झारखंड के तीन लाख प्रवासी मजदूरों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया

झारखंड के तीन लाख प्रवासी मजदूरों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया
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पीबी ब्यूरो ,   May 07, 2020

लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे झारखंड के क़रीब 3 लाख प्रवासी लोगों ने घर वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. इनमें से अधिकतर मज़दूर हैं.

ये रजिस्ट्रेशन राज्य सरकार द्वारा वापसी के लिए जारी वेबसाइट लिंक और गूगल डॉक्यूमेंट पर उपलब्ध फ़ार्म के जरिए कराए गए हैं.

यह जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को मीडिया को दी है. उन्होंने कहा है कि जितने भी प्रवासी घर लौटना चाहेंगे, सरकार उनकी हर तरह से मदद करेगी. अब तक लगभग 20 हजार मजदूर लौट चुके हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा : प्रवासी मज़दूर जबतक वापस आना चाहें, हम उनकी मदद करेंगे. झारखंड वापसी पर उनके लिए रोजगार का भी इंतजाम कराया जाएगा. इसके लिए हम तीन महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं.

इन योजनाओं पर पांच साल में 20 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. झारखंड सरकार ने कहा है कि उनके किसी मज़दूर को रेल किराया नहीं देना होगा. यहां फँसे दूसरे राज्यों के लोगों को भी सरकार अपनी ख़र्च पर वापस उनके घर भेजेगी.

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यह सिलसिला शुरू हो चुका है. केरल और गुजरात से झारखंड आई श्रमिक ट्रेनों के यात्रियों से रेलवे द्वारा किराया वसूले जाने के विवाद के बाद सरकार की तरफ से यह महत्वपूर्ण बयान है.

कोरोना संकट में फंसे मज़दूरों की सहायता के लिए झारखंड सरकार द्वारा नियुक्त मुख्य नोडल अधिकारी अमरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिन राज्यों ने हमारे प्रवासी मज़दूरों की वापसी का ख़र्च माँगा, हमने उन्हें पैसे भेजे. इस क्रम में हमने राजस्थान सरकार को 16 लाख रुपये भेजे ताकि कोटा से छात्रों को वापस लाया जा सके.

उस पैसे से सरकार ने रेलवे को 2 विशेष ट्रेनों का किराया भरा. इस बीच आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के प्रधान सचिवों ने एक साझा प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि शुरू के दिनों में बेहतर समन्वय नहीं होने और स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने के कारण केरल और गुजरात से झारखंड आए मज़दूरों को अपना किराया खुद भरना पड़ा लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

प्रधान सचिवों ने कहा कि कि हमलोगों ने विभिन्न राज्य सरकारों और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंधित बातचीत कर ली है. हमारी सरकार ने कहा है कि जो भी राज्य सरकार हमारे मज़दूरों का किराया नहीं देना चाहती है, उन्हें हमलोग पैसे भेज देंगे. किसी भी क़ीमत पर मज़दूरों को स्वयं पैसे नहीं देने होंगे.


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