चाईबासा के प्रवासी आदिवासी की मौत, लाश पड़ी है वर्धा अस्पताल में, गम में डूबे हैं 15 मजदूर साथी

चाईबासा के प्रवासी आदिवासी की मौत, लाश पड़ी है वर्धा अस्पताल में, गम में डूबे हैं 15 मजदूर साथी
पीबी ब्यूरो ,   May 25, 2020

झारखंड के प्रवासी मजदूरों की बेबसी का अंतहीन सिलिसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा. पुणे से पैदल लौट रहे झारखंड के एक आदिवासी मजदूर विजय खंडाइत की मौत वर्धा में हो गई है. लाश वर्धा सरकारी अस्पताल में पड़ी है. जबकि पंद्रह मजदूर साथी गम में डूबे हैं. 

कानू खंडाइत बताते हैं कि विजय खंडाइत की मौत 24 मई की सुबह में हुई. 20 मई को सभी पुणे से पैदल चले थे. पास में बहुत पैसे भी नहीं थे. सो खाना भी नहीं खा रहे थे. इन 16 मजदूरों में 14 लोग झींकपानी प्रखंड के माटागुटू गांव के हैं.

जबकि दो लोग चाईबासा जिले के ही हाटगम्हरिया तथा टोटों के अलग- अलग गांव के हैं. 

कानू बताते हैं कि डेढ़ महीने पहले ही उनलोगों ने वापस झौरखंड लौटने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. दिन बीते. हफ्ते बीते. कोई मदद नहीं मिली.

इस दौरान देखे कि सब तरफ से मजदूर पैदल ही वापस गावों को लौट रहे हैं. तब हमलोगों ने भी पैदल वापस होने का फैसला लिया. 

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कानू खंडाइत को इसकी पीड़ा है कि सरकार ने दुख में साथ नहीं दिया. मानो उनका कोई वजूद नहीं. इधर बिल्डर का आदमी पैसा नहीं दे रहा था.

तीन दिन पैदल चलने के बाद 23 की देर रात सभी मजदूर वर्धा पहुंचे थे. वर्धा रेलवे स्टेशन के पास हमलोग ने पड़ाव डाला. सोचा सुबह फिर सफर शुरू करेंगे. 

देर रात विजय खंडाइत की तबीयत बिगड़ने लगी. हमलोग घबरा गए. एक रिक्शावाला को 50 रुपए दिए, तो उसने एक अस्पताल पहुंचा दिया. वहां से बड़ा अस्पताल एंबुलेंस से भेजा गया. लेकिन बड़ा अस्पताल में विजय खंडाइत की मौत हो गई. कौन सा अस्पताल है, यह पूछे जाने पर कानू बताते हैं कि नेताजी चौक के सामने ज़िला सरकारी अस्पताल है. 

बाकी पंद्रह मजदूरों को एक आीटीआई कॉलेज में ठहराया गया है. कानू बताते हैं कि गांव के लोगों से संपर्क बना है. घर परिवार और गांव के लोगों ने कहा है, ''साथी विजय खंडाइत की लाश छोड़ कर मत आना. अगर वर्धा में दाह संस्कार होगा, तो मिट्टी, या राख लेकर वापस जाएंगे.'' 

इस बीच चाईबासा की सांसद गीता कोड़ा ने झारखंड सरकार और महाराष्ट्र सरकार का ध्यान दिलाते हुए मदद की दरकार बताई है. उन्होंने ट्वीट कर मजदूरों का एक वीडियो भी साझा किया है. घटना की जानकारी चाईबासा पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को भी मिली है.  

चाईबासा पुलिस ने वर्धा में फंसे मजदूरों से संपर्क स्थापित किया है. साथ ही वर्धा के अधिकारियों से भी समन्वय स्थापित किया गया है.

महाती कानू बताते हैं कि दस हजार रुपए की मदद चाईबासा से साहबों ने अकाउंट में भेजी है. लेकिन दस हजार रुपए की मदद से ज्यादा जरूरी है कि हमलोग को वापस लाने की व्यवस्था की जाती. 

महाती बताते हैं कि वर्धा में सभी मजदूरों की जांच करा ली गई है. अगर यहां से जाने की इजाजत मिल जाती तो अच्छा होता. 


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