गोड्डाः पांच थाने की पुलिस ने कहा, कांग्रेस विधायक दीपिका धौंस दिखाती हैं, हम सबका तबादला कर दें

गोड्डाः पांच थाने की पुलिस ने कहा, कांग्रेस विधायक दीपिका धौंस दिखाती हैं, हम सबका तबादला कर दें
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पीबी ब्यूरो ,   Apr 24, 2020

झारखंड में कांग्रेस विधायक दीपिका सिंह पांडेय के धरने पर बैठने और कथित तौर पर हंगामे के बीच महगामा थाना प्रभारी को निलंबित किए जाने के मामले पर उपजे विवाद ने तूल पकड़ लिया है.

गोड्डा के पुलिस अधीक्षक ने महगामा के थाना प्रभारी बलिराम रावत को सस्पेंड कर दिया गया है.

इस बीच महगामा विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले पांच थाना के प्रभारियों और सभी पुलिस कर्मियों ने विधायक के रवैए के खिलाफ सामूहिक तौर पर तबादले की मांग की है.

साथ ही एसोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. 

दुमका के डीआईजी राजकुमार लकड़ा ने महगामा थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की पुष्टि की है.

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उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज किए जाने में विलंब करने तथा कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में थाना प्रभारी को जिले के एसपी ने सस्पेंड कर दिया है.

महागामा में दूसरे प्रभारी की पोस्टिंग करने का उन्होंने निर्देश दिया है. 

यह विवाद टीवी चैनल के पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर है. 

चैनल पर एक डिबेट के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पर पत्रकार अर्णब की कथित विवादित टिप्पणी को लेकर विधायक दीपिका सिंह पांडेय ने बुधवार को महागामा थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन पहुंची थीं.

आरोप है कि काफी देर तक प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने पर विधायक धरने पर बैठ गईं. इसके बाद थाना में बड़ी संख्या में विधायक समर्थक जुट गए. 

घटना की सूचना मिलने पर गोड्डा के एसपी शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल देर रात महागामा थाना पहुंचे और विधायक से मामले की जानकारी ली.

विधायक, थाना प्रभारी को हटाने की मांग पर अड़ी थीं. एसपी के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ. जबकि उनकी लिखित शिकायत पर पत्रकार अर्णब के खिलाफ थाना में मामला दर्ज कर लिया गया. 

इसके साथ ही महगामा के थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया. 

इस बीच विवाद काफी बढ़ने के बाद दुमका के डीआईजी राजकुमार लकड़ा भी महगामा पहुंचे.

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उन्होंने कहा कि विधायक तथा पुलिस के अधिकारियों से उन्होंने बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली.

प्रथम दृष्टया थाना प्रभारी की लापरवाही के मद्देनजर उन्हें सस्पेंड किया गया है. 

डीआईजी ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी में यह बात नहीं आई है कि महगामा विधानसभा क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों ने सामूहिक तौर पर तबादले की मांग की है.

उन्होंने कहा कि पूरे मामले पर गोड्डा के एसपी नजर बनाए हुए हैं. 

इससे पहले विधायक ने शिकायत की थी कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दिए गए आवेदन पर थाना प्रभारी  टाल-मटोल करते रहे. 

जानकारी के मुताबिक धरने पर बैठीं विधायक थाना प्रभारी को तत्काल सस्पेंड किए जाने पर अड़ी रहीं. हालांकि आला अधिकारी बातचीत के साथ इस मामले को सुलझाने की कोशिशें जरूर करते रहे. . 

लेकिन सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायक का पुलिस के आला अधिकारियों से कहना था कि जब एक जनप्रतिनिधि की शिकायत की अनदेखी की जाती है, तो आम आदमी के साथ पुलिस का क्या रवैया हो सकता है. 

 

उधर  महगामा थाना प्रभारी के निलंबन के बाद गुरुवार को ही विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले हनवारा, बेलबड्डा, महगामा, मेहरमा और ठाकुर गंगटी के थाना प्रभारियों समेत सभी पुलिसकर्मियों ने सामूहिक तौर पर तबादले की मांग की है. 

पुलिस अधीक्षक और पुलिस एसोसिएशन तथा पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष को भेजे गए लिखित और हस्ताक्षरयुक्त आवेदन में कहा गया है कि स्थानीय विधायक और उनके कार्यकर्ताओं के रवैए और व्यवहार से काम करना कठिन हो गया है.

वे बात- बात पर निलंबन की धमकी देते हैं, जिससे उनके आत्मसम्मान को ठेंस पहुंच रहा है.  विधायक के कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा लॉक डाउन का उल्लंघन लगातार किया जाता रहा है. 

इसलिए उनका तबादला महागामा छोड़कर जिले के दूसरे इलाके में कर दिया जाए. कोरोना संकटट से निपटने के लिए उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी गई है, उससे वे पीछे नहीं हटेंगे. 

