मुंबई से स्कूटी चलाकर जमशेदपुर लौटीं सोनिया की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव, बेटे को देख खूब रोई

मुंबई से स्कूटी चलाकर जमशेदपुर लौटीं सोनिया की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव, बेटे को देख खूब रोई
पीबी ब्यूरो ,   Jul 26, 2020

वो 1800 किलोमीटर का सफर पीछे छूट गया है. सारी थकान मिट गई है. बेटे को देख कर अथाह सुकून मिला है. इसे आप मां का दर्द और दिल भी कह सकते हैं. सनिया दास अपने पांच साल के बेटे से मिलीं, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया कुछ यही थी. 

सोनिया दास की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद जमशेदपुर जिला प्रशासन ने शनिवार को उन्हें घर जाने की इजाजत दी. हालांकि उन्हें होम क्वारंटाइन में रहने को कहा गया है. 

पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सूरज कुमार बताते हैं कि जमशेदपुर आने के बाद सोनिया एवं साबिया बानू (साथी) की कोविड जांच त्वरित कराई गई. रिपोर्ट निगेटिव आई है. दोनों को होम क्वारंटाइन में एहतियात के साथ रहने की सलाह दी गई है. 

इसके साथ ही जमशेदपुर जिला प्रशासन ने पांच हजार रुपए और राशन की मदद भी पहुंचाई है. उपायुक्त ने यह भी जानकारी दी है कि सोनिया दास के परिवार को पांच हजा रुपए की आर्थिक सहायता के साथ राशन उपलब्ध कराई गई है. 

शनिवार को ही जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र के विशेष पदाधिकारी कृष्ण कुमार और डीएसपी अरविंद कुमार सरकारी मदद लेकर उनके घर पहुंचे थे. 

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इससे पहले जमशेदपुर पहुंचने पर सोनिया दास को टेल्को स्थित नेपाल हाउस क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था. 

मुंबई में काम छूटा

इससे पहले सोनिया दास ने ट्विटर तथा सोशल साइट के अन्य माध्यमों के जरिए महाराष्ट्र और झारखंड सरकार से मदद की गुहार लगाई थी. लेकिन मदद की आस धरी रह गई.
 
सोनिया जमशेदरपुर में सोनारी की रहने वाली हैं. वे मुंबई में प्राइवेट नौकरी करती थी. लेकिन लॉकडाउन में बेरोजगार हो गई. किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने घर से निकाल दिया. काफी दिन अपनी महिला साथी के घर पर रहीं. 

इधर मां के बिना पांच साल का बेटा बेहद परेशान रहा. पति भी प्रशासन से मदद की आस लगाते रहे. उधर एक मा की छाती हुक मारती रही. 

इसके बाद कई लोगों से उधार लेकर उन्होंने पांच हजार जमा किए और स्कूटी से अपनी एक सहेली के साथ जमशेदपुर के लिए निकल पड़ी. चार दिनों तक का सफर तय कर शुक्रवार की शाम वो जमशेदपुर पहुंची. 

रास्ते में वे कुछ देर के लिए पेट्रोल पंप पर रुकती थीं या फिर किसी ढाबा में खाना खाकर कुछ देर आराम करती थीं. चार रात उनकी आंखों में नींद नहीं आई. जबकि रायगढ़ में शाम हो जाने पर उन्हें आगे सफर करने से रोक दिया गया था.

लेकिन वह वक्त भी आया, जब हिम्मत के साथ वो जमशेदपुर लौटने में सफल रही. 


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