झारखंड में रोजगार का संकट, पर बहुत गांवों में मनरेगा के काम नहीं खुलेः सर्वे रिपोर्ट

झारखंड में रोजगार का संकट, पर बहुत गांवों में मनरेगा के काम नहीं खुलेः सर्वे रिपोर्ट
Publicbol (File Photo)
पीबी ब्यूरो ,   May 26, 2020

लॉकडाउन से उपजे असाधारण स्थिति और रोजगार पर संकट के बीच झारखंड के सुदूर इलाकों में मनरेगा के काम अब तक नहीं खुले हैं.

भोजन के अधिकार अभियान ने आम आदमी को खाना, काम देने के लिए मनरेगा समेत कई योजनाओं की जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कर एक रिपोर्ट जारी की है. 

मई महीने के दूसरे और तीसरे हफ्ते में जमीनी हालात की जुटाई गई जानकारी के अनुसार मनरेगा के तहत हर गांव में व्यापक पैमाने पर कच्ची बड़ी योजनाएं शुरू किए जाने और साप्ताहिक नगद भुगतान की व्यवस्था के अलावा जन वितरण प्रणाली को ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वभौमिक करनी चाहिए. पर जोर दिया गया है. 

अशर्फी नंद प्रसाद के नेतृत्व में सर्वेक्षण दल में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता पल्लवी प्रतिभा, विवेक, विपुल पैकरा और तान्या ने मई के दूसरे तथा तीसरे हफ्ते में 22 ज़िलों के 46 प्रखंडों से प्रेक्षकों के मार्फत जानकारी जुटाई है. 

भोजन के अधिकार अभियान सर्वेक्षण दल का कहना है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में रोजगार अहम चुनौती है. 46 सर्वेक्षित प्रखंडों में से केवल 29 प्रखंडों के गांवों में मनरेगा की योजनाएं खुली हैं.

In 37 out of 46 blocks, there are long queues and overcrowding outside the banks. People have to queue for hours, sometimes standing in the sun. Specially abled and older people are facing many difficulties in withdrawing money.

— Right to Food Jharkhand (@righttofoodjhk) May 26, 2020

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अनेक गावों में छोटी योजनाएं, मसलन टीसीबी आदि शुरू की गयी हैं जिससे सभी मज़दूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है.

हालांकि हर गांव में मनरेगा के तहत रोज़गार के पाने लिए अनेक मज़दूर इच्छुक हैं. कई प्रवासी मजदूरों के पास जॉबकार्ड नहीं है और आवेदन करने की प्रक्रिया की जटिलता के कारण भी अनेक मज़दूर काम नहीं मांग पा रहे हैं.

साथ ही मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था में कमी है. कई प्रखंडों में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी नियुक्त नहीं हैं.

बैंकों के सामने लंबी कतारें

46 प्रखंडो में स्थित बैंकों में से 37 बैंकों के बाहर लंबी कतार और भीड़ लगती है. लोगो को पैसे निकासी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है. कड़ी धूप का सामना करने से लोग बेहद परेशान दिखते हैं. 

दिव्यांग और वृद्ध लोगों को पैसे निकालने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. हालाँकि, 46 प्रखंडो में से 41 में प्रेक्षकों के पंचायत से नजदीक प्रज्ञा केंद्र या ग्राहक सेवा केंद्र खुले हैं लेकिन इनमें से कम-से-कम 13 केंद्रों में लोगो को पैसे निकालने में समस्या का सामना करना पड़ता है. 

लिंक फेल होना, बायोमेट्रिक मशीन में उँगलियों के निशान सत्यापित न होना, पैसे की कमी, कुछ प्रखंडों में तो बायोमेट्रिक सत्यापन होने के बाद भी लोगो को नगद पैसे लेने के लिए दोबारा अगले दिन आना जैसी समस्याएं भी सामने हैं.

लिहाजा मनरेगा मज़दूरों के लिए अपनी मज़दूरी भुगतान बैंक खाते से निकालना भी चुनौतीपूर्ण होगा.


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