सीएए हर हाल में लागू होगाः जेपी नड्डा

सीएए हर हाल में लागू होगाः जेपी नड्डा
पीबी ब्यूरो ,   Oct 20, 2020

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा है  कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) हर हाल में लागू होगा और इसके लिए नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है.

खबरों के मुताबिक सोमवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुडी में एक रैली में उन्होंने कहा, "यह तय है कि सीएए लागू होगा. कोरोना वायरस की वजह से इसे लागू करने में देरी हुई है. लेकिन हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं. काम शुरू हो गया है और नियम बनाए जा रहे हैं."

अगस्त की शुरुआत में ऐसी ख़बरें आई थीं कि गृह मंत्रालय ने सीएए के नियम तय करने के लिए तीन महीने का समय और दिए जाने की मांग की थी.

बंगाल में सीएए को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इस क़ानून के ख़िलाफ़ है और सड़क पर उतरकर विरोध भी जता रही है.

2021 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तर बंगाल के बीजेपी नेताओं और सामाजिक धार्मिक संगठनों के साथ बैठक में नड्डा ने राज्य में बीजेपी की सरकार बनने को लेकर विश्वास जताया.

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उन्होंने कहा, 'बीजेपी और मोदी जी की मूल नीति है- सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास. दूसरी पार्टियों कि नीति है- भेद डालो, समाज को बांटो, अलग-अलग करके रखो, अलग-अलग मांग करो और राज करो.'

बीजेपी अध्यक्ष ने टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, 'दुख की बात है कि ममता जी की सरकार ने किसान सम्मान निधि को बंगाल में लागू नहीं होने दिया. बंगाल के 76 लाख किसानों को इससे वंचित रखा गया है. ऐसा ही आयुष्मान भारत योजना के साथ भी किया गया. अब जब समझ में आ गया तो हर समाज को जोड़ने के लिए फुसलाने का प्रयास हो रहा है. ये वो लोग हैं जो केवल वोटबैंक की राजनीति करते हैं, सिर्फ सत्ता में रहने के लिए राजनीति करते हैं.'

क्या है सीएए


गरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है.

पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य था. इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है यानी इन तीनों देशों के ऊपर उल्लिखित छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत आकर बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी.

आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत के तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाया गया है.

विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध यह है कि इसमें खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है. उनका तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की बात करता है.

साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक बड़े वर्ग का कहना है कि अगर नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लागू किया जाता है तो पूर्वोत्तर के मूल लोगों के सामने पहचान और आजीविका का संकट पैदा हो जाएगा.


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