद्यालय ने हमेशा ही स्वच्छता के लिए पुरस्कार जीता है.

राष्ट्रपति से सम्मान मिलने पर पहली प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा है, यह सपने से कम नहीं है. पुरस्कार की गरिमा को बनाए रखने के लिए और अधिक परिश्रम के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा. 

इसके साथ ही उन्होंने गांवों के लोगों से अपील की है कि बच्चों को स्कूल जरूर भेजें और पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित करते रहें. 


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