'क्या काठीकुंड, गोइलकेरा गया था एग्जिट पोल वाला, आंख बंद डिब्बा गायब नहीं चलने वाला'

'क्या काठीकुंड, गोइलकेरा गया था एग्जिट पोल वाला, आंख बंद डिब्बा गायब नहीं चलने वाला'
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पीबी ब्यूरो ,   May 22, 2019

क्या संताल परगना में काठीकुंड, शिकारीपाड़ा, कोल्हान में बंदगाव, गोइलकेरा या जंगल, पहाड़ में रहने वाले आदिवासियों से एग्जिट पोल वालों ने बतियाया था. क्या अड़की के गांव तक ऊ लोग पहुंच सका है. हमरा जो वोटर या समर्थक है उन तक पहुंचे बिना कोई एग्जिट पोल जारी कर दे, तो हमलोग बहुत घबराते नहीं. ई तो आंख बंद डिब्बा गायब  जैसा खेला है. जबकि आदिवासी, दलित, किसान,मजदूर ने ठोक ठठाकर वोट दिया है. 

मेन रोड और शहरों में दस लोग से बात कर लिए और बता दिए कि बीजेपी 12 और गठबंधन दो सीट पर जीतेगा. इस बार आदिवासी, अकलियत, किसान, मजदूर का वोट बोलेगा. इसलिए आखिरी ईवीएम की गिनती तक हम इंतजार करेंगे. 

झारखंड में लोकसभा चुनाव को लेकर सामने आए एग्जिट पोल के अनुमानों को सिरे से खारिज करते हुए पूर्व मंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय महासचिव बंधु तिर्की अपने अंदाज में और एक सांस में यह सब बोल जाते हैं. 

बंधु तिर्की कहते हैं, ''रांची, लोहरदगा, खूंटी, चाईबासा, दुमका में उन्होंने दर्जनों आदिवासी गांवों में प्रचार किया है. कई दिनों तक लोगों के बीच आते- जाते रहे. हम भी चुनाव के समीकरण और हवा का रुख समझते हैं. इसलिए अभी एग्जिट पोल को नहीं मानेंगे. उनका कहना है कि राज्य में रघुवर दास की सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा है. बीजेपी वालों को भी पता है. लेकिन वेलोग (बीजेपी) मोदी के जादू के भरोसे में हैं. लेकिन झारखंड में आदिवासी, किसान मजदूर का जोर चलेगा कि मोदी का जादू इसे देखना है. बंधु इस बात पर जोर देते हैं कि गठबंधन के लोग जमीनी सवाल और मुद्दों को लेकर गांव- गिराव के लोगों के बीच गए हैं. परिणाम में इसका ही असर दिखेगा''.  

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बंधु तिर्की विपक्षी खेमे में अकेले नहीं हैं जिन्हें टीवी चैनलों और कुछ एजेंसियों के आए एग्जिट पोल पर एतबार नहीं है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य कहते हैं कि एजेंसियां जो सैंपलिंग करती हैं उसका प्रमाणीकरण क्या है. झारखंड में वोटरों का बड़ा हिस्सा दूरदराज के इलाकों में है. और इस बार सुदूर इलाके में जिस तरह से लोगों ने बीजेपी के खिलाफ वोट किया है, ईवीएम खुलने के बाद ही उसका पता चलेगा.  

सुप्रियो आगे कहते हैं कि एग्जिट पोल एजेंसियां शहरों- कस्बों में ज्यादा सैंपलिंग करती हैं. जबकि दूरदराज के इलाकों से वे इनपुट्स जुटाते हैं और नतीजे पर पहुंच जाते हैं. इसे जल्दीबाजी कह सकते हैं. और शहरों में भी जिन वोटरों से बातचीत की जाती है, तो गारंटी क्या है कि वोटर ने सच कहा. 

जेएमएम नेता को इंडिया टुडे- एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल पर ज्यादा आपत्ति है, जिसमें झारखंड में बीजेपी गठबंधन को 12 से 14 जबकि कांग्रेस गठबंधन को शून्य से दो सीटें मिलने का अनुमान है. सुप्रियो कहते हैं यह अनुमान देखने से यही लगता है कि सतही तौर पर तथ्य नहीं जुटाए गए. बीजेपी वालों से फीड लेकर इसे जारी कर दिया गया. इसलिए बीजेपी के रणनीतिकार और झारखंड के मुख्यमंत्री इससे खुश हो सकते हैं, लेकिन विपक्ष का गठबंधन इससे सकते में नहीं है. 

तब झारखंड में गठबंधन कितनी सीटों पर जीत हासिल करेगा, इस सवाल पर जेएमएम नेता कहते हैं कि दस सीट हमारे खाते में आएगी. चार सीटों पर कड़ी टक्कर है. सुप्रियो भट्टाचार्य दावा करते हैं कि संताल परगना की तीन सीटों पर गठबंधन की जीत तय है. सुप्रियो कहते हैं कि गांवों में आदिवासियों ने एकजुट होकर बीजेपी क खिलाफ वोट दिया है. इसलिए आदिवासियों के लिए सुरक्षित पांच लोकसभा क्षेत्रों में जेएमएम और सहयोगी दलों की जीत को लेकर हमलोग इत्मिनान हैं और दुमका में तो गुरुजी (शिबू सोरेन) की बड़ी जीत होगी. 

सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खां कहते हैं कि कम से कम झारखंड की 14 सीटों को लेकर एग्जिट पोल में जिस तरह के अनुमान बताए गए हैं वह भरोसे लायक नहीं लगता. विपक्ष का वोट समीकरण मजबूत है जिसकी चर्चा नहीं हो रही. शहरों से रूझान तय कर लिए जा रहे हैं. इसलिेए परिणाम आने तक इंतजार करना होगा. 

कांग्रेस के नेता और कई संगठनों का प्रतिनिधित्व करते रहे प्रभाकर तिर्की कहते हैं कि आदिवासी वोटों का बड़ा हिस्सा बीजेपी के खिलाफ गया है. क्योंकि जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा और कई जमीनी सवाल पर आंदोलन को लेकर वे सरकार के खिलाफ बहुत पहले से गोलबंद हो रहे थे. खूंटी से लेकर कोल्हान और फिर संताल में आदिवासी बीजेपी और उसकी सरकारों के खिलाफ गए हैं. झारखंड को लेकर जिस किस्म के एग्जिट पोल सामने आए हैं उस पर भरोसा नहीं जमता. 

गौरतलब है कि चुनाव को लेकर जो तस्वीरें उभरी है, उसमें झारखंड की दुमका, राजमहल, गोड्डा, खूंटी, चाईबासा, लोहरदगा, रांची, गिरिडीह, कोडरमा, जमशेदपुर, पलामू में विपक्ष की बीजेपी से सीधी टक्कर होती दिखाई पड़ रही है.   

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