70 हजार भाड़ा देकर मुंबई से लौटे 7 मजदूर, बाबूलाल बोले, 'हेमंत जी, अफसर आपको सच बताते नहीं'

70 हजार भाड़ा देकर मुंबई से लौटे 7 मजदूर, बाबूलाल बोले, 'हेमंत जी, अफसर आपको सच बताते नहीं'
Publicbol (File Photo)
पीबी ब्यूरो ,   May 23, 2020

बहुत बदसलूकी होने लगा था हमलोगों के साथ मुंबई ईस्ट में. इधर झारखंड की सरकार और अफसरों से कोई मदद नहीं मिल रही थी. मजदूरी तो बहुत दिनों से करते रहे हैं, पर इस तरह की मुश्किल में कभी नहीं फंसे थे. घर वालों ने कर्ज लेकर पैसे भेजे. 70 हजार भाड़ा देकर 7 लोग लौटने में सफल रहे. 

तुलसी यादव फोन पर एक सांस में यह सब बोल जाते हैं. उनसे यही पूछा था कि कैसे और कब लौटे मुंबई से. तुलसी यादव झारखंड में गिरिडीह जिले के राजधनबार विधानसभा क्षेत्र के करगली खुर्द पंचायत के दलदल गांव निवासी हैं. 

इस बीच अपने बूते हजारों खर्च वापस लौटे प्रवासी मजदूरों की हालत पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने सरकार पर हमला बोला है, सुदेश महतो ने पहले ही सरकार से मजदूरों के खर्च पैसे लौटाने को कहा है. 

तुलसी दास अपने सात मजदूर साथियों के साथ 13 मई को मुंबई से सरिया लौटने में सफल रहे.  वे बताते हैं कि ईंट चिमनी में काम करते थे. जब दिहाड़ी खटते थे, तो घर भी कुछ पैसे भेजते थे. लेकिन लॉकडाउन में स्थिति बिगड़ती चली गई. 

वहां (मुंबई) की पुलिस के पास मदद के लिए गए, तो डांट कर भगा दिया गया. इधर झारखंड सरकार के पास गुहार लगाते रहे, तब भी मुकम्मल मदद नहीं मिलती. मुंबई में जहां रहते थे, वहां परचून दुकान वाले के खाते में घरों से पैसे मंगाए और वापस लौटे. 

इसे भी पढ़ें: लॉकडाउन में किसानों की क्या मदद की गई और कर्जमाफी से क्यों मुंह मोड़ रही सरकारः सुदेश

घर वालों से पैसे मंगाने पड़े. ट्रक वाले ने 70 हजार रुपए किराये वसूले. 7 लोगों के 70 हजार रुपए ले लिए, सवाल पर वे कहते हैं ट्रक वाले तो बिहार, झारखंड के मजदूरों को लूटने में लगे हैं. खासकर महाराष्ट्र, सूरत जैसी जगहों पर. लेकिन मरता क्या नहीं करता. 

तुलसी यादव के साथ दलदल गांव के रंजीत यादव, लक्ष्मण यादव, शैलेंद्र यादव, नीरज यादव समेत सात लोग इन दिनों दलदल गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में बनाए क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे हैं. तुलसी बताते हैं कि स्कूल की साफ- सफाई उनलोगों ने खुद से की है. कई मौके पर खाने की दिक्कत होती है, तो गांव के लोगों तक खबर भिजवाते हैं कि हाकिमों तक उनकी हालत की जानकारी पहुंचा दी जाए.

तुलसी यादव कहते हैं कि क्वारंटाइन का समय काट ही लेंगे. लेकिन इसके बाद रोजी रोजगार को लेकर क्या होगा, यह सोच कर दिल घबरा जाता है. जबकि मुंबई के नाम से अब वैसे ही कलेजा कांप जाता है.

इन मजदूरों की आपबीती से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राजधनबार के विधायक बाबूलाल मरांडी भी वाकिफ हुए हैं. उन्होंने इस सवाल पर हेमंत सोरेन की सरकार पर तंज कसा है. ट्वीट करके उन्होंने कहा है, ''मुख्यमंत्री जी, इस गंभीर मामले को देखिए. खुद समझने का प्रयास कीजिए. इस तैयारी के भरोसे कोरोना को कैसे परास्त कर पाएंगे. अगर अफसर आपको वासत्विकता नहीं समझने दे रहे हैं, तो उनकी गिरफ्त से बाहर निकलिए.'' 


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