'मेनहर्ट नियुक्ति घोटाला, लम्हों की खता' पर आई किताब, रघुवर बोले, क्या सिर्फ सरयू राय ही हैं 'सत्यवादी'

'मेनहर्ट नियुक्ति घोटाला, लम्हों की खता' पर आई किताब, रघुवर बोले, क्या सिर्फ सरयू राय ही हैं 'सत्यवादी'
पीबी ब्यूरो ,   Jul 27, 2020

पूर्व मंत्री और जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय विधायक सरयू राय द्वारा लिखी किताब-“मेनहर्ट नियुक्ति घोटाला लम्हों की खता”का आज विमोचन किया गया. इस पुस्तक में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और तत्कालीन नगर विकास मंत्री निशाने पर हैं.

राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार और सरयू राय ने इस किताब का लोकार्पण किया. इस बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस किताब को लेकर सरयू राय पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि क्या सरयू राय ही सिर्फ सत्यवादी हैं. 

नेचर फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित इस किताब में राजधानी रांची में सिवरेज- ड्रेनेज प्रोजेक्ट को लेकर परामर्शी कंपनी मेनहर्ट की नियुक्ति को लेकर कथित तौर पर गड़बड़ियों को उगार किया है. उस वक्त रघुवर दास नगर विकास मंत्री थे. 

विमोचन से पहले सरयू राय ने किताब की सॉफ्ट कॉपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजा है. 

इधर पूर्व मुख्य सचिव अशोक सिंह ने यह किताब लिखे जाने के लिए सरयू राय की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि किसी भी काम के लिए कंसल्टेंट नियुक्ति करना गलत नहीं है. लेकिन नियुक्ति में गड़बड़ी होगी तो काम में भी गड़बड़ी होगी.

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निशाने पर रघुवर

इस किताब में 19 खंड हैं. पहले खंड में 2005 में विधानसभा के अंदर मैनहर्ट मामले में हुई चर्चा को शामिल किया गया है. विधानसभा से ही मैनहर्ट के मामले ने तूल पकड़ा था. 

इसके अलग-अलग खंडों में समय-समय पर हुई जांच से लेकर उसके निष्कर्ष हैं. पूरी किताब सरकारी फाइलों पर दर्ज टिप्पणी व तथ्यों पर आधारित है. इसके प्रकाशन से पूर्व इसे सार्वजनिक भी किया गया ताकि तथ्यों से जुड़े आपत्ति पर विचार किया जा सके. 

मीडिया से बातचीत में सरयू राय ने कहा है कि इस किताब के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि कैसे किसी प्रोजेक्ट की भ्रूण हत्या कर दी गई. उनका य़ह भी कहना था कि ऐसी पुस्तक पढ़ना थोड़ा ऊबाऊ होता है. लेकिन किताब लिखने के दौरान भरसक कोशिश की गई है है कि पुस्तक ऊबाऊ न लगे. 

उन्होंने कहा कि पूरी किताब तथ्य और सच्चाई पर आधारित है. रघुवर दास ने सिवरेज- ड्रेनेज को लेकर पूर्व में चयनित दो परामर्शी कंपनियों को काम से हटा दिया और टेंडर गाइलाइन को दरकिनार करते हुए मेनहर्ट कंपनी का चयन किया. 

उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में साक्ष्य के साथ उन्हीं सारी अनियमितताओं का जिक्र है जो नगर विकास मंत्री रहते हुए रघुवर दास ने किए हैं. 

2019 का चुनाव लड़ने के दौरान मैंने जमशेदपुर पूर्वी की जनता से वादा किया था कि मैं मेनहर्ट नियुक्ति मामले के सारी अनियमिताओं को जनता के सामने लाऊंगा.

रघुवर का पलटवार 

इस किताब पर रघुवर दास ने पलटवार करते हुए कहा है, ''सरयू राय जी की किताब मैनहर्ट पर आई है, जिसमें मेरे नाम का उल्लेख है. ऐसी स्थिति में झारखंड की जनता को सच जानने का अधिकार है. यह एक ऐसा मामला है, जिसे विधायक सरयू राय समय-समय पर उठाकर चर्चा में बने रहना चाहते हैं. उन्होंने पहले भी कई बार इस मुद्दे को उठाया है. जनता यह जानना चाहेगी कि आखिर बार-बार मैनहर्ट का मुद्दा उठाकर राय जी क्या बताना चाहते हैं? किस बात को लेकर उन्हें नाराजगी है? कहीं ओ.आर.जी. को दिया गया ठेका रद्द करने से तो वे नाराज नहीं है''?

बयान जारी कर रघुवर दास ने कहा है, ''जिस मैनहर्ट पर यह किताब है, वह मामला बहुत पुराना है. इसकी जांच भी हो चुकी है. सचिव ने जांच की. मुख्य सचिव ने जांच की. कैबिनेट में यह मामला गया. भारत सरकार के पास मामला गया. वहां से स्वीकृति मिली. कोर्ट के आदेश के बाद भुगतान किया गया. तो क्या कोर्ट के आदेश को भी नहीं मानते हैं राय जी. क्या यह माना जाए कि सरकार से लेकर न्यायालय के आदेश तक, जो भी निर्णय हुए वह सब गलत थे और सरयू राय जी ही सही हैं. यदि उन्हें लगा कि कोर्ट का आदेश सही नहीं था तो वे अपील में क्यों नहीं गये? कोर्ट नहीं जाकर अब किताब लिख रहे हैं.''

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रघुवर दास ने सवालिया लहजे में कहा है, ''क्या सरयू राय जी इस मामले को विगत 10 वर्षों से भ्रष्टाचार का मामला बताकर आम जनता को गुमराह करने एवं उनकी आंखों में धूल झोंकने का काम करते रहे हैं.जिस शासन तथा पार्टी का वे हिस्सा रहे, उसके विरूद्ध अनर्गल बातें करना उनका स्वभाव रहा है. सरकार की बातों को बाहर करना हो या पार्टी, माननीय प्रधानमंत्री जी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कोसना हो, उन्होंने कोई मौका नहीं छोड़ा।. मैंने अपने कार्यकाल में राज्य के विकास के लिए दिन रात मेहनत की और राज्य को विकास के पथ पर ला खड़ा किया है. अफसोस है कि राय जी ने सिर्फ इसलिए मेरा प्रतिकार करते रहे हैं कि संभवत: भगवान उन्हें सुबुद्धि प्रदान करें, इससे अधिक मैं क्या ही कह सकता हूं.''


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