चाईबासा पत्थलगड़ी मामलाः अगवा किए गए सात लोगों की लाश जंगल से बरामद, तलाशी जारी

चाईबासा पत्थलगड़ी मामलाः अगवा किए गए सात लोगों की लाश जंगल से बरामद, तलाशी जारी
Publicbol (चक्रधरपुर के गुदड़ी इलाके में पुलिस कूच करती)
पीबी ब्यूरो ,   Jan 22, 2020

झारखंड में चक्रधरपुर अनुमंडल के गुदड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत बुरुगुलीकेरा गांव में कथित तौर पर पत्थलगड़ी का विरोध करने के दौरान अगवा किए गए सात ग्रामीणों की लाश पुलिस ने घने जंगलों से बरामद कर ली है. 

आरक्षी महानिरीक्षक (अभियान) साकेत कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया है कि यह घटना कैसे हुई और किन लोगों ने ग्रामीणों को मारा है, उसके बारे में अनुसंधान के साथ पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है. 

इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा है कि कानून को हाथ में लेने वाले जो भी दोषी होंगे उनपर कार्रवाई होगी. इसी मामले में वे आज राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा करेंगे. 

गौरतलब है कि 29 दिसंबर को सत्ता की बागडोर संभालने के बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने पूर्व में पत्थलगड़ी आंदोलन में दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने के फैसले लिए हैं. 

दो लोग लापता, तलाश जारी

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पुलिस अधिकारी साकेत कुमार ने बताया है कि लाशों की पहचान की जा रही है. पुलिस को पता चला है कि और दो लोग लापता हैं. इस खबर की भी पुष्टि की जा रही है.

उन्होंने बताया कि बुरुगुलीकेरा गांव से चार किलोमीटर दूर जंगल में अलग- अलग जगहों से लाशें मिली है. 

पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि शवों को देखने से लगता है कि ग्रामीणों की हत्या लाठी, डंडे और धारधार हथियार से नृशंस तरीके से की गयी है. कई लोगों के शव विभत्स हैं. लिहाजा पहचाने जाने लायक नहीं हैं.

उन्होंने बताया कि पुलिस को घटना की सूचना मंगलवार को प्राप्त हुई जिसके बाद मौके पर पुलिस दल को रवाना किया गया था.

कोल्हान के डीआईजी कुलदीप द्विवेदी और चाईबासा के एसपी इंद्रजीत महथा गुदड़ी में कैंप कर रहे हैं. जिला मुख्यालय से अतिरिक्त बल बुलाकर जगह-जगह तैनाती की गई है.

साथ ही राज्य मुख्यालय के अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. इस घटना के सामने आने से कई गांवों में सन्नाटा है. पत्थलगड़ी समर्थकों की गतिविधियां अचानक थम गई है. 

घटनास्थल जमशेदपुर से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर और चक्रधरपुर से 70 किमी तथा सोनुवा से 35 किमी सुदूर जंगल में है. गांव के चारों और पाहड़ हैं. 

पत्थलगड़ी समर्थक  

गौरतलब है कि गुदड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत बुरुगुलीकेरा गांव में पत्थलगड़ी का विरोध कर रहे सात ग्रामीणों का रविवार को अगवा कर लिया गया था. इनमें गुलीकेरा पंचायत के उपमुखिया जेम्स बूढ़ भी शामिल हैं. 

खबरों के मुताबिक पत्थलगड़ी समर्थक रविवार को बुरुगुलीकेरा गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक कर रहे थे. वे ग्रामीणों से वोटर कार्ड, आधार कार्ड जबरन जमा करने को कह रहे थे. साथ ही लोढ़ाई के पास पत्थलगड़ी करने की बात की जा रही थी.  

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इस दौरान उपमुखिया जेम्स बूढ़ सहित अन्य लोगों ने यह कहकर विरोध किया कि अगर वोटर कार्ड, आधार कार्ड आदि जमा कर देंगे तो बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत होगी. सरकारी योजना का लाभ कैसे मिलेगा. 

