अक्षम नौकरशाही, संवेदनहीन सरकार, गर्त में जाता झारखंड का उद्योग-व्यापारः चैंबर ऑफ कॉमर्स

अक्षम नौकरशाही, संवेदनहीन सरकार, गर्त में जाता झारखंड का उद्योग-व्यापारः चैंबर ऑफ कॉमर्स
FJCCI
पीबी ब्यूरो ,   Aug 21, 2019

फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने आज राजधानी रांची में सरकार और नौकरशाही के कामकाज के साथ सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा किया. चैंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने प्रेस कांफ्रेस करके कहा कि अक्षम पदाधिकारी, व्यापार जगत के साथ संवादहीनता, सरकार की असंवेदनशीलता और कार्यप्रणाली की वजह से झारखंड राज्य में भी मंदी का दौर शुरू हुआ है. कई विभागों द्वारा लागू की गई गैरजरूरी कानूनों की वजह से व्यापार जगत परेशान है.    

चैंबर के अध्यक्ष दीपक मारू ने कहा कि राज्य में पावरकट की भयावह समस्या, अंचल कार्योलयों के साथ भूमि सुधार राजस्व , परिवहन, निगर विकास विभाग, नगर निगमों की नाकामियां और सिंगलविंडो सिस्टम से त्रस्त होकर चैंबर ऑफ कामर्स ने यह रुख अख्तियार किया है. उन्होंने बताया कि सरकार की इन नाकामियों के खिलाफ पूरे राज्य में मुहिम शुरू की जा रही है. 
 
सीएम आवास के निकट लगाए होर्डिंग

इससे पहले चैंबर ऑफ कामर्स ने मुख्यमंत्री आवास के पास एक होर्डिंग लगाया है. इसमें उद्योग व्यापार की हालत का जिक्र करने के साथ स्लोगन दिया है- 'व्यापारियों की मार्मिक पुकार अब तो सुध लो सरकार'. 

इसके अलावा इसी होर्डिंग में दो और नारे दिए गए हैं- 'ट्रांसपोर्टिंग का कारोबार, पुलिस-अफसर से है लाचार', 'औद्योगिक क्षेत्र का हाल बुरा है, नाली- नाला कचरा भरा है' जाहिर है राज्य में व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और रांची के विधायक सह नगर विकास मंत्री को निशाने पर लिया है. 

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गौरतलब है कि इससे पहले भी चैंबर ने प्रेस कांफ्रेस करके राज्य की बिजली व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा किया था. और साफ तौर पर कहा था जेबीवीएनएल में अफसरों के रहते राज्य की बिजली व्यवस्था कभी नहीं सुधर सकती.  

चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि परिवहन, भूमि सुधार राजस्व विभाग, सिंगल विंडो समेत की काम ऑनलाइन हैं, लेकिन आज भी बगैर व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कोई विभागों में कोई काम नहीं होता. जबकि व्यापारी, उद्यमी और प्रोफेशनल, सरकार के लिए राजस्व संग्रहकर्ता के तौर पर काम करते हैं लेकिन सरकार हमारे विकास के बारे में नहीं सोचती.

मोमेंटम झारखंड का मकसद कुछ और

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार करदाताओं का सम्मान करती है, लेकिन झारखंड में तस्वीर उलट है. मौजूदा हालात से नहीं लगता कि झारखंड में अफसरों को उद्योग या व्यापार की समस्याओं से कोई सरोकार है. सरकार का उन पर (अफसरों) कोई नियंत्रण नहीं रह गया है. दीपक मारू ने कहा है कि मोमेंटम झारखंड के आयोजन से ही जगजाहिर हो गया था कि अफसरों की प्राथमिकता औद्योगीकरण न होकर कुछ और ही है.

बड़े- बड़े दावों के बाद भी पुरानी फैक्ट्रियों का बंद होना जारी है. औद्योगिक क्षेत्र की तमाम मुश्किलों पर बातचीत के बाद भी सरकार और अफसरों ने कभी चैंबर के सुझावों पर विचार नहीं किया. अफसर बात नहीं करने बहाने ढूंढते हैं और मंत्री चुनावी मोड में है. जनता जाए, तो जाए कहां.  

कार्यपालिका-विधायिका में समन्वय नहीं

चैंबर में उद्योग उप समिति के चेयरमैन अजय भंडारी ने कहा कि राज्य में अफसरों और विधायिका के बीच समन्वय का भारी अभाव है. कार्यपालिका जब फेल हो जाती है, तो विधायिका की जिम्मेदारी बनती है कि वह चीजों को ठीक करे. लेकिन झारखंड के मंत्री अफसरों की रिपोर्ट और आंकड़ों को ही सच मानते हैं. जमीनी हकीकत से उन्हें कोई मतलब नहीं होता. उद्योग विभाग के पास कोई विजन नहीं है.

जबकि मोमेंटम झारखंड के दौरान चैंबर ने सरकार को चेताया था कि आप गलत रास्ते पर जा रहे हैं. स्मार्ट सिटी के काम में लगे अधिकतर ठेकेदार बाहरी हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच ट्रिलियन की अर्थ व्यवस्था को हासिल करने के लिए राज्य सरकार को संवेदनशील होना पड़ेगा.  

सरकार का जेबीवीएनएल से मोह

बिजली उप समिति के चेयरमैन बिनोद तुलस्यान ने प्रेस कांफ्रेस में आरोप लगाया कि बिजली की मौजूदा हालत व्यापार को बर्बाद करने के लिए काफी है. लेकिन जिद का आलम यह है कि हजार करोड़ घाटा खाने वाला और भ्रष्टाचार में कंठ तक डूबा जेबीवीनएल को सरकार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है.

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राज्य में बिजली वितरण और संचरण की व्यवस्था बेहद खराब है. चैंबर ने कई बार बैठक करने का आग्रह किया, लेकिन नहीं सुना गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकतर विकास योजनाओं को इस तरह तैयार की जाती है, जिससे स्थानीय व्यापारी और उद्योगपति उसका छोटा हिस्सा हो पाते हैं. हजारों करोड़ की सोलर पेयजल योजना और स्मार्ट सिटी इसका ताजा उदाहरण है.

बस ट्रांसपोर्टेशन के अरूण बुधिया ने बताया कि इतनी परेशानी बढ़ा दी गई है कि कोई इस कारोबार में आना नहीं चाहता. बिनो नेमानी ने भी सरकारी विभागों के कामकाज पर कई सवाल उठाए.  


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