कुंडली देख लें, टाटा हॉस्पिटल में मेरा जन्म हुआ है, हेमंत से ज्यादा झारखंडी हूं- रघुवर दास

कुंडली देख लें, टाटा हॉस्पिटल में मेरा जन्म हुआ है, हेमंत से ज्यादा झारखंडी हूं- रघुवर दास
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पीबी ब्यूरो ,   Oct 20, 2019

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि वे हेमंत सोरेन से ज्यादा झारखंडी हैं. कोई कुंडली देख सकता है. टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में मेरा जन्म हुआ है. शनिवार को संताल परगना के दौरे पर गए मुख्यमंत्री ने दुमका स्थित राजभवन पत्रकारों से ये बातें कही. 

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन अपने को झारखंडी कहते हैं कि जबकि झारखंड का सबसे अधिक अहित हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने किया है.

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री रहते संताली को भी मान्यता नहीं दी. सीसेट लागू करा दिया था. हम सरकार में आए, तो सीसेट को समाप्त किया. इससे झारखंड कर्मचारी चयन आयोग और झारखंड लोकसेवा आयोग की परीक्षाओं में क्षेत्रीय भाषा को बी सम्मलित किया गया है. 

रघुवर दास ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बौखला गए हैं. इसकी वजह है कि संताल परगना में उनकी (हेमंत) की जमीन खिसकती चली जा रही है. 

रघुवर दास ने कहा कि ‘चूहा’ शब्द का प्रयोग करनेवाले को पौराणिक कथा पढ़नी चाहिए. लिखाई-पढ़ाई से उन्हें (हेमंत सोरेन को) मतलब नहीं रहा.
 
 जानना चाहिए कि चूहा भगवान गणेश का वाहन है. उनका प्रतीक है. भगवान गणेश कष्ट निवारक देवता हैं. जो कष्ट 14 वर्षों में झामुमो-कांग्रेस ने दिया है, वह कष्ट चूहा व गणेश भगवान ही दूर करेंगे. उन्होंने कहा यह साफ दिख रहा है कि इस बार हम 65 नहीं 70 पार करेंगे. समाज को बांटनेवालों की नहीं, विकास की राजनीति चलेगी.

इसे भी पढ़ें: झारखंड: सहायक प्राध्यापकों की भूख हड़ताल जारी, दो की तबीयत बिगड़ी

गौरतलब है कि संताल परगना की चुनावी राजनीति में वर्चस्व जमाने और तोड़ने की रणनीति के बीच जेएमएम और बीजेपी के नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज होती जा रही है.

हाल ही में हेमंत सोरेन ने कहा था कि चूहेदानी में बंद कर रघुवर दास को छत्तसीगढ़ भेजने का समय आ गया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा भी बना रखा है. जेएमएम के नेता कई मौके पर कहते रहे हैं कि झारखंडी ही मुख्यमंत्री होगा. 

गौरतलब है कि रघुवर दास मूल तौर पर छत्तीसगढ़ के हैं. लेकिन दशकों से झारखंड में रहते रहे हैं और जमशेदपुर पूर्वी सीट से पांच बार चुनाव जीते हैं. सरकार की स्थानीय नीति के हिसाब से भी वे झारखंडी हैं. 

उधर शुक्रवार को दुमका की विधायक और राज्य की महिला बाल विकास मंत्री लुइस मरांडी ने रघुवर दास का बचाव करते हुए कहा था कि हेमंत सोरेन के लिए दुमका में अब कोई जगह नहीं है. उनकी राजनीति रामगढ़ में ही दफन कर देंगे. 

मंत्री लुइस मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन रामगढ़ के गोला के रहने वाले हैं. अब संताल परगना में उनका कोई काम नहीं है. हम बीजेपी वाले रामगढ़ में ही उनकी ( हेमंत) की राजनीति को दफन करने के लिए तैयार बैठे हैं. वे दुमका में पैर जमाने की कोशिश न करें, तो अच्छा होगा. 

उधर शनिवार को रघुवर दास ने बरहेट में सभा की. और लोगों से कहा कि रामगढ़ के गोला का रहने वाले को बरहेट का प्रतिनिधि नहीं बनाएं. गौरतलब है कि 2014 में हेमंत सोरेन बरहेट से चुनाव जीते थे. 

रघुवर दास ने बरहेट के लोगों से कहा कि स्थानीय़ को अपना जनप्रतिनिधि बनाएं. गोला के रहने वाले सोरेन परिवार ने संताल परगना का बहुत अहित किया है. 

 


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