इससे नाराज पत्थलगड़ी समर्थक उपमुखिया जेम्स बूढ़और अन्य छह लोगों के साथ मारपीट करने लगे. इनके परिजन मारपीट के डर से वहां से भाग गए. हिंसक माहौल से वहां अफरा-तफरी मच गई. 

इसके बाद पत्थलगड़ी समर्थक उपमुखिया जेम्स बूढ़ और अन्य छह लोगों को उठाकर जंगल की ओर ले गए. रविवार देर रात तक उनके घर वापस नहीं लौटने पर सोमवार को उपमुखिया जेम्स बूढ़ और अन्य छह लोगों के परिजन गुदड़ी थाना पहुंचे.

उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस मामले की छानबीन में लगी रही. मंगलवार दोपहर को पुलिस को उपमुखिया जेम्स बूढ़ और अन्य छह लोगों की हत्या कर दिए जाने के बाद पुलिस महकमा हरकत में आया.

मंगलवार की शाम पुलिस के कई आला अधिकारी गुदड़ी पहुंचे. और ग्रामीणों की तलाशी के लिए रणनीति बनाने में जुटे. 

नक्सल प्रभावित इलाका और घने जंगल की वजह से रात में पुलिस को कार्रवाई में मुश्किलें आती रही. बुधवार सुबह पुलिस जंगलों में तलाशी अभियान लेने पहुंची. इस बीच एक- एक कर सात लाशें बरामद की गई.  

पुलिस को यह भी सूचना मिली है कि पत्थलगड़ी समर्थकों को कथित तौर पर नक्सलियों का समर्थन हासिल है. जंगलों में लैंड माइंस बिछाए जाने की आशंका से पुलिस को संभल कर कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है. 

खबरों के मुताबिक बुरूगुलीकेरा गांव में पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा गांव में घूम-घूम कर कुछ दस्तावेज मांग कर अपने पास जमा करने का काम पिछले कई दिनों से चल रहा है.

इसी दौरान बीते 17 जनवरी को भी पत्थलगड़ी समर्थक एकजुट हुए थे. और ग्रामीणों को दबाव में लेकर कागजात जमा करने कह रहे थे. जबकि गांव के बहुत लोग कागजात जमा करने के समर्थन में नहीं थे. 

गौरतलब है कि झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार ने पहले दिन ही 29 दिसंबर को सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन की कोशिश और पत्थगड़ी आंदोलन के दौरान आम लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का अहम फैसला लिया है. 

शपथ ग्रहण समारोह के बाद कैबिनेट की बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी गई. कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ सरकार के तीन नए मंत्री रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम और सत्यानंद भोक्ता शामिल थे. 

इससे पहले रघुवर दास की सरकार के समय सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के दौरान राज्य के अलग- अलग हिस्सों में आंदोलन हुए थे. खूंटी में ही पुलिस फायरिंग में एक आदिवासी की मौत हुई थी. जबकि गुस्साई भीड़ ने भी जगह- जगह आगजनी और तोड़फोड़ की थी.

पिछले साल पत्थलगड़ी को लेकर खूंटी समेत कोल्हान के कई हिस्से आंदोलन की आंच में सुलगते रहे.

इसी दौरान पत्थलगड़ी समर्थकों ने खूंटी से बीजेपी के पू्र्व सांसद कड़िया मुंडा के आवास से चार हाउसगार्ड को अगवा कर लिया था. तब बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस उनकी रिहाई करा सकी थी. 

रघुवर दास की सरकार में पत्थलगड़ी की आड़ में असंवैधानिक कार्यों को बढ़ाने देने के मामलों पर सख्त कार्रवाईयां की जाने लगी. जबकि खूंटी में हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने पत्थलगड़ी समर्थकों की घेराबंदी तेज करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया.  

पत्थगलड़ी को लेकर खूंटी में ही सैकड़ों लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हैं. और दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. तब रघुवर की सरकार ने दो टूक कहा था कि राज्य को अशांत करने और सरकारी योजना को बाधित करने की कोशिशों को नाकाम करेंगे. 

 


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