बीजेपी की कड़ी आपत्ति

इधर बीजेपी झारखंड प्रदेश के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने ट्वीट कर कांग्रेस विधायक के इस रवैये पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है, जान की बाजी लगाकर ड्यूटी करने वाले पुलिस अधिकारियों के साथ कांग्रेस विधायक ने बदसलूकी की. वे खुद 50 लोगों के साथ थाने पहुंचीं. उन पर प्राथमिकी क्यों नहीं हुई. 

वहीं, बीजेपी के सांसद समीर उराव ने बयान जारी कर कहा है कि कोरोना संकट के बीच राज्य में सरकार के घटक दल के नेता कानून का उल्लंघन करते हुए भय और आतंक का माहौल खड़ा कर रहे है.

उन्होंने कहा कि इस राज्य में जनता का क्या होगा जहां पुलिस प्रशासन के लोग ही भयभीत और आक्रांत हों. 

उन्होंने कहा कि आज कोरोना संकट में पुलिस निरंतर ड्यूटी के साथ लोगों की सेवा में जुटे हैं, कानून व्यवस्था को बनाने में दिनरात परिश्रम किया है ऐसी परिस्थिति में एक विधायक के द्वारा अनावश्यक दबाव डालना लोकतंत्र को कलंकित करना है. इसके साथ ही सांसद ने विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. 

बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि यह सरकार धौंस दिखाकर अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिये बनी है. ट्रांसफर और निलंबन का भय दिखाकर अधिकारियों से नियम विरुद्ध कार्य कराने की कोशिशें लगातार की जा रही है.

 चाहे रांची से लॉक डाउन में बसों को बाहर भेजे जाने का मामला हो, या मेहरामा ब्लॉक में पीडीएस पर निगरानी के लविए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की प्रतिनियुक्ति करानी हो ,एक ही मंशा झलकती है कि सत्तारूढ़ दलों के नेता पावर का बेजा इस्तेमाल करने में जुटे हैं.  

उधर विधायक की लिखित शिकायत पर पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ महगामा थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है. 

इस बाबत विधायक ने ट्वीट और फेसबुक वाल पर लिखा है, '' अर्णब गोस्वामी ने साज़िशन पालघर मामले में सोनिया जी का नाम घसीटा और अपने वक्तव्य से देश की जनता के सद्भाव को समुदाय के आधार पर भड़काने की कोशिश की है. उनके खिलाफ गोड्डा जिले के महगामा थाना में मामला दर्ज कराया गया है.''

विधायक ने पत्रकार अर्णब के खिलाफ ट्विटर पर वक्तव्य भी दिया है. 

एसोसिएशन ने खोला मोर्चा

इस बीच पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय ने इस मामले में कहा है कि पुलिस पर लापरवाही बरतने के लिए नियम संगम कार्रवाई की जाती है. लेकिन विधायक का अपने पद का दुरूपयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. किसी भी माननीय को पुलिसकर्मियों का सम्मान लेने का अधिकार नहीं है.

जबकि झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने प्रेस के लिए बयान जारी कर पूरी घटना की चर्चा की है और विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. 

एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह और महामंत्री अक्षय कुमार राम न कहा है कि महगामा थाना प्रभारी ने बताया है कि रात बुधवार रात 9 बजे विधायक अपने 40-50 समर्थकों के साथ थाना आई थीं. उन्होंने पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन दिया. 

मामला मुंबई का था, इसलिए विधायक से कहा गया कि इस मामले में वे अपने आला अधिकारियों से विचार विमर्श करने के बाद कांड दर्ज कर सकते हैं. इस बीच वे वरीय अधिकारियों से बात कर रहे थे कि विधायक धरने पर बैठ गईं और हंगामे पर उतारू हो गईं. 

आरोप निराधार है 

इधर गुरुवार को मामले में तूल पकड़ने के बाद विधायक ने कहा है कि पुलिस मैनुअल में स्पष्ट उल्लेखित है कि लिखित शिकायत देने पर थाना में प्राथमिकी दर्ज की जानी है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर अभद्र टिप्पणी करने पर मैंने अपने गृह क्षेत्र महागामा थाना में लिखित आवेदन दिया तो थाना प्रभारी की ओर से घंटों टालमटोल किया गया. जनप्रतिनिधि के साथ सामान्य व्यवहार के मर्यादा का भी पालन नहीं किया गया.

कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता पुलिस के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करता है. लॉक डाउन के अनुपालन और कोरोना आपदा में पीड़ित परिवारों को राहत दिलाने में कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता सेवाभाव के साथ जनसेवा में लगा हुआ है. पुलिस मेंस एसोसिएशन के आरोप निराधार और बेबुनियाद हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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